राज्यसभा लिस्ट आते ही पूर्व BJP सांसद धर्मेंद्र कश्यप का 'टाटा बाय-बाय', बगावत की अटकलों के बीच बुलाई आपात बैठक

राज्यसभा लिस्ट आते ही पूर्व BJP सांसद धर्मेंद्र कश्यप का 'टाटा बाय-बाय', बगावत की अटकलों के बीच बुलाई आपात बैठक

बीजेपी द्वारा राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी करते ही उत्तर प्रदेश के बरेली-आंवला क्षेत्र की सियासत में जोरदार भूचाल आ गया है। आंवला से दो बार सांसद रह चुके वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र कश्यप ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर महज तीन शब्द "टाटा बाय-बाय" लिखकर भाजपा को अलविदा कहने के संकेत दे दिए हैं। 

इस रहस्यमयी और तल्ख पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर उनके आवास तक समर्थकों और कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्यसभा टिकट कटने और अपनी बेटी कीर्ति कश्यप की राजनीतिक दावेदारी को दरकिनार किए जाने से आहत होकर वह समाजवादी पार्टी या किसी अन्य दल का दामन थाम सकते हैं।

मूल रूप से कंधरापुर निवासी धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे वर्ष 2002 में पहली बार बसपा के टिकट पर विधायक बने थे और फिर 2003 में सपा सरकार में राज्य मंत्री रहे। 

सन् 2009 के लोकसभा चुनाव में आंवला सीट से मेनका गांधी से करीबी मुकाबले में हारने के बाद वे भाजपा में शामिल हुए और 2014 व 2019 में लगातार दो बार सांसद चुने गए। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के नीरज मौर्य से 15,970 वोटों से मिली हार के बाद से ही वे अपनी बेटी कीर्ति कश्यप को राजनीति में स्थापित करने के लिए जमीन तैयार कर रहे थे। चर्चा थी कि वे बेटी के लिए राज्यसभा की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन सूची में नाम न होने पर नाराजगी खुलकर सामने आ गई।

नाराज समर्थकों ने सोशल मीडिया पर नेतृत्व को चेताते हुए लिखा कि जमीनी नेताओं को दरकिनार कर पहले से मंत्रियों को टिकट दिया जा रहा है, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव में बरेली की सभी 9 सीटों पर भाजपा को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस पूरे घटनाक्रम पर शेर सुनाते हुए धर्मेंद्र कश्यप ने दर्द बयां किया कि "आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफिर ने कभी समंदर नहीं देखा..."। 

उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्यसभा टिकट उनके लिए बड़ा मुद्दा नहीं है, असली पीड़ा यह है कि 2024 के चुनाव में जिन लोगों ने खुलकर उनके खिलाफ काम किया, उन्हें पार्टी में अगली कतार में बैठाया जा रहा है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने ऐलान किया कि पूरे मंडल और जनपद के समर्थकों की आपात बैठक बुलाई जा रही है, जिसमें बातचीत के बाद वे अपनी अगली सियासी रणनीति का अंतिम फैसला लेंगे।