पहाड़ों की बारिश का कहर! बिहार के इस जिले पर मंडराया बड़ा खतरा, खाली करने की नौबत

पहाड़ों की बारिश का कहर! बिहार के इस जिले पर मंडराया बड़ा खतरा, खाली करने की नौबत

नेपाल और उत्तराखंड के पहाड़ी जल ग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में साफ दिखने लगा है। पर्वतीय इलाकों से आ रहे पानी के कारण भागलपुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से चढ़ रहा है।

हालांकि राहत की बात यह है कि नदी अभी खतरे के निशान से काफी नीचे है लेकिन जलस्तर में आ रहे इस उफान ने तटीय इलाकों और दियारा के निवासियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

24 घंटे में 30 सेंटीमीटर तक बढ़ रहा पानी

केंद्रीय जल आयोग और बाढ़ नियंत्रण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में नदी के जल स्तर में रोजाना 14 से 30 सेंटीमीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

नवगछिया और भागलपुर के सीमावर्ती स्पर-07 पर गंगा का स्तर 29.02 से 29.78 मीटर के बीच पहुंच चुका है। भागलपुर में चेतावनी का स्तर 33.68 मीटर निर्धारित है। फिलहाल नदी लाल निशान से करीब साढ़े तीन से चार मीटर नीचे बह रही है।

नदी का पानी इस्माईलपुर-बिंदटोली सुरक्षा बांध के निचले हिस्से तक पहुंच चुका है। अभियंताओं का कहना है कि तटबंध को फिलहाल कोई खतरा नहीं है और वह पूरी तरह सुरक्षित हैं।

डूबे घाट और सुल्तानगंज में बढ़ाई गई सुरक्षा

पानी के फैलाव के कारण निचले इलाकों और घाटों पर असर दिखने लगा है। भागलपुर स्थित बूढ़ानाथ घाट पर बनी बांस की चचरी जलमग्न हो गई है और पानी मंदिर के प्रांगण की ओर बढ़ रहा है।

दूसरी ओर सुल्तानगंज के प्रसिद्ध नमामि गंगे घाट पर बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग कर दी है। आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं तथा कटाव रोकने के इंतजाम तेजी से किए जा रहे हैं।

निचले इलाकों के निवासियों के लिए अलर्ट जारी

सुल्तानगंज नाथनगर और कहलगांव के दियारा क्षेत्रों तथा तटीय बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की तैयारी रखें और नदी के करीब जाने से बचें।

अगले 4-5 दिनों तक जारी रह सकता है जलस्तर में इजाफा

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि मानसून के सक्रिय रहने के कारण आने वाले चार से पांच दिनों में जलस्तर और ऊपर चढ़ सकता है। केंद्रीय जल आयोग की टीमें 24 घंटे नदी के बहाव और तटबंधों की निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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