जंग पड़ रही भारी? ईरान वॉर पर खाक हो गए साढ़े 3 लाख करोड़, जानिए अब तक अमेरिका को क्या हुआ हासिल

जंग पड़ रही भारी? ईरान वॉर पर खाक हो गए साढ़े 3 लाख करोड़, जानिए अब तक अमेरिका को क्या हुआ हासिल

पश्चिम एशिया में सुलग रही युद्ध की आग अब खुद महाशक्ति अमेरिका के लिए एक ऐसा चक्रव्यूह बन चुकी है जिससे निकलना उसके लिए बेहद मुश्किल हो गया है。 अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के ताजा और बेहद चौंकाने वाले कबूलनामे ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है。 अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट की विनियोग समिति (Senate Appropriations Committee) के सामने गवाही देते हुए आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि ईरान के साथ चल रही इस जंग में अमेरिका अब तक 37.5 अरब डॉलर (यानी करीब 3.61 लाख करोड़ रुपये) पानी की तरह बहा चुका है। इतनी भारी-भरकम रकम खर्च करने के बाद भी अमेरिकी संसद के भीतर और बाहर अब यह बड़ा सवाल गूंज रहा है कि आखिर इस विनाशकारी जंग से वॉशिंगटन को अब तक क्या हासिल हुआ है?

सीनेट में रक्षा मंत्री की घेराबंदी, अमेरिकी करदाताओं के पैसों की बर्बादी पर हंगामा

अमेरिकी संसद में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को इस भारी-भरकम युद्ध खर्च को लेकर विपक्षी डेमोक्रेटिक सांसदों के तीखे तीरों और कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है。 समिति की शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य सीनेटर पैटी मरे ने बाकायदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'यह युद्ध एक बार फिर बेकाबू होता जा रहा है और अमेरिका एक और कभी न खत्म होने वाली जंग (Endless War) की ओर बढ़ रहा है'。 विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा करते हैं कि ईरान के साथ बहुत जल्द समझौता हो जाएगा, लेकिन पर्दे के पीछे वे संसद से 70 अरब डॉलर से ज्यादा का अतिरिक्त इमरजेंसी वॉर फंड (Supplemental Budget) मांग रहे हैं。 टैक्सपेयर्स के पैसों को इस तरह बम और मिसाइलों पर उड़ाए जाने को लेकर अमेरिकी जनता में भी भारी गुस्सा देखा जा रहा है।

अरबों डॉलर खाक, लेकिन हासिल क्या हुआ? अमेरिकी सैनिकों की मौत और सैन्य अड्डों की तबाही

अगर इस जंग के नतीजों का रिपोर्ट कार्ड देखा जाए, तो साढ़े 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा करने के बाद भी अमेरिका की झोली पूरी तरह खाली नजर आती है।

जान-माल का भारी नुकसान: इस आक्रामक सैन्य अभियान के बदले में अमेरिका को केवल रणनीतिक नाकामी और अपने जवानों की शहादत झेलनी पड़ी है। पेंटागन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया ईरानी हमलों में 3 और अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है, जिसके बाद केवल जुलाई महीने की शुरुआत से अब तक कुल 17 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 100 से अधिक जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा होरमुज की खाड़ी और मध्य पूर्व में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों में भारी नुकसान पहुंचा है, जिसे ठीक करने में अरबों का अतिरिक्त खर्च आ रहा है।

$1.5 ट्रिलियन का भारी-भरकम रक्षा बजट, सेना में फंड की भारी किल्लत

इतने बड़े नुकसान के बावजूद, बाइडन प्रशासन के उलट वर्तमान ट्रंप प्रशासन इस जंग को पीछे खींचने के मूड में नहीं दिख रहा है。 रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट में कड़े तेवर दिखाते हुए चेतावनी दी है कि रिपब्लिकन पार्टी की ओर से तैयार किया जा रहा 95 अरब डॉलर का इमरजेंसी फंड और राष्ट्रपति ट्रंप का 1.5 ट्रिलियन डॉलर का प्रस्तावित रक्षा बजट अमेरिकी सेना के अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर यह भारी बजट तुरंत मंजूर नहीं किया गया, तो अमेरिकी सेना को भविष्य में हथियारों, गोला-बारूद और सैन्य ट्रेनिंग में भारी शॉर्टफाल (कमी) का सामना करना पड़ेगा, जो देश की सुरक्षा के लिए घातक हो सकता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा भयंकर असर, भारत सहित पूरी दुनिया में मंदी का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी इस जंग का खामियाजा सिर्फ इन दोनों देशों को ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों को भी भुगतना पड़ रहा है。 होरमुज की खाड़ी के साथ-साथ अब लाल सागर (Red Sea) के रूट पर भी व्यापारिक जहाजों पर हमले का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है。 इस सैन्य तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल $92 प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर गया है, जिसके कारण भारत के घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतें अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंच चुकी हैं और शेयर बाजार लगातार गोते लगा रहा है। दिल्ली, मुंबई और यूपी-बिहार जैसे राज्यों के आम उपभोक्ताओं पर भी इस युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई की मार पड़ने लगी है।

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