अमेरिका से लेकर साउथ कोरिया और जापान तक शेयर बाजार में हाहाकार

अमेरिका से लेकर साउथ कोरिया और जापान तक शेयर बाजार में हाहाकार

वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों का जाल आज इस कदर एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है कि दुनिया के किसी एक कोने में होने वाली हलचल का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर साफ दिखाई देता है। हाल ही में वैश्विक वित्तीय बाजारों में उस समय अफरातफरी मच गई जब दुनिया के सबसे ताकतवर अमेरिकी बाजार यानी वॉल स्ट्रीट से लेकर एशियाई दिग्गजों जैसे साउथ कोरिया (South Korea) और जापान (Japan) के शेयर बाजारों में भयंकर गिरावट और हाहाकार मच गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर रुख, टेक शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव के चलते विदेशी निवेशकों ने इन बाजारों से अपना पैसा धड़ाधड़ निकालना शुरू कर दिया था। हर किसी को यह डर सता रहा था कि जब वैश्विक बाजार इस तरह धड़ाम हो रहे हैं, तो भारतीय शेयर बाजार भी इसकी चपेट में आए बिना नहीं रह पाएगा। लेकिन इसके विपरीत, भारतीय दलाल स्ट्रीट ने इन तमाम नकारात्मक वैश्विक संकेतों को पूरी तरह झुठलाते हुए एक अद्भुत और अप्रत्याशित चमत्कार कर दिखाया। घरेलू निवेशकों के भरोसे और मजबूत आर्थिक फंडामेंटल्स के दम पर भारतीय बाजार ने न केवल खुद को संभाला, बल्कि शानदार रिकवरी कर सबको हैरान कर दिया।

वैश्विक बाजारों में क्यों मचा था हाहाकार? जानिए अमेरिकी और एशियाई बाजारों का हाल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछले कुछ दिनों से आर्थिक अनिश्चितताओं का एक दौर चल रहा है। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहने के कारण केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की आशंका ने निवेशकों की नींद उड़ा दी थी। इसके साथ ही, सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के बड़े शेयरों में भारी बिकवाली के चलते अमेरिकी सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इसका सीधा असर एशियाई बाजारों पर पड़ा। साउथ कोरिया का कॉस्पी (Kospi) इंडेक्स हो या जापान का निक्केई (Nikkei), विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण वहां के शेयर बाजारों में कोहराम मच गया। निवेशकों की गाढ़ी कमाई कुछ ही घंटों में डूब गई। ऐसे समय में आर्थिक विशेषज्ञों का मानना था कि भारतीय शेयर बाजार भी इस सुनामी से नहीं बच पाएगा और यहाँ भी भारी गिरावट देखने को मिलेगी।

तमाम वैश्विक दबावों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में कैसे हुआ यह चमत्कार?

जब पूरी दुनिया के बाजार लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे, तब भारतीय शेयर बाजार ने अपनी स्वदेशी ताकत और घरेलू आर्थिक मजबूती का शानदार परिचय दिया। इस चमत्कार के पीछे सबसे बड़ा हाथ हमारे देश के घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और खुदरा (Retail) निवेशकों का रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत के छोटे शहरों और गांवों से लेकर महानगरों तक के लोगों ने म्यूचुअल फंड्स और एसआईपी (SIP) के जरिए जिस तरह से भारतीय शेयर बाजार में लगातार निवेश किया है, उसने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के हर झटके को आसानी से सोख लिया है। इसके अलावा, भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की विकास दर (GDP Growth Rate) आज भी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बनी हुई है। देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का विस्तार, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर सरकार का भारी खर्च और कॉर्पोरेट जगत के शानदार तिमाही वित्तीय नतीजे इस बात की गवाही दे रहे थे कि भारतीय कंपनियों की बुनियाद बेहद मजबूत है, जिससे वैश्विक उथल-पुथल का असर यहाँ ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली को घरेलू निवेशकों ने कैसे बनाया ढाल?

पारंपरिक रूप से यह माना जाता था कि जब तक विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार में पैसा नहीं लगाएंगे, तब तक यहाँ बड़ी तेजी नहीं आ सकती। लेकिन इस बार का परिदृश्य बिल्कुल अलग और ऐतिहासिक रहा। जब FIIs ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते भारत से अपना पैसा निकाला, तब हमारे देश के घरेलू म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और बैंक्स ने उस खाली जगह को मजबूती से भर दिया। हर गिरावट पर भारतीय निवेशकों ने शेयरों की खरीदारी की, जिससे बाजार को एक मजबूत सहारा मिला। इसी मजबूत बाइंग सपोर्ट के चलते बाजार ने न केवल अपनी शुरुआती गिरावट को चंद घंटों में रिकवर कर लिया, बल्कि निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान भी वापस ले आया। यह इस बात का प्रमाण है कि अब भारतीय शेयर बाजार विदेशी ताकतों के रहमो-करम पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहा, बल्कि यह आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख रहा है।

निवेशकों के लिए क्या है सबक और आगे का आउटलुक?

वैश्विक आंधियों के बीच भारतीय शेयर बाजार का यह शानदार प्रदर्शन देश के निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ा सकारात्मक संकेत है। यह घटना साबित करती है कि यदि किसी देश की मैक्रो-इकोनॉमिक पॉलिसीज मजबूत हैं और घरेलू मोर्चे पर निवेशकों का विश्वास अडिग है, तो बाहरी झटके ज्यादा नुकसान नहीं पहुँचा सकते। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के मोर्चे पर अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है। निवेशकों को चाहिए कि वे किसी भी तरह की अफवाह या पैनिक में आकर अपने बेहतरीन शेयरों को न बेचें, बल्कि लंबी अवधि के नजरिए से क्वालिटी शेयरों में निवेश जारी रखें। भारत की आर्थिक ताकत जिस तरह से पूरी दुनिया में एक मिसाल बन रही है, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित और आकर्षक ठिकाना बना रहेगा।