ममता का साथ छोड़ते ही रातों-रात हुआ फायदा, यूसुफ पठान पर सरकार ने लुटा दी बेशकीमती जमीन!

ममता का साथ छोड़ते ही रातों-रात हुआ फायदा, यूसुफ पठान पर सरकार ने लुटा दी बेशकीमती जमीन!

तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए पूर्व भारतीय क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार की तरफ से एक बड़ी राहत मिली है। वडोदरा में जिस बेशकीमती भूखंड को लेकर पिछले 12 सालों से कानूनी और प्रशासनिक खींचतान चल रही थी, उसे राज्य सरकार ने यूसुफ पठान को आवंटित करने का रास्ता साफ कर दिया है।

गुजरात सरकार के निर्देश के बाद वडोदरा नगर निगम (VMC) ने 978 वर्ग मीटर के इस पूरे प्लॉट के आवंटन का आधिकारिक प्रस्ताव तैयार कर अंतिम मुहर के लिए स्थायी समिति को भेज दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी आदेश में 500 वर्ग मीटर जमीन पूर्व क्रिकेटर को उपहार के रूप में देने और शेष 478 वर्ग मीटर जमीन पर 55 फीसदी की भारी रियायती दर लागू करने का प्रावधान किया गया है, जबकि आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इसे भविष्य के लिए कोई प्रशासनिक नजीर नहीं माना जाएगा और इस जमीन के एवज में राज्य का राजस्व विभाग नगर निगम को समान मूल्य की जमीन मुहैया कराएगा।

यह विवादित भूखंड वडोदरा के तंदलजा इलाके में टाउन प्लानिंग स्कीम 22, फाइनल प्लॉट नंबर 90 के अंतर्गत स्थित है, जो ठीक पठान परिवार के मौजूदा आवास से सटा हुआ है। नगर निगम की स्थायी समिति ने इसी साल जुलाई में इस प्लॉट की नीलामी के लिए 2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर तय की थी, जिससे इस पूरे भूखंड का बाजार मूल्य लगभग 20.5 करोड़ रुपये आंका गया था, मगर कथित अतिक्रमण विवाद के चलते नीलामी प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया था।

जानें क्या है पूरा विवाद

इस विवाद की शुरुआत 2012 में हुई थी जब यूसुफ पठान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बिना किसी सार्वजनिक नीलामी के 99 साल की लीज पर इस जमीन की मांग की थी। हालांकि उस वक्त नगर निगम ने 5.6 करोड़ रुपये में इसे देने की सैद्धांतिक सहमति दी थी, लेकिन 2014 में गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने बिना नीलामी जमीन देने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसके बाद नगर निगम ने पठान पर जमीन घेरने के आरोप लगाए थे।

विवाद ने तब और तूल पकड़ा जब साल 2024 में नगर निगम ने पठान को अतिक्रमण हटाने का आधिकारिक नोटिस थमाया, जिसके खिलाफ वे फौरन गुजरात हाई कोर्ट पहुंचे थे। हालांकि अगस्त 2025 में हाई कोर्ट ने सरकार द्वारा आवंटन खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा और बाद में अदालत ने बिना वैध आवंटन या भुगतान के जमीन पर दावा करने को लेकर भी कड़े सवाल उठाए थे। इस बीच पर्दे के पीछे प्रशासनिक स्तर पर सुलह की रूपरेखा तैयार हुई और 13 अगस्त को राज्य सरकार ने नया आवंटन आदेश जारी किया, जो 29 अगस्त को वीएमसी पहुंचा। इसके महज दो दिन बाद यानी 31 अगस्त को यूसुफ पठान ने अदालत से अपनी याचिका यह कहते हुए वापस ले ली कि विवाद का निपटारा कोर्ट के बाहर हो रहा है। वडोदरा नगर निगम आयुक्त अरुण महेश बाबू ने पुष्टि की है कि राज्य सरकार की तरफ से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और अब यह प्रस्ताव नगर निगम की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरकर अंतिम रूप लेगा।