पूर्व मुख्यमंत्री को सुरक्षा नहीं, विधायक को वीआईपी ट्रीटमेंट! हरीश रावत ने खोले सरकार के ऐसे राज, मच गया हड़कंप!
उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों जबर्दस्त हलचल मची हुई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एक तरफ पार्टी आलाकमान की बंदिशों को दरकिनार कर निकाले गए अपने रोड शो को लेकर चर्चा में हैं, तो दूसरी तरफ सूबे की भाजपा सरकार पर उनके तीखे बयानों ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। जसपुर, काशीपुर और रामनगर से गुजरी अपनी ‘धन्यवाद यात्रा’ को बीच में थामकर रावत अब सीधे दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय अपना पक्ष रखने पहुंचे हैं। मगर दिल्ली रवानगी से ऐन पहले उन्होंने राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा और एस्कॉर्ट न दिए जाने पर ऐसा बयान दिया, जिससे सियासी गलियारों में सनसनी फैल गई है।
हरीश रावत ने इंटरनेट मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि राज्य में पूर्व मुख्यमंत्रियों, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सांसदों तक को पुलिस सुरक्षा और एस्कॉर्ट मुहैया कराई जा रही है, लेकिन विपक्ष का एकमात्र पूर्व मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें इस सुविधा से वंचित रखा गया। रावत ने आरोप लगाया कि जहां विपक्ष के नेताओं की अनदेखी हो रही है, वहीं सत्ता पक्ष के एक खास चहेते विधायक पर सरकार पूरी तरह मेहरबान है, जिसमें भाजपा को 'भविष्य का सुपारी किलर' नजर आता है। उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद केवल वीआईपी प्रोटोकॉल लेना नहीं था, बल्कि काफिले में शामिल सैकड़ों गाड़ियों के कारण आम जनता को ट्रैफिक जाम से बचाना था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दौरान उत्तराखंड पुलिस की कार्यशैली की तुलना पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की पुलिस से कर दी। उन्होंने कहा कि यूपी के अफजलगढ़ जैसे बेहद संकरे और भीड़भाड़ वाले इलाके में भी स्थानीय पुलिस ने सूझबूझ से पूरे काफिले को बिना किसी जाम के पार करा दिया। इसके उलट उत्तराखंड की सीमा में घुसते ही जसपुर में ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई और काशीपुर पहुंचते-पहुंचते पुलिस प्रबंधन पूरी तरह पटरी से उतर गया। रावत के मुताबिक, काशीपुर में मदद के बजाय पुलिस ने गाड़ियों को अलग-अलग रास्तों पर मोड़ दिया, जिससे काफिले को दोबारा समेटने में ही एक घंटे से ज्यादा का वक्त बर्बाद हुआ और रामनगर से हल्द्वानी तक सफर कड़वे अनुभवों से भरा रहा। हालांकि उन्होंने यह भी याद दिलाया कि नारसन से घर लौटते समय पुलिस ने पूरा सहयोग दिया था, लेकिन इस यात्रा में रवैया बिल्कुल उलट दिखा।
इधर उत्तराखंड सरकार पर निशाना साधने के साथ ही हरीश रावत ने कांग्रेस हाईकमान से चल रही तनातनी पर भी खुलकर बात रखी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक हाईकमान ने उनके इस शक्ति प्रदर्शन पर नाराजगी जताई थी और उनसे जवाब-तलब की तैयारी है। इस पर रावत ने भावुक और बेबाक अंदाज में कहा कि इस 14 अक्टूबर को कांग्रेस से जुड़े उनके 58 साल पूरे हो जाएंगे और युवा कांग्रेस के दौर को जोड़ लें तो यह सफर 60 साल का बैठता है। उन्होंने कहा कि इन छह दशकों में पार्टी ने उनसे कभी औपचारिक सफाई नहीं मांगी; गलतियों पर भी हमेशा एक समर्पित सिपाही की तरह उनकी बात को स्वीकारा गया। आज जब उन्हें पता चला कि पार्टी उनसे स्पष्टीकरण मांग सकती है, तो वे बिना किसी झिझक के खुद समय लेकर शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने दिल्ली पहुंचे हैं।