'रामायण' के नए गाने पर मचा बवाल? किसी ने बताया 'कव्वाली' तो कोई बोला तमिल गाने की कॉपी, 'मंगल रंग' पर उठे सवाल
भारतीय सिनेमा के गलियारों में इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की आगामी मेगा बजट और बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' को लेकर चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है। इस फिल्म को भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे बड़े और भव्य प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आने वाले हैं। फिल्म की भव्यता, इसकी स्टार कास्ट और वीएफएक्स को लेकर फैंस के बीच पहले से ही भारी उत्साह बना हुआ है, लेकिन हाल ही में फिल्म से जुड़े एक गाने 'मंगल रंग' के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक अलग ही घमासान छिड़ गया है। इंटरनेट पर इस गाने के रिलीज होने के साथ ही यह विवादों के घेरे में आ गया है, जहां एक तरफ दर्शक इसकी भव्यता की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नेटिज़न्स ने इस पर गंभीर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। किसी ने इसे सूफी कव्वाली का रंग रूप बता दिया है, तो किसी ने सोशल मीडिया पर यह दावा करना शुरू कर दिया है कि इसकी धुन एक दक्षिण भारतीय तमिल गाने से प्रेरित या कॉपी की गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि भारतीय महाकाव्यों पर आधारित फिल्मों को बनाना किसी बड़े इम्तिहान से कम नहीं होता है, जहां हर एक छोटी से छोटी डिटेल पर जनता की पैनी नजर रहती है और जरा सी चूक या समानता सोशल मीडिया पर बड़े विवाद का रूप ले लेती है।
महाकाव्य पर बनी फिल्म का संगीत हमेशा से रहा है दर्शकों की कसौटी पर
जब भी भगवान राम और रामायण जैसे पवित्र और करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े ग्रंथ पर कोई फिल्म बनाई जाती है, तो दर्शकों की उम्मीदें आसमान छूने लगती हैं। इस प्रकार की फिल्मों में संगीत का रोल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह उस कालखंड की भव्यता, संस्कृति और दिव्यता को जीवंत करने का सबसे बड़ा माध्यम होता है। 'रामायण' जैसी फिल्म के साथ भी कुछ ऐसी ही उम्मीदें जुड़ी हुई हैं, क्योंकि इसका संगीत ऑस्कर विजेता संगीतकार और लीजेंड्री आर्टिस्ट्स के हाथों तैयार किया जा रहा है। ऐसे में जब फिल्म का नया ट्रैक 'मंगल रंग' जनता के सामने आया, तो हर किसी की निगाहें इसके बोल, इसकी कंपोजिशन और इसके म्यूजिकल अरेंजमेंट पर टिक गईं। लेकिन उम्मीदों के इस समंदर में जैसे ही यह गाना उतरा, सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं का सैलाब आ गया। कुछ संगीत प्रेमियों को इसका पारंपरिक और शास्त्रीय स्पर्श बहुत भाया, तो वहीं एक बड़े वर्ग ने इसके चयन और शैली पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी। यह विवाद इस बात का गवाह है कि आज के दौर में जब दर्शक किसी ऐतिहासिक या धार्मिक विषय पर फिल्म देखते हैं, तो वे उसकी प्रामाणिकता से बिल्कुल भी समझौता करने के मूड में नहीं होते हैं, और यही वजह है कि एक गाना आते ही इंटरनेट पर बहस का एक नया दौर शुरू हो गया है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: क्या 'मंगल रंग' एक सूफी कव्वाली जैसा लगता है?
