कार में E20 के बाद अब किचन में भी होगी इथेनॉल की एंट्री! जानिए एलपीजी के विकल्प पर सरकार का नया प्लान और इसके नफा-नुकसान

कार में E20 के बाद अब किचन में भी होगी इथेनॉल की एंट्री! जानिए एलपीजी के विकल्प पर सरकार का नया प्लान और इसके नफा-नुकसान

गाड़ियों की टंकियों में E20 (पेट्रोल में 20% इथेनॉल) की सफलता के बाद अब केंद्र सरकार देश की रसोईघरों में एक बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय एक ऐसी नीति का मसौदा तैयार कर रहा है, जिसके तहत इथेनॉल को घरेलू रसोई गैस (LPG) के एक बड़े और मुख्य विकल्प के रूप में उतारा जा सकता है। इस नई नीति का खाका इसी साल सितंबर तक तैयार होने की उम्मीद है। आइए जानते हैं कि सरकार की इस योजना के पीछे की वजह क्या है और आम आदमी के लिए इसके क्या नफा-नुकसान हो सकते हैं।

क्यों पड़ रही है एलपीजी के विकल्प की जरूरत?

भारत अपनी एलपीजी (LPG) की कुल जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात (Imports) यानी विदेशों से मंगाकर पूरा करता है। मध्य पूर्व (Middle East) और अन्य देशों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालातों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का हमेशा खतरा बना रहता है। इसके अलावा, देश में गन्ने, मक्का और अन्य अनाजों से बनने वाले इथेनॉल का उत्पादन वर्तमान में मांग से कहीं ज्यादा यानी सरप्लस में चल रहा है। इस अतिरिक्त इथेनॉल का सही इस्तेमाल करने और एलपीजी पर विदेशी निर्भरता घटाने के लिए सरकार यह नया कदम उठाने जा रही है।

कैसे काम करेगा किचन में इथेनॉल का यह सिस्टम?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कई खास व्यवस्थाओं पर विचार कर रही है:

  • इथेनॉल स्टोव (Ethanol Stoves): आईआईटी (IITs) और अन्य रिसर्च सेंटर विशेष प्रकार के इथेनॉल से चलने वाले चूल्हों और कुकिंग सिस्टम के प्रोटोटाइप तैयार करने में जुटे हैं।

  • इथेनॉल एटीएम (Ethanol ATMs): पेट्रोल पंपों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के रिटेल आउटलेट्स पर खास 'इथेनॉल एटीएम' या डिस्पेंसर लगाए जा सकते हैं, जहां से उपभोक्ता कैलिस्टर या कनस्तर में इथेनॉल भरकर अपने घर ले जा सकेंगे।

  • सब्सिडी और वित्तीय प्रोत्साहन: इस नए ईंधन को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने और शुरुआती खर्च को कम करने के लिए सरकार एथेनॉल स्टोव पर कैपिटल सब्सिडी या अन्य वित्तीय सहायता देने का प्रावधान भी ला सकती है।

क्या होंगे इस योजना के फायदे? (नफा)

  1. ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): विदेशों से आयात होने वाले एलपीजी पर भारत की निर्भरता कम होगी, जिससे देश के अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचेगी।

  2. किसानों को लाभ: गन्ने और अनाज (मक्का आदि) का इस्तेमाल बढ़ने से देश के किसानों और कृषि आधारित बायोफ्यूल सेक्टर को सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा।

  3. पर्यावरण की रक्षा: इथेनॉल एक 'ग्रीन फ्यूल' है, जिसके जलने से पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) की तुलना में कम ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं।

  4. अतिरिक्त उत्पादन का सदुपयोग: देश में हर साल जो करोड़ों लीटर अतिरिक्त (Surplus) इथेनॉल बच जाता है, उसकी खपत के लिए एक बड़ा घरेलू बाजार मिल जाएगा।

क्या हो सकती हैं चुनौतियां और नुकसान? (नुकसान व चिंताएं)

  1. सुरक्षा और रख-रखाव: इथेनॉल एक ज्वलनशील अल्कोहल आधारित तरल ईंधन है। घरों में इसे स्टोर करने और कनस्तरों में लाने-ले जाने में सुरक्षा से जुड़े कड़े मानकों का पालन करना होगा, अन्यथा घरेलू हादसों का जोखिम बढ़ सकता है।

  2. नए उपकरणों का खर्च: पारंपरिक एलपीजी चूल्हों की जगह नए इथेनॉल स्टोव और विशेष बर्नर खरीदने के लिए शुरुआती दौर में उपभोक्ताओं को जेब ढीली करनी पड़ सकती है।

  3. सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स: देश के हर कोने तक ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सुरक्षित तरीके से इथेनॉल की आपूर्ति सुनिश्चित करना एक बड़ा लॉजिस्टिक चैलेंज होगा।

निष्कर्ष के तौर पर, सरकार का यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है, बशर्ते इसकी सुरक्षा और डिस्ट्रिब्यूशन चेन को बेहद मजबूत रखा जाए।

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