क्रूड ऑयल बाजार में फिर उबाल: होर्मुज जलडमरूमध्य और हूती विद्रोहियों की एंट्री से $90 के करीब पहुंचा कच्चा तेल, हिमाचल में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं
वैश्विक राजनीति और समुद्री सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया के बेहद संवेदनशील 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के पास जहाजों पर बढ़ते तनाव के बीच अब लाल सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में यमन के हूती विद्रोहियों (Houthis) की आक्रामक एंट्री ने तेल बाजार (Crude Oil Market) का पूरा खेल बिगाड़ दिया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल और सप्लाई चेन बाधित होने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से उछलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए हैं, जिसका असर अब भारत के राज्यों में भी दिखने लगा है।
क्यों बिगड़ा तेल का खेल? समझें पूरा समीकरण
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस अचानक उबाल के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण जिम्मेदार बताए जा रहे हैं:
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट: दुनिया का एक तिहाई से ज्यादा समुद्री तेल व्यापार इसी रूट से होकर गुजरता है। यहां बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण क्रूड ऑयल के परिवहन पर तलवार लटक गई है।
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हूती विद्रोहियों की समुद्री एंट्री: यमन के हूती गुट द्वारा लगातार कमर्शियल जहाजों और टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद शिपिंग कंपनियों ने इस रूट से अपने जहाजों की आवाजाही या तो रोक दी है या फिर लंबे और महंगे रास्तों का विकल्प चुन रही हैं, जिससे तेल की ढुलाई लागत (Freight Cost) आसमान छू रही है।
हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के 90 डॉलर के करीब पहुंचने और स्थानीय स्तर पर नए नीतिगत बदलावों का असर अब आम जनता की जेब पर भी पड़ने लगा है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा ईंधन पर 'विधवा और अनाथ सेस' लागू किए जाने और वैश्विक स्तर पर महंगे हो रहे कच्चे तेल के दोहरे प्रभाव के कारण राज्य में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जानकारों का मानना है कि यदि मध्यपूर्व का यह संकट जल्द नहीं थमा,