'नक्सली खत्म होंगे तो इनका भी खात्मा होगा', नसीरुद्दीन शाह के बयान पर भाजपा का पलटवार
दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा वामपंथी उग्रवाद और नक्सलियों पर दिए गए एक बेहद संवेदनशील बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में एक नया और भीषण संग्राम छिड़ गया है। अपने बेबाक और अक्सर विवादों में रहने वाले बयानों के लिए जाने जाने वाले नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से देश में जारी नक्सल विरोधी अभियानों और वामपंथी विचारधारा को लेकर कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जिसे लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बेहद कड़ा एतराज जताया है। नसीरुद्दीन शाह के इस बयान को सुरक्षा बलों के मनोबल पर चोट और नक्सली आतंकवाद का परोक्ष समर्थन करार देते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने चौतरफा हमला बोल दिया है। भाजपा ने दो टूक शब्दों में पलटवार करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश से लाल आतंक (Red Terror) का पूरी तरह से सफाया हो रहा है और जब देश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म होगा, तो उनके समर्थकों और 'अर्बन नक्सलियों' का राजनीतिक व सामाजिक अस्तित्व भी अपने आप समाप्त हो जाएगा।
नसीरुद्दीन शाह का वह विवादित बयान जिसने देश भर में सुलगा दी राजनीति की आग
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब नसीरुद्दीन शाह ने एक साक्षात्कार और परिचर्चा कार्यक्रम के दौरान देश में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे कड़े सैन्य व पुलिस अभियानों पर सवाल उठाए। शाह ने अपने वक्तव्य में यह संकेत देने की कोशिश की कि नक्सलियों की उग्रवादी गतिविधियों के पीछे उनकी अपनी सामाजिक-आर्थिक मजबूरियां और आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई है, और केवल बल प्रयोग के जरिए उन्हें दबाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों की समीक्षा करने और वामपंथी विचारधारा के समर्थकों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने की वकालत की। जैसे ही उनका यह बयान मुख्यधारा के मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हुआ, वैसे ही देश भर के प्रबुद्ध वर्ग, पूर्व सैन्य अधिकारियों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इसके खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
भाजपा का तीखा हमला: 'अर्बन नक्सलियों और उनके हमदर्दों का अब ज्यादा दिन बचना मुश्किल'
नसीरुद्दीन शाह की इस टिप्पणी के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर और आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए अभिनेता पर सीधा हमला बोला। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब देश के जांबाज जवान छत्तीसगढ़, झारखंड और गढ़चिरौली के जंगलों में अपनी जान की बाजी लगाकर देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं, तब बॉलीवुड के कुछ 'विशेषाधिकार प्राप्त' कलाकार वामपंथी आतंकवाद का महिमामंडन कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि 'नक्सली जब जंगलों से खत्म होंगे, तो शहरों में बैठे उनके हमदर्दों और फर्जी बौद्धिकों (Urban Naxals) का भी पूरी तरह से खात्मा हो जाएगा।' पार्टी ने स्पष्ट किया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान को चुनौती देने वाले किसी भी हिंसक संगठन या उसके विचारकों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
केंद्र सरकार का 'मिशन नक्सल-मुक्त भारत' और बस्तर से आ रहे बड़े बदलाव
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए एक समयबद्ध और सख्त रणनीति तैयार की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की अगुवाई में पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे अति-संवेदनशील इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं और खुफिया जानकारी आधारित सफल ऑपरेशनों को अंजाम दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, दर्जनों शीर्ष नक्सली कमांडर या तो मुठभेड़ों में मारे गए हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा की जीवनशैली को चुना है। विकास परियोजनाओं जैसे सड़कों का निर्माण, स्कूलों की स्थापना, और डिजिटल कनेक्टिविटी ने नक्सली कैडर की रीढ़ तोड़ दी है। भाजपा का तर्क है कि जब नक्सलवाद अपने अंतिम दिन गिन रहा है, तब इस तरह के बयान केवल इस हिंसक आंदोलन को ऑक्सीजन देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब करने की साजिश हैं।
कला जगत, अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक विचारधारा पर फिर छिड़ी देशव्यापी बहस
नसीरुद्दीन शाह के इस बयान और उस पर हुए भाजपा के तीखे पलटवार ने एक बार फिर देश में 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' (Freedom of Speech) बनाम 'राष्ट्रीय सुरक्षा' (National Security) की पुरानी बहस को तरोताजा कर दिया है। एक ओर जहां वामपंथी और लिबरल विचारकों का एक धड़ा नसीरुद्दीन शाह के बयान का समर्थन करते हुए इसे असहमति की आवाज बता रहा है, वहीं दूसरी ओर देश की बहुसंख्यक जनता और देशभक्त नागरिक सुरक्षा बलों के पक्ष में मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। आम नागरिकों का मानना है कि जो लोग बंदूकों और बारूद के बल पर निर्दोष ग्रामीणों, आदिवासियों और जवानों की हत्या करते हैं, उनके प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति जताना लोकतंत्र के मूल मूल्यों के खिलाफ है।
क्या नसीरुद्दीन शाह के इस बयान का पड़ेगा बॉलीवुड और उनकी आने वाली फिल्मों पर असर?
भाजपा और राष्ट्रवादी संगठनों के इस कड़े विरोध के बाद अब सोशल मीडिया पर नसीरुद्दीन शाह के खिलाफ बहिष्कार (Boycott) की मुहिम भी तेजी से ट्रेंड करने लगी है। फिल्म उद्योग के भीतर भी इस बयान को लेकर दो फाड़ देखने को मिल रहे हैं। कई निर्माताओं और निर्देशकों का मानना है कि कलाकारों को देश के बेहद संवेदनशील सुरक्षा मामलों पर राजनीतिक या पक्षपातपूर्ण बयानबाजी करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर उनकी व्यावसायिक फिल्मों और पूरी इंडस्ट्री की साख पर पड़ता है। फिलहाल, भाजपा के इस आक्रामक रुख के बाद नसीरुद्दीन शाह या उनके लीगल ग्रुप की ओर से कोई नया सफाई भरा बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इस पूरे विवाद ने देश का सियासी तापमान चरम पर पहुंचा दिया है।