गिरते बाजार के बीच मल्टी कैप फंड्स का जलवा

गिरते बाजार के बीच मल्टी कैप फंड्स का जलवा

भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में पिछले कुछ महीनों से लगातार उठा-पटक और गिरावट का दौर देखने को मिल रहा है। वैश्विक अनिश्चितताओं, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और घरेलू कारणों के चलते जब ब्लूचिप से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर तक दबाव में नजर आ रहे हैं, तब निवेशकों के मन में एक ही सवाल है कि अपने निवेश को सुरक्षित कैसे रखा जाए और कहां बेहतर रिटर्न मिल सकता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण और सुस्त बाजार के माहौल में म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) श्रेणी का एक खास सेगमेंट लगातार निवेशकों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस सेगमेंट का नाम 'मल्टी कैप फंड्स' (Multi Cap Funds) है, जिसने मंदी और गिरावट के इस दौर में भी अपनी शानदार रणनीति के दम पर निवेशकों को मालामाल कर दिया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि विविधता (Diversification) के अपने अनूठे मॉडल के कारण मल्टी कैप फंड्स ने इस बार भी यह साबित कर दिया है कि वे कठिन समय में भी मजबूत रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।

क्या होते हैं मल्टी कैप फंड्स और क्यों मंदी के बाजार में साबित होते हैं असरदार?

मल्टी कैप फंड्स, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की एक ऐसी कैटेगरी हैं जिन्हें सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार अपने कुल पोर्टफोलियो का कम से कम 75% हिस्सा अनिवार्य रूप से शेयरों में निवेश करना होता है। इसमें भी खास नियम यह है कि फंड मैनेजर को न्यूनतम 25% निवेश लार्ज कैप (Large Cap) कंपनियों में, न्यूनतम 25% मिडकैप (Mid Cap) कंपनियों में और न्यूनतम 25% स्मॉलकैप (Small Cap) कंपनियों में करना ही होता है। बाकी बचा हुआ 25% हिस्सा फंड मैनेजर बाजार की स्थिति और संभावनाओं के आधार पर किसी भी कैटेगरी में निवेश कर सकता है। जब बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आती है, तो अकेले लार्ज कैप या स्मॉलकैप फंड्स को नुकसान उठाना पड़ सकता है, लेकिन मल्टी कैप फंड्स का यह मिक्स्ड और बैलेंस स्ट्रक्चर जोखिम को बहुत हद तक कम कर देता है। जब स्मॉल या मिडकैप गिरते हैं, तो लार्ज कैप सहारा देते हैं और जब बाजार सुधरता है, तो छोटे और मंझोले शेयरों की तेजी से पोर्टफोलियो का मुनाफा तेजी से बढ़ जाता है।

पिछले 3 साल का प्रदर्शन: निवेशकों को मिला उम्मीद से कहीं ज्यादा बंपर रिटर्न

यदि पिछले तीन वर्षों (3-Year Period) के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डाली जाए, तो अधिकांश प्रमुख मल्टी कैप फंड्स ने सावधि जमा (FD) और कई अन्य पारंपरिक निवेश विकल्पों को पीछे छोड़ते हुए निवेशकों को शानदार सालाना रिटर्न (CAGR) दिया है। बाजार के तमाम जोखिमों और उतार-चढ़ाव के बावजूद कई टॉप रेटेड मल्टी कैप फंड्स ने पिछले 3 सालों में औसतन 18% से लेकर 24% तक का मजबूत सीएजीआर रिटर्न डिलीवर किया है। इसका मतलब यह हुआ कि जिन निवेशकों ने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) या एकमुश्त (Lumpsum) निवेश के जरिए इन फंड्स में अपनी पूंजी लगाई थी, उनका पैसा इस अवधि में उल्लेखनीय रूप से बढ़ चुका है। वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि यह लंबी अवधि की वेल्थ क्रिएशन (Wealth Creation) प्रक्रिया का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां धैर्य रखने वाले निवेशकों को बाजार की मंदी का कोई खास नकारात्मक असर नहीं झेलना पड़ा।

डायवर्सिफिकेशन की ताकत: जोखिम और मुनाफे का सही संतुलन

मल्टी कैप फंड्स की सबसे बड़ी खूबी उनका डायवर्सिफिकेशन मॉडल है। सामान्य निवेशकों के लिए यह तय करना बेहद कठिन होता है कि वे अपना पैसा किस साइज की कंपनी में लगाएं— बड़ी, मध्यम या छोटी? लेकिन मल्टी कैप फंड्स में निवेश करने से यह चिंता अपने आप खत्म हो जाती है, क्योंकि फंड मैनेजर खुद ही तीनों सेगमेंट में समझदारी से पूंजी का आवंटन करते हैं। जब बाजार में मंदी होती है, तो फंड मैनेजर पोर्टफोलियो में सुरक्षित माने जाने वाले लार्ज कैप शेयरों का वजन थोड़ा बढ़ा देते हैं ताकि स्थिरता बनी रहे। वहीं, जब बाजार में रिकवरी के संकेत मिलते हैं, तो वे तेजी से बढ़ने वाले स्मॉल और मिडकैप शेयरों के जरिए शानदार मुनाफा बटोर लेते हैं। यही कारण है कि यह रणनीति हर प्रकार के मौसम (बाजार के उतार-चढ़ाव) में निवेशकों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है।

नए और समझदार निवेशकों के लिए क्या है सही निवेश रणनीति?

वित्तीय योजनाकारों और म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट्स की सलाह है कि जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में बहुत ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते, लेकिन साथ ही फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद रखते हैं, उनके लिए मल्टी कैप फंड्स एक आदर्श विकल्प साबित हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय कम से कम 5 से 7 साल का लंबा नजरिया रखना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि शेयर बाजार अल्पावधि में वोलेटाइल (अस्थिर) हो सकता है। एकमुश्त निवेश के बजाय एसआईपी (SIP) के जरिए अनुशासित तरीके से हर महीने निवेश करना जोखिम को और अधिक कम कर देता है। किसी भी फंड का चुनाव करने से पहले उसकी पिछले कुछ वर्षों की परफॉरमेंस, फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड और एक्सपेंस रेशियो की जांच जरूर कर लें, ताकि आपके वित्तीय लक्ष्य सुरक्षित और सुनियोजित तरीके से पूरे हो सकें।