Goldline Pharmaceutical IPO Listing: बाजार में कदम रखते ही इस छोटे शेयर ने दिया 39% का छप्परफाड़ रिटर्न, लेकिन फिर लग गया लोअर सर्किट
भारतीय शेयर बाजार में छोटे और मझोले (SME) सेगमेंट के आईपीओ इन दिनों निवेशकों पर पैसों की बारिश कर रहे हैं। इस लिस्ट में एक और नया नाम गोल्डलाइन फार्मास्युटिकल (Goldline Pharmaceutical) का जुड़ गया है। मंगलवार को बाजार में उतरते ही इस 'छोटकू' शेयर ने अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया। आईपीओ के तहत महज 43 रुपये की कीमत पर मिले इस शेयर की लिस्टिंग बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के SME प्लेटफॉर्म पर करीब 39 फीसदी के बंपर प्रीमियम के साथ 59.75 रुपये पर हुई। शुरुआत में तो शेयर की रफ्तार इतनी तेज थी कि यह देखते ही देखते 60 रुपये के स्तर तक जा पहुंचा। हालांकि, मुनाफावसूली के चलते बाद में इसमें थोड़ी गिरावट भी देखने को मिली।
बंपर शुरुआत के बाद 5 फीसदी लुढ़का शेयर, जानिए बंद भाव
शानदार और धमाकेदार लिस्टिंग से निवेशकों को खुश करने के बाद, ट्रेडिंग के आखिरी घंटों में गोल्डलाइन फार्मास्युटिकल के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। मुनाफावसूली के कारण कंपनी के शेयर अपने ऊपरी स्तरों से 5 पर्सेंट लुढ़ककर 56.77 रुपये पर बंद हुए। इस उतार-चढ़ाव के बावजूद मंगलवार को पहले ही दिन कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) 54 करोड़ रुपये के पार निकल गया है। आपको बता दें कि कंपनी का यह आईपीओ निवेश के लिए 12 मई से 14 मई तक खुला था, जिसके बाद 15 मई को शेयरों का अलॉटमेंट फाइनल हुआ था।
इस पब्लिक इश्यू का टोटल साइज 12 करोड़ रुपये का था। लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में भी बड़ा बदलाव आया है। गोल्डलाइन फार्मास्युटिकल के प्रमोटर अमोल लक्ष्मीकांत मजूमदार और स्वप्न प्रेमप्रकाश खंडेलवाल हैं। आईपीओ के आने से पहले कंपनी में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी 79.70 पर्सेंट थी, जो कि अब घटकर 57.29 पर्सेंट पर आ गई है।
निवेशकों ने लगाया था अंधाधुंध पैसा, 840 गुना से ज्यादा हुआ था सब्सक्राइब
गोल्डलाइन फार्मास्युटिकल के आईपीओ को लेकर निवेशकों में इस कदर दीवानगी थी कि इस पर कुल 840.74 गुना ज्यादा बोलियां प्राप्त हुई थीं। रिटेल यानी आम निवेशकों के कोटे की बात करें, तो इसमें 881.15 गुना सब्सक्रिप्शन देखने को मिला था। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की कैटेगरी में तो रिकॉर्डतोड़ 1662.04 गुना दांव लगाया गया था। इसके अलावा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का कोटा भी 180.22 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
नियमों के मुताबिक, इस आईपीओ में आम निवेशकों को न्यूनतम 2 लॉट के लिए दांव लगाना जरूरी था। इन 2 लॉट के तहत कुल 6000 शेयर शामिल थे। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि इस आईपीओ में एक रिटेल निवेशक को कम से कम 2.58 लाख रुपये का भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट करना पड़ा था, जिसे आज लिस्टिंग पर बेहतरीन रिवॉर्ड मिला।
खुद दवाएं नहीं बनाती यह कंपनी, जानिए क्या है बिजनेस मॉडल
आखिर यह कंपनी करती क्या है और इसका बिजनेस मॉडल क्या है, इसे समझना भी जरूरी है। गोल्डलाइन फार्मास्युटिकल लिमिटेड मुख्य रूप से फार्मास्युटिकल्स प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग के बिजनेस से जुड़ी हुई है। कंपनी बाजार में 'गोल्डलाइन' ब्रांड नेम के तहत अपनी दवाएं और प्रोडक्ट्स बेचती है। इसकी पूरी प्रोडक्ट रेंज को मुख्य रूप से 5 बड़ी कैटेगरीज में विभाजित किया गया है, जिनमें गोल्डलाइन फार्मा, गोल्डलाइन कार्डिनल, गोल्डलाइन आयुष्मान, गोल्डलाइन इनलाइफ और गोल्डलाइन वेलनेस शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह है कि गोल्डलाइन फार्मास्युटिकल अपने प्रोडक्ट्स का निर्माण खुद की फैक्ट्रियों में नहीं करती है। यह कंपनी पूरी तरह से थर्ड-पार्टी मैन्युफैक्चरर्स (आउटसोर्सिंग) के साथ मिलकर काम करती है। कंपनी अपनी खुद की मार्केट रिसर्च और प्रोडक्ट स्पेसिफिकेशन्स के आधार पर पार्टनर कंपनियों से दवाएं तैयार करवाती है। वर्तमान में गोल्डलाइन फार्मास्युटिकल का नेटवर्क काफी मजबूत है और यह देश के 15 प्रमुख मैन्युफैक्चरर्स और 7 बड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ मिलकर अपने बिजनेस को आगे बढ़ा रही है।