EPS 2026: सरकार ने लागू की नई पेंशन योजना, जानिए EPFO की इस स्कीम में आपके लिए क्या बदला और क्या नहीं

EPS 2026: सरकार ने लागू की नई पेंशन योजना, जानिए EPFO की इस स्कीम में आपके लिए क्या बदला और क्या नहीं

देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने 29 जून को आधिकारिक तौर पर नई कर्मचारी पेंशन योजना 2026 (Employees' Pension Scheme, 2026) को मंजूरी देकर लागू कर दिया है। यह नई योजना पुरानी 'EPS 1995 (EPS-95)' और 'कर्मचारी फैमिली पेंशन योजना 1971' का स्थान लेगी। सरकार के इस कदम के बाद नौकरीपेशा लोगों के बीच यह उत्सुकता बढ़ गई है कि उनकी पेंशन पर इसका क्या असर पड़ेगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस अपग्रेड की गई योजना में क्या-क्या बदलाव हुए हैं और कौन से नियम पहले की तरह ही बरकरार हैं।

ये 6 बड़े बदलाव आपके लिए जानना है बेहद जरूरी

नई ईपीएस-2026 योजना के तहत नियमों को और अधिक पारदर्शी, डिजिटल और कर्मचारी-अनुकूल बनाने के लिए कुछ अहम अपग्रेड किए गए हैं:

  • क्लेम निपटारे की समय-सीमा तय: सरकार ने अब नियमों को सख्त करते हुए किसी भी पेंशन क्लेम का निपटारा अधिकतम 20 दिनों के भीतर करना अनिवार्य कर दिया है।

  • देरी होने पर मिलेगा 12% ब्याज: यदि ईपीएफओ (EPFO) तय समय-सीमा के भीतर पेंशन क्लेम प्रोसेस करने में देरी करता है, तो कर्मचारी को 12% सालाना की दर से ब्याज का भुगतान किया जाएगा।

  • हायर पेंशन नियमों को मिली औपचारिकता: लंबे समय से चर्चा में रहे 'हायर पेंशन' (Higher Pension) के नियमों को अब इस नई योजना के कानूनी ढांचे में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है।

  • सरकारी अंशदान पर न्यूनतम रिटर्न: सरकार द्वारा किए जाने वाले अंशदान पर अब कम से कम 8.5% रिटर्न दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।

  • डिजिटल कम्प्लायंस: नियोक्ताओं (Employers) के लिए कागजी कार्रवाई को कम करते हुए डिजिटल अनुपालन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया तेज हो सके।

  • नया नाम: इस योजना का आधिकारिक नाम अब बदलकर 'कर्मचारी पेंशन योजना 2026' हो गया है।

इन 9 महत्वपूर्ण नियमों में नहीं हुआ कोई बदलाव

भले ही सरकार ने क्लेम की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नए नियम बनाए हैं, लेकिन कोर फाइनेंशियल स्ट्रक्चर और पात्रता के बुनियादी नियमों को नहीं बदला गया है:

  • मौजूदा पेंशनर्स सुरक्षित: जो लोग पहले से ही पेंशन का लाभ उठा रहे हैं, उनकी पेंशन राशि और ट्रांसफर की सुविधा पर कोई असर नहीं पड़ेगा, वह जस की तस जारी रहेगी।

  • पेंशन फॉर्मूला पहले जैसा: पेंशन की कुल राशि निकालने का जो गणितीय फॉर्मूला पहले था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

  • पेंशन योग्य सैलरी की गणना: पेंशन योग्य वेतन (Pensionable Salary) तय करने का पुराना तरीका ही आगे लागू रहेगा।

  • कॉन्ट्रिब्यूशन के नियम: ईपीएफ (EPF) और ईपीएस (EPS) में नियोक्ता और कर्मचारी के योगदान (Contribution) के प्रतिशत में कोई फेरबदल नहीं हुआ है।

  • पात्रता की शर्तें: पेंशन पाने के लिए आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि और अन्य बुनियादी नियम पहले जैसे ही हैं।

  • अर्ली पेंशन का विकल्प: यदि कोई कर्मचारी 50 साल की उम्र के बाद समय से पहले पेंशन (Early Pension) लेना चाहता है, तो वह विकल्प पहले की तरह ही मिलता रहेगा।

  • 10 साल से पहले नौकरी छोड़ना: 10 साल की सेवा पूरी होने से पहले नौकरी छोड़ने पर फंड निकासी या स्कीम सर्टिफिकेट के नियम पुराने ही रहेंगे।

  • न्यूनतम पेंशन: कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बावजूद मिनिमम पेंशन (Minimum Pension) की राशि में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

  • फैमिली और दिव्यांग पेंशन: परिवार के सदस्यों को मिलने वाली फैमिली पेंशन और दिव्यांग पेंशन के नियमों को पहले की तरह ही रखा गया है।