Up kiran,Digital Desk : राजधानी में सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्त कार्रवाई के तहत दिल्ली सरकार ने 85 कंपनियों को नोटिस जारी किया है। यह जानकारी सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को सौंपी गई रिपोर्ट में साझा की। राजधानी में 19 प्रकार के सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध है और बिना प्रमाणित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का उत्पादन या बिक्री गैरकानूनी है।
ईपीआर नियमों के तहत कंपनियों की जिम्मेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा 2022 में लागू किए गए एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) नियमों के तहत:
प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को अपने प्लास्टिक कचरे की जिम्मेदारी स्वयं उठानी होगी।
प्लास्टिक कचरा प्रोसेस करने वाले इकाइयों (PWPs) के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
दिल्ली सरकार का दावा है कि इन नियमों से प्लास्टिक कचरे पर बेहतर नियंत्रण संभव हुआ है।
जागरूकता और निरीक्षण
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने कंपनियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अखबारों में नोटिस प्रकाशित किए। इसके साथ ही:
औद्योगिक क्षेत्रों में सर्वेक्षण
इंडस्ट्री एसोसिएशनों के साथ बैठक
निरीक्षण गतिविधियां
की गईं।
सभी रजिस्टर्ड कंपनियों को 30 नवंबर 2025 तक सालाना रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर सिस्टम स्वतः रिटर्न तैयार करेगा, अगले साल लक्ष्य 25% बढ़ाया जाएगा और पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना लगाया जा सकता है।
दिल्ली में प्लास्टिक कचरा प्रोसेसिंग लक्ष्य
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार:
कुल ईपीआर टारगेट:
14,356 टन रिजिड प्लास्टिक
2,09,860 टन फ्लेक्सिबल प्लास्टिक
26,375 टन मल्टीलेयर प्लास्टिक
751 टन कंपोस्टेबल प्लास्टिक
प्लास्टिक कचरा प्रोसेस करने वाली यूनिट्स (PWPs) के लिए: 494 आवेदन, जिनमें से 430 को रजिस्ट्रेशन मिला। इनमें 422 रिसाइक्लिंग यूनिट्स, 5 वेस्ट टू एनर्जी प्लांट्स, 1 सीमेंट फैक्ट्री को-प्रोसेसिंग, 1 वेस्ट टू ऑयल, और 1 इंडस्ट्रियल कंपोस्टिंग शामिल हैं।
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में कोई ढील नहीं बरती जाएगी।