'मंगल रंग' गाने के सामने आने के बाद सबसे पहली और बड़ी जो आलोचना सामने आई, वह इसके म्यूजिकल जॉनर और इसकी शैली को लेकर थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम और रेडिट पर तमाम यूजर्स ने यह चर्चा शुरू कर दी कि इस गाने की बीट्स, इसके गायन का तरीका और इसका पूरा का पूरा फील पारंपरिक सनातन या राम भक्तियों वाले संगीत के बजाय एक सूफी कव्वाली या दरगाह संगीत से ज्यादा मेल खाता है। कई यूजर्स ने लिखा कि चूंकि यह गीत भगवान श्री राम के प्रसंग से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें जो वाद्ययंत्र और धुनें इस्तेमाल की गई हैं, वे आधुनिक हिंदी सिनेमा के कमर्शियल फार्मूले जैसी महसूस होती हैं। लोगों का तर्क है कि रामायण काल की गरिमा और उसकी पवित्रता के अनुकूल शास्त्रीय या लोक संगीत का प्रभाव होना चाहिए था, न कि ऐसा संगीत जो किसी बॉलीवुड की आम रोमांटिक या दरबारी कव्वाली की याद दिलाए। इस एक बिंदु को लेकर इंटरनेट पर दो धड़े बन गए हैं। एक तरफ जहां फिल्म के मेकर्स के समर्थक इसे एक फ्यूजन और कलात्मक स्वतंत्रता बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शुद्धतावादी (Purists) दर्शक इस बात से खासे नाराज हैं कि महाकाव्य की गरिमा के साथ इस तरह के संगीत प्रयोग क्यों किए जा रहे हैं।
तमिल गाने की कॉपी होने के दावों ने सोशल मीडिया पर पकड़ी तेज रफ्तार
कव्वाली वाले एंगल पर बहस अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि सोशल मीडिया पर एक और नया और गंभीर आरोप लग गया, जिसने इस विवाद को और ज्यादा हवा दे दी। कई तेज-तर्रार नेटिज़न्स और म्यूजिक एनालिस्ट्स ने इंटरनेट पर यह दावा करना शुरू कर दिया कि 'मंगल रंग' की जो धुन या इसका मुखड़ा है, वह पूरी तरह से एक पहले से बने हुए दक्षिण भारतीय तमिल गाने की तर्ज पर तैयार किया गया है। लोगों ने वीडियो क्लिप्स को आपस में तुलना करते हुए शेयर करना शुरू कर दिया, जिसमें यह दिखाया जा रहा है कि गाने के कुछ खास हिस्से और म्यूजिकल नोट्स किसी पुरानी तमिल फिल्म के गाने या लोकगीत से हूबहू मिलते-जुलते हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर मेकर्स या संगीत निर्देशकों की तरफ से इस प्रकार के किसी भी कॉपी या प्रेरणा के दावे पर कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया में इस तरह की बातें बहुत तेजी से वायरल हो जाती हैं। इंटरनेट की जनता ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि इतने बड़े बजट और पैन-इंडिया स्तर पर बनने वाली फिल्म के मेकर्स को कम से कम ओरिजिनल और एकदम मौलिक संगीत पर काम करना चाहिए था, ताकि किसी भी तरह की प्लेगरिज्म या कॉपी होने की गपशप से बचा जा सके।
नितेश तिवारी की इस मेगा बजट फिल्म के लिए आगे की राह कितनी है चुनौतीपूर्ण?
यह पूरा विवाद इस बात की ओर साफ इशारा करता है कि नितेश तिवारी और उनकी पूरी टीम के लिए 'रामायण' फिल्म को पर्दे पर उतारना कितना बड़ा और जोखिम भरा काम साबित हो सकता है। जब आपकी फिल्म से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं, तो हर एक कदम बहुत संभलकर रखना पड़ता है। फिल्म के टीज़र, वीएफएक्स, कास्टिंग और अब गानों को लेकर जिस तरह की छोटी-छोटी बातों पर सोशल मीडिया पर हाय-तौबा मच जाती है, वह यह बताती है कि रिलीज से पहले ही यह फिल्म लगातार लाइमलाइट में बनी हुई है। हालांकि, सिनेमाई जानकारों का यह भी मानना है कि इस तरह की चर्चाएं और विवाद अंततः फिल्म के लिए एक प्रकार की फ्री पब्लिसिटी का काम भी कर देते हैं, जिससे आम जनता के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता और ज्यादा बढ़ जाती है। चाहे लोग गाने की तारीफ कर रहे हों या उसकी कमियां निकाल रहे हों, सच्चाई यह है कि हर कोई इसी गाने और फिल्म के बारे में ही बात कर रहा है। आने वाले दिनों में मेकर्स के सामने यह बड़ी चुनौती होगी कि वे इस तरह की आलोचनाओं का करारा और सकारात्मक जवाब दें और फिल्म के प्रमोशन के दौरान जनता के इस भ्रम को दूर करें, ताकि फिल्म की भव्यता पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया और आने वाले दिनों में फिल्म का भविष्य
अंत में अगर बात की जाए तो 'मंगल रंग' गाने पर मचा यह बवाल इस बात का प्रमाण है कि आज का दर्शक बहुत जागरूक और सतर्क हो चुका है। वह किसी भी फिल्म को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं करता, बल्कि उसके हर एक पहलू की बारीकी से जांच-पड़ताल करता है। कुछ लोग इस गाने को इसकी आधुनिक अपील और भव्य प्रस्तुतिकरण के लिए बेहद पसंद कर रहे हैं, तो वहीं संगीत प्रेमी और रूढ़िवादी दर्शक इसमें कमियां ढूंढने से पीछे नहीं हट रहे हैं। इस मिली-जुली प्रतिक्रिया के बीच यह साफ है कि रणबीर कपूर और साई पल्लवी की यह 'रामायण' बॉक्स ऑफिस पर आने से पहले ही भारतीय सिनेमा के गलियारों में सबसे बड़ी बहस का केंद्र बन चुकी है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में मेकर्स इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे जनता की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए गानों में कुछ बदलाव करते हैं या नहीं। लेकिन एक बात तो पक्की है कि इस तरह के विवादों ने यह साबित कर दिया है कि 'रामायण' फिल्म को लेकर दर्शकों का क्रेज किस हद तक चरम पर पहुंच चुका है और सिनेमाघरों में जब यह फिल्म उतरेगी, तो बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार होगी।