एक हफ्ते पहले ही होने वाला था टाइगर श्रॉफ पर हमला, जानिए किस चमत्कार ने रोक दिया बड़ा हादसा
मुंबई के विले पार्ले स्थित पुष्पा नरसी ग्राउंड के बाहर बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर रविवार 18 अक्टूबर की शाम हुई अंधाधुंध गोलीबारी के मामले में मुंबई पुलिस की जांच में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं।
ताजा सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन के डेटा रिकॉर्ड (CDR) से सामने आया है कि तीनों अज्ञात शूटर इस हमले को अंजाम देने के लिए 11 अक्टूबर को भी ठीक उसी जगह मौजूद थे। पुलिस का मानना है कि साजिशकर्ताओं ने 11 अक्टूबर को ही अभिनेता को निशाना बनाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था, मगर इत्तेफाक से उस रविवार टाइगर फुटबॉल खेलने ग्राउंड नहीं पहुंचे और हमलावर बिना वारदात को अंजाम दिए बैरंग लौट गए। टाइगर के एक करीबी दोस्त ने बताया कि अभिनेता को फुटबॉल खेलने का बेहद शौक है और वे हर रविवार शाम 5 से 7 बजे के बीच पुष्पा नरसी पार्क में मैच खेलने नियमित रूप से आते हैं, जिसकी रेकी शूटर काफी समय से कर रहे थे।
हमले वाले दिन यानी 18 अक्टूबर की पड़ताल में ग्राउंड के बाहर लगे कैमरों से पता चला है कि शूटर शाम करीब 4:30 बजे ही इलाके में जम गए थे और बार-बार मुख्य गेट से झांककर पुष्टि कर रहे थे कि टाइगर अंदर मौजूद हैं या नहीं।
पुलिस को गहरा अंदेशा है कि ग्राउंड के भीतर या आसपास कुछ और मुखबिर भी तैनात थे जो अभिनेता के हर मूवमेंट की लाइव सूचना शूटर्स को दे रहे थे। जैसे ही शाम 7 बजे मैच खत्म होने के बाद टाइगर बाहर निकले, शूटरों ने उनकी लग्जरी बीएमडब्ल्यू कार को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। चश्मदीद दोस्तों के अनुसार, शुरुआती धमाकों को ग्राउंड में मौजूद लोगों ने पटाखों का शोर समझा क्योंकि कुछ ही देर पहले वहां एक साथी खिलाड़ी का जन्मदिन मनाते हुए आतिशबाजी की गई थी, लेकिन जैसे ही बाहर चीख-पुकार मची तो पता चला कि शूटरों ने टाइगर की गाड़ी पर हमला कर दिया है। हमले के बाद टाइगर ने अदम्य साहस दिखाते हुए खुद घायल ड्राइवर को संभाला, ड्राइविंग सीट पर बैठे और गाड़ी को सुरक्षित निकाल ले गए।