वाराणसी और अमृतसर समेत देश के 11 प्रमुख एयरपोर्ट जल्द जाएंगे प्राइवेट हाथों में
भारतीय विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) और देश के बुनियादी ढांचे में एक बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिससे आने वाले समय में हवाई यात्रा का पूरा परिदृश्य ही बदल सकता है। केंद्र सरकार देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों के 11 महत्वपूर्ण और व्यस्त एयरपोर्ट्स को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड के तहत निजी हाथों में सौंपने की व्यापक तैयारी कर चुकी है। इस सूची में देश के सबसे प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी (बाबतपुर एयरपोर्ट) और पंजाब के पवित्र शहर अमृतसर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एयरपोर्ट्स भी शामिल हैं। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य हवाई अड्डों की बुनियादी संरचना, यात्री सुविधाओं, आधुनिकीकरण और प्रबंधन को विश्व स्तरीय बनाना है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या देश के एविएशन सेक्टर में कुछ ही बड़ी कंपनियों या घरानों का एकाधिकार (Monopoly) हावी हो चुका है, और इस मोनोपॉली को तोड़ने तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Healthy Competition) को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है। आइए विस्तार से जानते हैं कि एयरपोर्ट्स के इस निजीकरण और नई नीति के पीछे सरकार का असली मास्टरप्लान क्या है।
कौन-से 11 एयरपोर्ट्स होंगे प्राइवेट और क्या है सरकार का पूरा निजीकरण मॉडल
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) द्वारा तैयार किए गए नए प्रस्ताव के तहत, वाराणसी और अमृतसर के अलावा देश के अन्य मध्यम आकार के हवाई अड्डों को भी निजी निवेशकों को ऑपेरेटिंग लीज पर दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इन हवाई अड्डों पर यात्रियों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके चलते मौजूदा सरकारी बुनियादी ढांचा नाकाफी साबित हो रहा था। पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत निजी कंपनियां इन एयरपोर्ट्स के विकास, रख-रखाव, रनवे के विस्तार, टर्मिनल बिल्डिंग के आधुनिकीकरण और कमर्शियल स्पेस के प्रबंधन का जिम्मा संभालेंगी। सरकार का तर्क है कि इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा, बल्कि यात्रियों को एयरपोर्ट्स पर वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं, बेहतरीन लाउंज, तेज प्रोसेसिंग और आधुनिक तकनीक का अनुभव मिल सकेगा। स्थानीय स्तर पर इन हवाई अड्डों के निजी हाथों में जाने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रोजगार के नए अवसर भी तेजी से पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
विमानन क्षेत्र में मोनोपॉली को लेकर चिंताएं और सरकार की नई एंटी-मोनोपोली रणनीति
पिछले कुछ समय से भारतीय विमानन बाजार में एक या दो बड़े कॉरपोरेट घरानों के हाथों में अधिकांश एयरपोर्ट्स के संचालन चले जाने के कारण 'मोनोपॉली' (एकाधिकार) को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे थे। उद्योग विशेषज्ञों और संसदीय समितियों ने भी इस बात पर चिंता जताई थी कि यदि देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स का नियंत्रण कुछ ही हाथों में सिमट गया, तो वे एयरलाइंस और यात्रियों दोनों के लिए मनमानी फीस, यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) और पार्किंग चार्जेस तय कर सकते हैं, जिससे अंततः आम जनता की जेब पर ही भारी बोझ पड़ेगा। इस बढ़ती चिंता को दूर करने के लिए केंद्र सरकार अब एक बेहद सख्त और संतुलित एंटी-मोनोपोली कैप (Monopoly Cap) नीति तैयार कर रही है। इस नई नीति के तहत सरकार यह प्रावधान कर रही है कि कोई भी एक सिंगल कंपनी या समूह देश के एक निश्चित प्रतिशत से अधिक एयरपोर्ट्स का संचालन अपने हाथ में नहीं ले सकेगा। इसके अलावा, नए और छोटे खिलाड़ियों तथा कंसोर्टियम को भी बिडिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए समान अवसर दिए जाएंगे, ताकि बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे और यात्रियों को कम कीमत पर बेहतर सेवाएं मिल सकें।
आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संपर्क और भविष्य के एविएशन बाजार पर पड़ेगा दूरगामी असर
भारत इस वक्त दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ने वाला घरेलू विमानन बाजार बन चुका है, जहाँ हर साल करोड़ों लोग हवाई यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में वाराणसी जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के शहरों और अमृतसर जैसे धार्मिक व व्यापारिक केंद्रों के एयरपोर्ट्स का निजीकरण होना इस बात का संकेत है कि सरकार देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालना चाहती है। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि निजीकरण के साथ-साथ उपभोक्ता संरक्षण और शुल्क नियंत्रण (Tariff Regulation) के लिए एक मजबूत स्वतंत्र नियामक (Regulatory Body) का होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि प्राइवेट कंपनियां अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न कर सकें। आने वाले महीनों में जब इन 11 एयरपोर्ट्स के लिए बोलियां आमंत्रित की जाएंगी, तब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि कौन-कौन सी बड़ी कंपनियां इसमें हिस्सा लेती हैं और सरकार की यह नई नीति विमानन बाजार में एकाधिकार को रोकने में कितनी सफल साबित होती है।