तंगहाली से जूझ रहे पाकिस्तान पर मेहरबान हुआ सऊदी अरब! 250 अरब का कर्ज चुकाने की बढ़ाई समय सीमा, आर्थिक तबाही से बचा देश
गंभीर आर्थिक संकट, आसमान छूती महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार की भारी किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान को बचाने के लिए उसके सबसे भरोसेमंद साथी सऊदी अरब ने चुपचाप एक बड़ा वित्तीय सहारा दिया है। सऊदी सरकार ने पाकिस्तान को दिए गए 3 अरब डॉलर (भारतीय करंसी के हिसाब से लगभग 250 अरब रुपये) के कर्ज को चुकाने की डेडलाइन (Time Limit) को आगे बढ़ा दिया है।
आइए जानते हैं कि इस राहत से पाकिस्तान को कितना फायदा मिला है और वहां के मौजूदा आर्थिक हालात क्या हैं।
क्या है पूरा मामला और सऊदी का यह सपोर्ट?
पाकिस्तानी मीडिया और वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब ने पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (State Bank of Pakistan) में रखे गए 3 अरब डॉलर के डिपॉजिट की मियाद को बढ़ाने पर सहमति जता दी है। यह डिपॉजिट पहले ही परिपक्व (Maturity) होने वाला था, जिससे पाकिस्तान पर भारी आर्थिक दबाव आ जाता। यदि समय पर यह पैसा वापस चुकाना पड़ता, तो पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग शून्य पर पहुंच जाता और देश पूरी तरह डिफॉल्ट (Default) हो जाता। लेकिन सऊदी अरब के इस कदम से शाहबाज शरीफ सरकार को एक बड़ी संजीवनी मिल गई है।
क्यों पाकिस्तान के लिए जीवनदान है यह फैसला?
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आईएमएफ (IMF) के लोन की शर्त: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बेलआउट पैकेज पाने के लिए पाकिस्तान को अक्सर अपने विदेशी साझीदारों से यह गारंटी दिखानी पड़ती है कि उसके पास बाहरी कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त बफर मौजूद है। सऊदी अरब द्वारा लोन की अवधि बढ़ाए जाने से आईएमएफ के साथ चल रही बातचीत भी आसान हो जाती है।
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विदेशी मुद्रा भंडार को संबल: पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार इस समय बेहद नाजुक स्थिति में है। अगर सऊदी अरब तुरंत पैसे मांग लेता, तो देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती।
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स्थानीय मुद्रा और बाजार को राहत: इस समझौते से निवेशकों के बीच यह संदेश गया है कि पाकिस्तान को तत्काल भुगतान संतुलन (Balance of Payments) के संकट से बचा लिया गया है, जिससे पाकिस्तानी रुपये को कुछ हद तक स्थिरता मिली है।
पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा है पाकिस्तान
भले ही सऊदी अरब की इस मेहरबानी से पाकिस्तान को फिलहाल के लिए सांस लेने की मोहलत मिल गई हो, लेकिन सच यह है कि देश की आर्थिक सेहत अभी भी बेहद खस्ताहाल है। पाकिस्तान अपने बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने में खर्च कर रहा है। सऊदी अरब, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे मित्र देशों के बेलआउट और रोलओवर (Roll-over) के सहारे ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था किसी तरह वेंटिलेटर पर चल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपने देश में संरचनात्मक सुधार (Structural Reforms), कर दायरा बढ़ाने और निर्यात को बढ़ावा देने जैसे कड़े कदम नहीं उठाता, तब तक इस तरह के शॉर्ट-कलम लोन और एक्सटेंशन से देश को लंबे समय तक नहीं बचाया जा सकता।