सिर्फ अच्छी आवाज से नहीं मिलती कामयाबी, हिमेश रेशमिया ने बताया कलाकारों को क्यों बदलना चाहिए
भारतीय संगीत जगत में अपने अनूठे अंदाज, नाक से गाने की शैली और लगातार सुपरहिट गानों से दशकों तक राज करने वाले मशहूर संगीतकार, गायक और अभिनेता हिमेश रेशमिया (Himesh Reshammiya) ने उभरते हुए कलाकारों के लिए एक बहुत बड़ी और जीवन बदलने वाली सीख साझा की है। हाल ही में एक विशेष साक्षात्कार और संगीत मंच पर बातचीत के दौरान हिमेश ने इस बात से पर्दा उठाया कि केवल एक अच्छी या सुरीली आवाज होने मात्र से किसी भी कलाकार को संगीत की दुनिया में स्थायी सफलता या स्टारडम नहीं मिल सकता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इंडस्ट्री में टिके रहने और दर्शकों के दिलों पर राज करने के लिए एक कलाकार को अपनी शैली, संगीत के बदलते दौर और आधुनिक तकनीकों के साथ खुद को लगातार बदलना (Adapt and Evolve) बहुत जरूरी होता है, अन्यथा समय के साथ वे गुमनामी के अंधेरे में खो जाते हैं।
सिर्फ सुरीला गला काफी नहीं: हिमेश रेशमिया ने बताए सफलता के कड़े और कड़वे सच
हिमेश रेशमिया ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों और फिल्मी सफर के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, तब भी गायकी के पारंपरिक नियम बहुत सख्त हुआ करते थे। लेकिन उन्होंने लीक से हटकर कुछ नया करने का जोखिम उठाया और अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने युवा गायकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में हर दूसरा इंसान सुरीला गा सकता है, इसलिए केवल अच्छी आवाज होना अब सफलता की कोई गारंटी नहीं रह गई है। सफलता पाने के लिए आवाज में एक विशिष्टता (Uniqueness), अपनी खुद की मौलिक रचनाएं (Original Compositions) और श्रोताओं की नब्ज को पहचानने की अद्भुत क्षमता होनी चाहिए। जब तक कोई कलाकार अपनी कम्फर्ट जोन से बाहर आकर प्रयोग नहीं करता, तब तक उसे इंडस्ट्री में बड़ा मुकाम हासिल नहीं हो सकता।
संगीत की बदलती दुनिया और आधुनिक ट्रेंड्स के साथ खुद को ढालना क्यों है अनिवार्य?
संगीत उद्योग पिछले कुछ वर्षों में बेहद तेजी से बदला है। मेलोडी से लेकर रैप, हिप-हॉप, और इलेक्ट्रॉनिक फ्यूजन तक, आज के श्रोताओं की पसंद हर महीने बदल रही है। इस संदर्भ में बात करते हुए हिमेश ने जोर देकर कहा कि जो कलाकार यह जिद पाल लेते हैं कि वे समय के साथ नहीं बदलेंगे और केवल एक ही पैटर्न पर काम करते रहेंगे, वे बहुत जल्द रेस से बाहर हो जाते हैं। एक सफल संगीतकार या गायक वही है जो बदलते वक्त की मांग को समझे, नए दौर के गीतकारों और संगीत निर्देशकों के साथ तालमेल बिठाए और अपनी गायकी में नए प्रयोग करने से बिल्कुल न डरे। खुद को समय के अनुरूप अपडेट करना ही किसी भी क्रिएटर या आर्टिस्ट के लंबे करियर का सबसे बड़ा मूलमंत्र है।
रातों-रात मिलने वाली शोहरत और असफलता का सामना: कलाकारों के लिए जरूरी सलाह
आज के दौर में रियलिटी शो और इंस्टाग्राम रील्स के जरिए युवाओं को बहुत जल्दी रातों-रात शोहरत मिल जाती है, लेकिन हिमेश रेशमिया का मानना है कि यह चमक-धमक उतनी ही जल्दी गायब भी हो जाती है यदि कलाकार के पास जमीन से जुड़ी मेहनत और निरंतरता (Consistency) न हो। उन्होंने युवा कलाकारों को सलाह दी कि वे केवल वायरल होने के पीछे न भागें, बल्कि अपने अंदर के हुनर को मांजने और सीखने की प्रक्रिया को जीवन भर जारी रखें। असफलता हर किसी के जीवन में आती है, लेकिन जो कलाकार असफलता से डरकर मैदान छोड़ देते हैं वे कभी लीजेंड नहीं बन पाते। असली कलाकार वही है जो हर असफलता से सीख लेकर और भी अधिक दमदार तरीके से वापसी करे।
एक प्रेरणादायक सफर: हिमेश रेशमिया का संगीत और उनके जीवन का फलसफा
हिमेश रेशमिया का खुद का सफर इस बात का सबसे बड़ा जीवंत प्रमाण है कि कैसे एक कंपोजर ने लगातार अपनी शैली को बदलते हुए पीढ़ियों के दिलों पर राज किया है। 'आशिकी मेरी', 'झलक दिखला जा', 'तेरा सुरूर' जैसे ब्लॉकबस्टर गानों से लेकर आज के दौर के नए स्वतंत्र संगीत (Indie Pop & Sufi Music) तक, उन्होंने हमेशा खुद को reinvent किया है। उनका यह बयान न केवल संगीत से जुड़े लोगों के लिए, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संघर्ष कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है कि बदलाव ही प्रकृति का नियम है और जो समय के साथ खुद को ढाल लेता है, वही इतिहास रचता है।