RBI Dividend To Government: ग्लोबल टेंशन के बीच सरकार के लिए संकटमोचक बनेगा RBI, इस हफ्ते मिल सकता है अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड डिविडेंड

RBI Dividend To Government: ग्लोबल टेंशन के बीच सरकार के लिए संकटमोचक बनेगा RBI, इस हफ्ते मिल सकता है अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड डिविडेंड

रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव (Global Tension) के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और केंद्र सरकार के लिए राहत की एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सरकार के लिए बड़ा संकटमोचक बनने की तैयारी में है। ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रिजर्व बैंक इस हफ्ते केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा और रिकॉर्डतोड़ सरप्लस ट्रांसफर (लाभांश या डिविडेंड) सौंप सकता है। अनुमान है कि यह रकम करीब 3 लाख करोड़ रुपये (3 ट्रिलियन रुपये) के आसपास हो सकती है। आरबीआई का केंद्रीय बोर्ड आगामी शुक्रवार को होने वाली अपनी अहम बैठक में इस रिकॉर्ड लाभांश को हरी झंडी दे सकता है।

पिछले साल का भी टूटेगा रिकॉर्ड, जानिए पिछले वर्षों के आंकड़े

अगर इस हफ्ते 3 लाख करोड़ रुपये के इस सरप्लस ट्रांसफर को मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारतीय वित्तीय इतिहास में केंद्रीय बैंक द्वारा सरकार को दिया गया अब तक का सबसे बड़ा भुगतान होगा। आपको बता दें कि इससे पहले पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी आरबीआई ने केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का बंपर और रिकॉर्डतोड़ डिविडेंड दिया था। वह भुगतान भी उससे पिछले वर्ष यानी 2023-24 के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में करीब 27 प्रतिशत ज्यादा था। इस बार लगातार दूसरे साल केंद्रीय बैंक अपने ही पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त करने की राह पर है, जो देश के खजाने के लिए बूस्टर डोज साबित होगा।

आखिर कैसे होती है केंद्रीय बैंक की यह छप्परफाड़ कमाई?

आम जनता के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर रिजर्व बैंक इतनी बड़ी रकम कमाता कैसे है? दरअसल, आरबीआई के पास कमाई के कई मजबूत जरिए होते हैं। केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों (Foreign Currency Assets), घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकारी बॉन्डों में किए गए निवेश और करेंसी नोटों की छपाई से होने वाली आय (Seigniorage) के जरिए यह भारी-भरकम सरप्लस फंड इकट्ठा करता है।

इसके अलावा, इंडसइंड बैंक लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री गौरव कपूर का कहना है कि पिछले कुछ सालों में आरबीआई की अपनी एसेट्स पर ज्यादा रिटर्न कमाने की क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की गई वृद्धि से आरबीआई की विदेशी निवेश पर कमाई काफी बढ़ी है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने (Gold) की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी से आरबीआई के पास मौजूद स्वर्ण भंडार के रिवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) का फायदा मिला है, जिससे उसकी कुल पूंजी और कमाई में भारी इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि हालिया वर्षों में भारतीय रिजर्व बैंक दुनिया भर में सोने के सबसे बड़े खरीदारों में से एक रहा है।

कच्चे तेल के झटके और राजकोषीय घाटे से बचाएगा यह 'सुरक्षा कवच'

आरबीआई की तरफ से मिलने वाला यह संभावित ऐतिहासिक फंड ऐसे नाजुक समय में आ रहा है जब भारत को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार दबाव बना रही हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) और देश की मुद्रा पर दबाव आने की पूरी आशंका है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली से भी बाजार पर दबाव है।

इस गंभीर स्थिति के बीच आरबीआई से मिलने वाली यह मोटी रकम सरकार के लिए एक बड़े वित्तीय सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी। हालांकि, पीजीआईएम इंडिया एसेट मैनेजमेंट के फिक्स्ड इनकम हेड पुनीत पाल के मुताबिक, बॉन्ड मार्केट पहले से ही आरबीआई से मिलने वाले इस संभावित 3 ट्रिलियन रुपये के भुगतान की उम्मीद को अपनी कीमतों में शामिल (Factor-in) कर चुका है।

भारत सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के बजट में आरबीआई, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से कुल 3.2 ट्रिलियन (3.2 लाख करोड़) रुपये के लाभांश का लक्ष्य रखा है। चूंकि इस टारगेट का एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले केंद्रीय बैंक से ही आ रहा है, इसलिए सरकार को अपने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को काबू में रखने में बहुत मदद मिलेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और फर्टिलाइजर (उर्वरक) की बढ़ती सब्सिडी के खर्च के कारण घाटे के आंकड़ों पर थोड़ा दबाव फिर भी देखा जा सकता है।

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