टाटा ग्रुप का यह दिग्गज शेयर निवेशकों को दे चुका है 1.80 लाख करोड़ का भारी घाटा

टाटा ग्रुप का यह दिग्गज शेयर निवेशकों को दे चुका है 1.80 लाख करोड़ का भारी घाटा

भारतीय शेयर बाजार में टाटा समूह (Tata Group) की कंपनियों को हमेशा से उनकी भरोसेमंद साख, मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस और लंबी अवधि में निवेशकों को मालामाल करने वाले शेयरों के रूप में जाना जाता है। देश के करोड़ों खुदरा निवेशक और बड़े संस्थान टाटा के नाम पर आंख मूंदकर निवेश करते हैं, क्योंकि यह माना जाता है कि टाटा के शेयर सुरक्षित होने के साथ-साथ शानदार रिटर्न भी देते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से टाटा समूह की एक ऐसी दिग्गज कंपनी के शेयर में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है जिसने निवेशकों के सारे सपनों पर पानी फेर दिया है। इस शेयर के भाव में आई भारी कमजोरी के कारण निवेशकों की कुल संपत्ति से लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रकम साफ हो चुकी है, जिससे बाजार में निवेशकों के बीच गहरी निराशा का माहौल पैदा हो गया है। कभी शेयर बाजार की धड़कन बनने वाला और हर पोर्टफोलियो की शान रहने वाला यह शेयर आज बिकवाली के भारी दबाव के चलते अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से आधे से भी कम कीमत पर ट्रेड करने को मजबूर हो चुका है।

अपने ऑल-टाइम हाई से 50% से ज्यादा फिसल चुकी है इस टाटा स्टॉक की कीमत

आंकड़ों के मुताबिक, यह लोकप्रिय टाटा स्टॉक अपने पिछले ऑल-टाइम हाई (All-Time High) यानी उच्चतम स्तर से अब तक 50 प्रतिशत से भी अधिक नीचे लुढ़क चुका है, जिससे निवेशकों को अपनी मूल पूंजी बचाने के लाले पड़ गए हैं। जब किसी कंपनी का शेयर अपने शिखर से आधा हो जाता है, तो उसमें निवेश करने वाले निवेशकों का मनोबल टूटना लाजिमी है, खासकर तब जब वह कंपनी किसी मजबूत ग्रुप से ताल्लुक रखती हो। इस भारी-भरकम गिरावट के चलते कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) यानी बाजार पूंजीकरण बुरी तरह से सिकुड़ गया है, जिसके कारण देश के सबसे बड़े वेल्थ क्रिएटर्स में गिने जाने वाले इस स्टॉक से निवेशकों का भरोसा तेजी से डगमगा रहा है। विश्लेषकों का यह कहना है कि पिछले कुछ तिमाहियों से कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, मार्जिन में आई कमजोरी और वैश्विक स्तर पर मांग घटने जैसे कारणों ने इस शेयर के पैरों के नीचे से जमीन खिसकाने का काम किया है।

निवेशकों को उठाना पड़ा 1.80 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम घाटा

शेयर बाजार के जानकारों और वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि इस एक ही शेयर में आई ऐतिहासिक गिरावट के कारण कुल मिलाकर निवेशकों को लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इतनी बड़ी रकम का डूब जाना न केवल व्यक्तिगत निवेशकों के लिए बल्कि कई बड़े म्यूचुअल फंड्स और संस्थागत निवेशकों के लिए भी एक बहुत बड़ा झटका है। जब यह शेयर अपने शानदार दौर में था, तब इसने निवेशकों को अल्पावधि में ही बंपर मुनाफा कराया था, जिसके लालच में आकर छोटे निवेशकों ने ऊंचे दामों पर इसमें भारी निवेश कर दिया था। लेकिन जैसे-जैसे बाजार की हवा बदली और कंपनी के तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए, वैसे-वैसे बिकवाली का ऐसा दौर शुरू हुआ जो थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। जानकारों का कहना है कि जिन निवेशकों ने इस शेयर को इसके उच्च स्तर पर खरीदा था, वे अब भारी नुकसान के साथ फंसे हुए हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे इस स्थिति में अपने पोर्टफोलियो को कैसे संभालें।

अब आगे क्या करें निवेशक? क्या इस टाटा शेयर में है रिकवरी की कोई उम्मीद?

इस भयंकर गिरावट के बाद से ही बाजार में यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या इस टाटा के शेयर में आने वाले समय में कोई सुधार या वापसी की उम्मीद है या निवेशकों को अपने शेयर बेचकर बाहर हो जाना चाहिए। वित्तीय विशेषज्ञों का यह सुझाव है कि किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले उसके फंडामेंटल, कंपनी के भविष्य के बिजनेस प्लान और वैल्युएशन की पूरी जांच-परख कर लेनी चाहिए। हालांकि टाटा समूह की प्रतिष्ठा और उसकी दीर्घकालिक व्यापारिक क्षमता को देखते हुए कुछ विश्लेषक यह उम्मीद जता रहे हैं कि लंबी अवधि में यह कंपनी अपनी खोई हुई साख को वापस पा सकती है, लेकिन इसके लिए धैर्य रखना बहुत जरूरी होगा। जो निवेशक पहले से इस शेयर में फंसे हुए हैं, उन्हें अपनी जोखिम उठाने की क्षमता (Risk Appetite) का आकलन करके ही वित्तीय सलाहकार की सलाह से कोई भी कड़ा कदम उठाना चाहिए, ताकि वे बाजार के इस उतार-चढ़ाव भरे दौर में अपने पूंजी को सुरक्षित रख सकें।