Crude Oil Crisis: अमेरिका-ईरान के बीच गहराया संघर्ष, क्रूड ऑयल में फिर उछाल; जानें क्या है आज पेट्रोल-डीजल का हाल?
मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर हमलों और अमेरिका द्वारा फिर से नाकाबंदी (Blockade) घोषित करने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उबाल आ गया है। 15 जुलाई 2026 को क्रूड ऑयल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
कच्चे तेल में क्यों आई तेजी?
अमेरिका और ईरान के बीच जून 2026 में हुआ अस्थायी संघर्ष विराम (Ceasefire) पूरी तरह टूट चुका है।
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संघर्ष का केंद्र: होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया की 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, इस समय विवाद का मुख्य केंद्र बन गया है।
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सैन्य तनाव: अमेरिका ने ईरान पर तेल टैंकरों पर हमले का आरोप लगाते हुए सैन्य हमले तेज कर दिए हैं। वहीं, ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
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बाजार पर असर: आपूर्ति बाधित होने की आशंका और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण निवेशक काफी सतर्क हैं, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम (15 जुलाई 2026)
कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक तेजी के बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा भाव फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। आज (15 जुलाई 2026) के प्रमुख शहरों के दाम नीचे दिए गए हैं:
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
| नई दिल्ली | ₹102.12 | ₹95.20 |
| मुंबई | ₹111.21 | ₹97.83 |
| कोलकाता | ₹113.51 | ₹99.82 |
| चेन्नई | ₹107.76 | ₹99.55 |
| नोएडा | ₹101.96 | ₹95.44 |
(नोट: ये कीमतें दैनिक अपडेट के अनुसार हैं, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता के कारण आने वाले दिनों में इनमें बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।)
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध का समाधान जल्द नहीं निकलता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका असर सीधे तौर पर भारत जैसे तेल आयातक देशों के आयात बिल पर पड़ेगा, जिससे भविष्य में ईंधन की कीमतों में इजाफा हो सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा दी है।