जयपुर के भांकरोटा में फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस की बड़ी दबिश, करोड़ों का पर्दाफाश
राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में साइबर अपराधियों और फर्जी कॉल सेंटर संचालकों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जयपुर कमिश्नरेट की स्पेशल टीम और भांकरोटा थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से एक हाई-प्रोफाइल अवैध कॉल सेंटर पर अचानक ताबड़तोड़ दबिश दी, जो शहर के एक शांत इलाके में छिपकर अमेरिकी नागरिकों को चूना लगाने का नापाक खेल खेल रहा था। पुलिस की इस अचूक कार्रवाई से साइबर ठगों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह तकनीक और अंग्रेजी संवाद कौशल का गलत इस्तेमाल करके विदेशियों को अपना शिकार बना रहा था और हर महीने करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को क्रिप्टो करेंसी तथा हवाला चैनलों के माध्यम से ठिकाने लगा रहा था।
कैसे चलता था ठगी का यह पूरा खेल? अमेरिकी नागरिकों को ऐसे बनाते थे शिकार
पुलिस पूछताछ और शुरुआती तकनीकी विश्लेषण में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है कि इस फर्जी कॉल सेंटर के शातिर ठग खुद को अमेरिका की प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थाओं, टैक्स एजेंसियों (IRS) या टेक कंपनियों का प्रतिनिधि बताते थे। वे वीओआईपी (VoIP) कॉलिंग सॉफ्टवेयर और फर्जी वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल करके सीधे अमेरिका में बैठे निर्दोष नागरिकों को कॉल करते थे। वे अमेरिकी नागरिकों को डराते थे कि उनके सोशल सिक्योरिटी नंबर या बैंक खातों में गड़बड़ी पाई गई है और यदि उन्होंने तुरंत जुर्माना या समझौता राशि का भुगतान नहीं किया, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। डर और दबाव के माहौल में आकर कई अमेरिकी नागरिक गिफ्ट कार्ड्स, क्रिप्टो करेंसी या बैंक ट्रांसफर के जरिए अपनी गाढ़ी कमाई इन ठगों के खातों में जमा करा देते थे, जिसके बाद सारा पैसा आपस में बांट लिया जाता था।
भांकरोटा इलाके में चल रहा था गुप्त ठिकाना, 10 शातिर आरोपी गिरफ्तार या डिटेन
जयपुर के तेजी से विकसित हो रहे आवासीय और शैक्षणिक क्षेत्र भांकरोटा में एक आलीशान विला को किराए पर लेकर इस फर्जी कॉल सेंटर का पूरा साम्राज्य चलाया जा रहा था। किसी को शक न हो, इसलिए बाहर से यह कार्यालय पूरी तरह बंद और शांत प्रतीत होता था, लेकिन रात होते ही इसके भीतर अमेरिकी समयानुसार कॉलिंग का दौर शुरू हो जाता था। पुलिस ने पुख्ता खुफिया सूचना (Intelligence Input) के आधार पर जब इस ठिकाने पर अचानक रेड मारी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। मौके से लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, महंगे हेडसेट, सर्वर, डेटा शीट्स और फर्जी स्क्रिप्ट के कागजात बरामद किए गए। पुलिस ने मौके से सरगना समेत कुल 10 शातिर आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जिनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट से जुड़े तार, ईडी और केंद्रीय एजेंसियां भी रख रही हैं नजर
जयपुर पुलिस कमिश्नर और साइबर सेल के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक स्थानीय ठगी का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार देश के कई अन्य महानगरों और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों से जुड़े हुए हैं। इस गिरोह के मास्टरमाइंड विदेशों में बैठे उन सरगनाओं के संपर्क में थे जो इस प्रकार के अवैध कॉल सेंटर सेटअप के लिए तकनीकी सहायता और डेटा उपलब्ध कराते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को भी इस पूरे वित्तीय फर्जीवाड़े की जानकारी साझा कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन ठगों ने पिछले कुछ महीनों में कुल कितने करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है और उनके बैंक खातों में कितना अवैध फंड ट्रांसफर हुआ है।
जयपुर पुलिस की बड़ी कामयाबी, साइबर क्राइम के खिलाफ लगातार जारी रहेगा अभियान
जयपुर पुलिस की इस साहसिक और पेशेवर कार्रवाई की हर तरफ सराहना हो रही है। इस खुलासे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पुलिस प्रशासन साइबर अपराधियों के नापाक मंसूबों को कुचलने के लिए कितनी मुस्तैदी से काम कर रहा है। पकड़े गए आरोपियों से मिले डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर पुलिस जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े चेहरों को भी बेनकाब करने वाली है। इस प्रकार की घटनाएं आम जनता को यह चेतावनी भी देती हैं कि ऑनलाइन दुनिया में सतर्कता बरतना कितना आवश्यक है, और जयपुर पुलिस की यह बड़ी दबिश साइबर ठगों के लिए एक कड़ा संदेश है कि देवभूमि राजस्थान में अवैध गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है।