सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! शुभेंदु कैबिनेट ने दी 7वें वेतन आयोग को हरी झंडी, हर महीने इतनी बढ़कर आएगी सैलरी

सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! शुभेंदु कैबिनेट ने दी 7वें वेतन आयोग को हरी झंडी, हर महीने इतनी बढ़कर आएगी सैलरी

पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित सरकार ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आज एक ऐतिहासिक और बेहद शानदार तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में आयोजित हुई नई सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक में एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए आखिरकार राज्य में 7वें वित्त आयोग (7th Pay Commission) के गठन को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के लागू होने के बाद अब आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल के राज्य कर्मचारियों की सैलरी में भारी उछाल देखने को मिलेगा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कर्मचारियों से यह वादा किया था कि सत्ता में आते ही नया पे कमीशन लागू किया जाएगा, जिसे सरकार ने अपनी दूसरी बैठक में ही पूरा कर दिया है।

जानिए कितनी बढ़ेगी सैलरी और एचआरए पर क्या होगा असर

विभिन्न आर्थिक और विभागीय रिपोर्ट्स की मानें तो पश्चिम बंगाल में 7वां वेतन आयोग पूरी तरह लागू होने के बाद कर्मचारियों की बेसिक और इन-हैंड सैलरी में प्रति माह कम से कम 10,000 रुपये से लेकर 12,000 रुपये तक की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। हालांकि, कर्मचारियों की कुल सैलरी में होने वाला यह इजाफा काफी हद तक फिटमेंट फैक्टर्स (Fitment Factors) के अंतिम निर्धारण पर निर्भर करेगा। 7वें वित्त आयोग की सिफारिशें जमीन पर उतरने के बाद कर्मचारियों को न सिर्फ बढ़ा हुआ मूल वेतन मिलेगा, बल्कि उन्हें अधिक हाउस रेंट अलाउंस (HRA) समेत कई अन्य महत्वपूर्ण भत्तों और वित्तीय लाभों का फायदा भी मिलेगा।

चुनावी वादे पर लगी मुहर, डीए बढ़ोतरी पर फिलहाल सस्पेंस

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कैबिनेट की बैठक से पहले ही यह साफ कर दिया था कि आज के एजेंडे में 7वें वित्त आयोग का मुद्दा सबसे ऊपर है, जिस पर कैबिनेट ने बिना किसी रुकावट के अपनी मुहर लगा दी। वहीं दूसरी ओर, महंगाई भत्ते (DA) को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि आज की बैठक में राज्य सरकार डीए में बढ़ोतरी का भी बड़ा एलान कर सकती है, लेकिन आज इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही डीए में बढ़ोतरी का फैसला भी लेगी। गौरतलब है कि बंगाल चुनावों के दौरान भाजपा ने कर्मचारियों और पेंशनर्स से वादा किया था कि राज्य में छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर कर केंद्र की तर्ज पर नया वेतनमान दिया जाएगा।

यूपी समेत अन्य राज्यों से काफी पीछे चल रहा था बंगाल का वेतनमान

अब तक की स्थिति की बात करें तो पश्चिम बंगाल में राज्य कर्मचारियों को बहुत ही पुराने यानी 6वें वित्त आयोग के आधार पर सैलरी का भुगतान किया जा रहा था, जिसके चलते यहां के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों या अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम वेतन मिल रहा था। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे कई राज्यों में 7वां वित्त आयोग बहुत पहले से ही लागू है, जिसकी वजह से वहां के कर्मचारियों को अधिक सैलरी, बेहतर एचआरए और समय पर अन्य भत्ते मिलते हैं। अब शुभेंदु सरकार के इस कदम से बंगाल के कर्मचारियों का यह लंबा इंतजार और आर्थिक असमानता खत्म होने जा रही है।

एक तरफ बंगाल में 7वां पे कमीशन, तो केंद्र में 8वें वेतन आयोग की तैयारी तेज

जहां पश्चिम बंगाल की सरकार अपने कर्मचारियों को अब जाकर छठे वेतन आयोग के दायरे से बाहर निकालकर 7वें पे कमीशन का लाभ देने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के लिए 8वें वित्त आयोग (8th Pay Commission) के गठन की प्रक्रिया को काफी आगे बढ़ा चुकी है। केंद्र सरकार ने पिछले साल नवंबर महीने में ही 8वें पे कमीशन का गठन कर दिया था, जिसे अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस समय केंद्रीय वेतन आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों और समूहों से लगातार बैठकें कर राय-मशविरा कर रहा है, जिसकी सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में आने वाले समय में दोबारा बड़ी वृद्धि होगी।

 

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