2028 तक का अल्टीमेटम: बिहार के लाखों पुराने शिक्षकों की कुर्सी खतरे में, क्या छिन जाएगी सरकारी नौकरी

2028 तक का अल्टीमेटम: बिहार के लाखों पुराने शिक्षकों की कुर्सी खतरे में, क्या छिन जाएगी सरकारी नौकरी

बिहार के सरकारी विद्यालयों में लंबे समय से पढ़ा रहे पुराने शिक्षकों के सामने अपनी सेवा बचाने और पदोन्नति पाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी कड़े दिशा-निर्देशों के अनुपालन में राज्य शिक्षा विभाग अब इन शिक्षकों के लिए एक 'विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा' (स्पेशल TET) आयोजित करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से काम कर रहा है। 

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस विशेष पात्रता परीक्षा को संपन्न कराने का जिम्मा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) को सौंपा जा सकता है। परीक्षा का वास्तविक प्रारूप क्या होगा, इसका सिलेबस कैसा रहेगा और किन-किन शिक्षकों को अनिवार्य रूप से इसमें बैठना होगा, इस पर विभाग उच्च स्तर पर मंथन कर रहा है और जल्द ही आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी में है।

पदोन्नति और सेवा निरंतरता से जुड़ा नियम

शिक्षा विभाग के समक्ष सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यह तय करना है कि पहले से सेवारत शिक्षकों के सेवा विस्तार और पदोन्नति (प्रमोशन) में टीईटी की अनिवार्यता को किस तरह लागू किया जाए। विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने के पीछे मुख्य मकसद यही है कि कानूनी पेंच से बचते हुए शिक्षकों को अपनी पात्रता प्रमाणित करने का मौका दिया जा सके। हालांकि, परीक्षा की तिथियों, अर्हता और सेवा शर्तों को लेकर अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विभाग की सक्रियता से शिक्षकों के बीच भारी हलचल देखने को मिल रही है।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और समय-सीमा

इस पूरे मामले की जड़ में सुप्रीम कोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला है, जो 1 सितंबर 2025 को 'अंजुमन इशाअत-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र सरकार' वाद में सुनाया गया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया था कि शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के दायरे में आने वाले सभी स्कूलों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। आदेश के तहत 1 अप्रैल 2010 से पूर्व बहाल वैसे शिक्षक, जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का सेवाकाल शेष है, उन्हें अपनी नौकरी जारी रखने के लिए निर्धारित समय में टीईटी पास करना होगा; अन्यथा उन्हें सेवा से हाथ धोना पड़ सकता है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। 

वहीं, जिन अध्यापकों के रिटायरमेंट में 5 वर्ष से कम समय बचा है, वे बिना परीक्षा पास किए सेवानिवृत्ति तक पद पर बने तो रह सकेंगे, लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार के प्रमोशन का लाभ नहीं मिलेगा। बाद में 29 मई 2026 को इस फैसले से जुड़ी समीक्षा याचिकाओं को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने टीईटी उत्तीर्ण करने की अंतिम समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी थी, जिसके चलते अब बिहार सरकार इस आदेश को जमीनी स्तर पर अमलीजामा पहनाने में जुट गई है।