श्रुति हासन की तस्वीरों और वीडियो से अब कोई नहीं कर पाएगा खिलवाड़, मद्रास हाईकोर्ट...
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी और बेबाक अभिनेत्री श्रुति हासन ने अपनी निजी जिंदगी और डिजिटल अधिकारों की रक्षा के लिए एक ऐसा ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाया है जो आने वाले समय में अन्य कलाकारों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बन गया है। आज के इस आधुनिक डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में जहां किसी भी सेलिब्रिटी की तस्वीरों, वीडियो और उनकी आवाज के साथ छेड़छाड़ करके फर्जी या डीपफेक कंटेंट धड़ल्ले से इंटरनेट पर फैलाया जा रहा है, वहीं श्रुति हासन ने इस डिजिटल अराजकता के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ते हुए मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने एक बहुत बड़ा और कड़ा आदेश पारित किया है, जिसके तहत अब इंटरनेट पर उनकी सहमति के बिना उनकी किसी भी फोटो, वीडियो, ऑडियो या उनके नाम से जुड़े किसी भी प्रकार के अनधिकृत और भ्रामक कंटेंट का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। अदालत के इस फैसले से उन तमाम शरारती तत्वों और सोशल मीडिया पेजों को बड़ा झटका लगा है जो सेलिब्रिटी की लोकप्रियता का गलत फायदा उठाकर इंटरनेट पर फर्जी सामग्री परोसते हैं। श्रुति हासन द्वारा उठाया गया यह साहसिक कदम यह साबित करता है कि कलाकारों को अपनी प्राइवेसी और सम्मान के लिए अब चुप बैठने के बजाय कानूनी रूप से मजबूत लड़ाई लड़नी चाहिए।
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर डीपफेक और फर्जी कंटेंट के बढ़ते खतरे के बीच अभिनेत्री ने दिखाई सख्त कानूनी राह
पिछले कुछ समय से पूरी दुनिया में, विशेषकर भारत जैसे विशाल डिजिटल बाजार में, सेलिब्रिटीज की प्राइवेसी पर मंडराता खतरा लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। तकनीक के दुरुपयोग के कारण आज कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के चेहरे या आवाज को मॉर्फ करके ऐसा फर्जी कंटेंट तैयार कर सकता है जो देखने में बिल्कुल असली लगे, जिसे तकनीकी भाषा में डीपफेक (Deepfake) कहा जाता है। श्रुति हासन भी इस आधुनिक साइबर अपराध और अनधिकृत शोषण का शिकार हो चुकी थीं, जहां विभिन्न वेबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनकी अनुमति के बिना उनके नाम और तस्वीरों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था। जब इस तरह की चीजें हद से ज्यादा बढ़ने लगीं, तो अभिनेत्री ने इसे नजरअंदाज करने के बजाय इसके खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया। उन्होंने अपने वकीलों के माध्यम से मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की कि उनके व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) और पब्लिसिटी राइट्स की रक्षा की जाए। अदालत ने उनकी इस याचिका की गंभीरता को समझते हुए तुरंत संज्ञान लिया और संबंधित सभी प्लेटफॉर्म्स को यह सख्त निर्देश दिया कि वे तुरंत ऐसा सारा आपत्तिजनक और अनधिकृत कंटेंट अपने सर्वर से हटा लें। यह फैसला न केवल श्रुति हासन के लिए एक बड़ी राहत है, बल्कि यह उन सभी असामाजिक तत्वों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है जो कानून को ताक पर रखकर किसी की भी प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ करने की सोचते हैं।
मद्रास हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कसेगा शिकंजा, मिलेंगे व्यापक कानूनी अधिकार
मद्रास हाईकोर्ट द्वारा श्रुति हासन के पक्ष में दिया गया यह फैसला भारतीय मनोरंजन जगत के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। अदालत के इस आदेश के बाद अब गूगल, मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम), एक्स (ट्विटर) और अन्य वीडियो स्ट्रीमिंग या होस्टिंग प्लेटफॉर्म्स की यह कानूनी जिम्मेदारी बन जाती है कि वे लगातार मॉनिटरिंग करें और यह सुनिश्चित करें कि अभिनेत्री की सहमति के बिना कोई भी फेक इमेज या वीडियो इंटरनेट पर अपलोड न हो सके। यदि कोई व्यक्ति या वेबसाइट इस आदेश की अवहेलना करते हुए श्रुति हासन की तस्वीरों या वीडियो का दुरुपयोग जारी रखती है, तो उसके खिलाफ अदालत की अवमानना और गंभीर कॉपीराइट उल्लंघन के तहत सीधे आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से भविष्य में सेलिब्रिटीज को अपनी ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। आज के दौर में जब हर एक कलाकार की फैन फॉलोइंग करोड़ों में होती है और उनकी हर गतिविधि पर साइबर दुनिया की नजर रहती है, तब इस तरह के कड़े कानूनी प्रावधान कलाकारों के मानसिक और व्यावसायिक हितों की रक्षा करने के लिए बेहद आवश्यक हो चुके हैं। श्रुति हासन के फैंस भी सोशल मीडिया पर इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना ही असली ताकत की पहचान है।