नवरात्रि और दशहरे ने कराई कंपनियों की बंपर मौज

नवरात्रि और दशहरे ने कराई कंपनियों की बंपर मौज

भारतीय अर्थव्यवस्था और खुदरा बाजार के लिए साल का यह त्योहारी सीजन एक ऐसी बहार लेकर आया है जिसने पिछले कई महीनों से सुस्ती के दौर से गुजर रहे कारोबारियों और कंपनियों के चेहरों पर बड़ी मुस्कान बिखेर दी है। चैत्र या शारदीय नवरात्रि से लेकर विजया दशमी (दशहरा) तक के इस पावन और मांगलिक पखवाड़े में देश के कोने-कोने से जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे यह साबित करने के लिए काफी हैं कि भारतीय उपभोक्ताओं का उत्साह महंगाई के हल्के दबाव के बावजूद बिल्कुल भी कम नहीं हुआ है। ऑटोमोबाइल सेक्टर से लेकर फैशन, परिधान (Apparels), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (घरेलू उपकरण) और एफएमसीजी सेक्टर तक, हर जगह बिक्री के नए रिकॉर्ड टूटते हुए नजर आ रहे हैं। तमाम रेटिंग एजेंसियों और विश्लेषकों द्वारा बढ़ती महंगाई और जीवनयापन के ऊंचे खर्चों को लेकर भले ही चिंताएं जताई जा रही हों, लेकिन त्योहारी उमंग और मां दुर्गा के आशीर्वाद के साथ बाजारों में उमड़ी भारी भीड़ ने इन सभी आशंकाओं को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है। महानगरों से लेकर छोटे कस्बों और ग्रामीण अंचलों तक के बाजारों में ग्राहकों की जबरदस्त रौनक देखने को मिली है, जिससे कंपनियों के वेयरहाउस खाली होने लगे हैं और उत्पादन इकाइयों में भी तेजी आ गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बार के नवरात्रि और दशहरे के सीजन में किन-किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा उछाल आया है और इसके पीछे के मुख्य आर्थिक कारण क्या हैं।

ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में उमड़ी जबरदस्त भीड़, कार से लेकर फ्रिज-टीवी तक की बंपर बुकिंग

त्योहारी सीजन में सबसे बड़ा और धमाकेदार उछाल अगर किसी क्षेत्र में देखने को मिला है, तो वह ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर है। नवरात्रि के पहले दिन से लेकर दशहरे के पावन पर्व तक देश भर के कार शोरूमों, टू-व्हीलर एजेंसियों और इलेक्ट्रॉनिक स्टोरों पर ग्राहकों का तांता लगा रहा। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, हुंडई और महिंद्रा जैसी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि इस बार डिलीवरी लेने के लिए लोगों ने महीनों पहले से बुकिंग करा रखी थी, और दशहरे के दिन अकेले लाखों वाहनों की डिलीवरी ग्राहकों को दी गई है। इसके अलावा, घरों की साज-सज्जा और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े सामान जैसे कि स्मार्ट एलईडी टीवी, डबल डोर रेफ्रिजरेटर, फुली ऑटोमैटिक वाशिंग मशीन, माइक्रोवेव ओवन और एयर कंडीशनर की मांग में पिछले साल की तुलना में 25 से 30 प्रतिशत तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है। मध्यम वर्गीय परिवारों द्वारा अपनी बचत और आसान फाइनेंस स्कीमों (EMI विकल्पों) के जरिए इन उपकरणों की जमकर खरीदारी की गई है, जिससे होम अप्लायंसेज बनाने वाली कंपनियों की तिजोरियां भर गई हैं।

परिधान और फैशन इंडस्ट्री में भी छाई रौनक, पारंपरिक कपड़ों और ब्रांडेड गारमेंट्स की भारी मांग

त्योहारों के इस उल्लासपूर्ण माहौल में फैशन और कपड़ा बाजार (Apparel Industry) पीछे कैसे रह सकता था। देश के प्रमुख रिटेल मार्केट्स, मॉल और ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेडिशनल वियर, एथनिक कपड़ों, डिजाइनर साड़ियों और फेस्टिव कलेक्शन की बंपर बिक्री हुई है। चाहे वह दिल्ली का चांदनी चौक हो, लखनऊ का हजरतगंज, जयपुर का जौहरी बाजार या मुंबई का लिंक रोड—हर जगह खरीदारों की भीड़ ने दुकानदारों को व्यस्त रखा। कपड़े के व्यापारियों का कहना है कि इस बार ग्राहकों ने केवल किफायती सामान खरीदने के बजाय प्रीमियम और ब्रांडेड कपड़ों को प्राथमिकता दी है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि त्योहारी उत्साह के आगे महंगाई का असर फीका पड़ गया है। ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल्स जैसे कि अमेज़न और फ्लिपकार्ट की फेस्टिव सेल में भी फैशन और अपैरल कैटेगरी सबसे ज्यादा बिकने वाले सेगमेंट में शामिल रही, जहां टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं ने दिल खोलकर खरीदारी की।

महंगाई के झटकों के बीच त्योहारी खरीदारी का यह ट्रेंड अर्थव्यवस्था के लिए है एक बड़ा शुभ संकेत

वित्तीय विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई और जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं का यह खर्च करने का रवैया देश की व्यापक आर्थिक स्थिति (Macroeconomic Fundamentals) के मजबूत होने का प्रमाण है। लोगों के हाथ में रोजगार के नए साधन, फेस्टिव बोनस और वेतन वृद्धि जैसी वजहों ने उपभोक्ता विश्वास (Consumer Confidence) को और अधिक बढ़ाया है। जब इस तरह का बड़ा त्योहारी सीजन कंपनियों को भारी मुनाफा और राजस्व देता है, तो इससे न केवल कॉरपोरेट सेक्टर की बैलेंस शीट मजबूत होती है, बल्कि देश में नए रोजगार के अवसर भी तेजी से पैदा होते हैं। नवरात्रि और दशहरे से शुरू हुआ यह खरीदारी का सिलसिला अभी दीपावली और धनतेरस तक पूरी रफ्तार से जारी रहने की पूरी उम्मीद है, जिससे भारतीय खुदरा बाजार आने वाले हफ्तों में एक नए और ऐतिहासिक आर्थिक मील के पत्थर को छूने के लिए पूरी तरह तैयार बैठा है।