‘गांधारी’ की रिलीज के बीच तापसी पन्नू के तीखे बयानों ने मचाई सनसनी, बिना नाम लिए....
फिल्म इंडस्ट्री की दुनिया जितनी बाहर से रंगीन और चकाचौंध से भरपूर दिखाई देती है, उसके अंदर की परतें उतनी ही उलझी हुई और कई बार बहस का मुद्दा बनी रहती हैं। जब भी सिनेमा जगत में किसी नए प्रोजेक्ट, कंटेंट या फिर फिल्मों की विषय-वस्तु को लेकर बात होती है, तो कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो कभी भी अपनी बात कहने से पीछे नहीं हटते। इन बेबाक और साहसी कलाकारों की सूची में अभिनेत्री तापसी पन्नू का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। हाल ही में जब उनकी बहुचर्चित और सस्पेंस से भरपूर फिल्म ‘गांधारी’ ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर दस्तक दी है, तब से वे लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। इसी बीच तापसी पन्नू ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री में सनसनी फैला दी है। उन्होंने किसी का भी नाम लिए बिना आज के समय की उन फिल्मों और कहानियों पर करारा तंज कसा है जिनमें महिलाओं के प्रति अपमानजनक रवैया, हिंसा या फिर जहरीले (Toxic) रिश्तों को महिमामंडित किया जाता है। तापसी के इस तीखे कटाक्ष ने सोशल मीडिया से लेकर फिल्मी गलियारों तक में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक है कि आखिर उनका इशारा किसकी तरफ था और उन्होंने ऐसा क्यों कहा।
बिना नाम लिए टॉक्सिक और आपत्तिजनक सामग्री वाली फिल्मों पर बरसीं तापसी, कहा- समाज को परोसा जा रहा है गलत संदेश
आज के दौर में जब बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों की कमाई करने के लिए कई बार ऐसी फिल्मों को प्राथमिकता दी जाती है जिनमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा, जबरदस्ती या फिर टॉक्सिक रिश्तों को बहुत ही ग्लैमरस तरीके से दिखाया जाता है, तब कुछ आवाजें इसके खिलाफ उठनी भी शुरू हो गई हैं। तापसी पन्नू ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि कैसे आज के समय में मनोरंजन के नाम पर दर्शकों को ऐसी कहानियां परोसी जा रही हैं जो समाज में नकारात्मकता और गलत मानसिकता को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक कलाकार के रूप में उनकी भी कुछ सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियां होती हैं, और वे कभी भी ऐसी किसी पटकथा का हिस्सा नहीं बनेंगी जो किसी भी रूप में टॉक्सिसिटी या अपमानजनक व्यवहार का समर्थन करती हो। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि यदि उनके सामने कभी ऐसा समय आया जब उन्हें मजबूरी में ऐसी ही फिल्में करनी पड़ें, तो वे इस तरह की घिसी-पिटी और जहरीली कहानियों पर काम करने से बेहतर अभिनय की दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहना पसंद करेंगी। उनके इस स्पष्ट और निडर बयान ने यह साबित कर दिया है कि वे केवल पर्दे पर ही मजबूत किरदार नहीं निभाती हैं, बल्कि असल जिंदगी में भी अपनी मान्यताओं के प्रति उतनी ही अडिग और पक्की हैं।
'गांधारी' जैसी सशक्त कहानियों का समर्थन करती हैं तापसी, कला और कमर्शियल सिनेमा के बीच के इस बारीक फर्क को समझना है जरूरी
एक तरफ जहां तापसी पन्नू कमर्शियल दबावों से दूर रहकर महिलाओं के नेतृत्व वाली और लीक से हटकर कहानियों को चुनती हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी हालिया फिल्म ‘गांधारी’ भी इसी विचारधारा का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसी मां का किरदार निभाया है जो अन्याय के खिलाफ खुद मैदान में उतरती है और अपने अधिकारों के लिए लड़ती है। अपने बयानों में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दर्शकों को भी अब यह तय करना होगा कि वे किस तरह की फिल्मों को देखना पसंद करते हैं, क्योंकि टिकट खिड़की और ओटीटी व्यूअरशिप के आंकड़े ही निर्माताओं को यह तय करने की प्रेरणा देते हैं कि वे किस प्रकार का कंटेंट बनाएं। जब दर्शक टॉक्सिक और हिंसक कहानियों को नकारना शुरू कर देंगे, तो खुद-ब-खुद फिल्मों का स्तर सुधर जाएगा। सोशल मीडिया पर उनके इस बयान के सामने आने के बाद से ही फैंस और कई अन्य सेलिब्रिटीज ने भी उनका समर्थन करना शुरू कर दिया है। लोग कह रहे हैं कि आज के दौर में जब ज्यादातर सितारे विवादों से बचने के लिए राजनीतिक रूप से सही (Politically Correct) रहने की कोशिश करते हैं, तब तापसी का इस तरह खुलकर अपनी बात रखना वाकई सराहनीय और हिम्मत का काम है।