उसके बस की बात नहीं... वैभव सूर्यवंशी के बैटिंग नंबर पर भड़के आर अश्विन, टीम मैनेजमेंट को लगाई क्लास
भारतीय क्रिकेट में इन दिनों युवा खिलाड़ियों के चयन और उनके खेलने के क्रम को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार गर्म है, क्योंकि जरा सी लापरवाही किसी उभरते हुए सितारे का करियर दांव पर लगा सकती है। हाल ही में भारतीय क्रिकेट के सबसे कम उम्र के सनसनीखेज बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जब उन्हें उनकी स्वाभाविक ओपनिंग पोजीशन से हटाकर किसी अन्य नंबर पर बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतारा गया। इस सामरिक फैसले से देश के सबसे बुद्धिमान और अनुभवी स्पिनर्स में शुमार रविचंद्रन अश्विन (आर अश्विन) बुरी तरह भड़क उठे हैं। उन्होंने अपने बेबाक अंदाज में टीम मैनेजमेंट की तीखी आलोचना करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि एक युवा खिलाड़ी पर इस तरह के अजीबोगरीब प्रयोग करना बिल्कुल भी सही नहीं है और यह उस खिलाड़ी के बस की बात नहीं है कि वह हर मैच में अपनी पोजीशन बदलकर खुद को ढाल सके। अश्विन के इस कड़े बयान के बाद से क्रिकेट गलियारों में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या भारतीय टीम प्रबंधन वाकई युवा प्रतिभाओं के साथ सही दिशा में आगे बढ़ रहा है या फिर अनावश्यक प्रयोगों से उनका भविष्य खतरे में पड़ रहा है।
कौन हैं वैभव सूर्यवंशी और क्यों उनकी बैटिंग पोजीशन पर मचा हुआ है इतना बड़ा बवाल?
वैभव सूर्यवंशी का नाम इन दिनों घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं तक में एक बहुत बड़ा और चमकता हुआ नाम बन चुका है। अपनी कम उम्र में ही अपनी आक्रामक और निडर बल्लेबाजी शैली के दम पर उन्होंने चयनकर्ताओं और खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जब कोई खिलाड़ी बहुत कम उम्र में अपनी पारियों से बड़े-बड़े रिकॉर्ड तोड़ने लगता है, तो हर किसी की निगाहें उसके हर एक शॉट और उसकी बैटिंग पोजीशन पर टिक जाती हैं। वैभव की सबसे बड़ी खूबी यह रही है कि उन्होंने शुरुआत से ही अपनी टीम के लिए बतौर ओपनर यानी पारी की शुरुआत करते हुए गेंदबाजों पर दबाव बनाया है। नई गेंद के खिलाफ खुलकर खेलना और पावरप्ले का पूरा फायदा उठाना उनकी नेचुरल शैली का अहम हिस्सा रहा है। यही वजह है कि जब उन्हें अचानक से उनके तय क्रम से हटाकर मध्य क्रम या किसी अन्य नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए भेजा गया, तो उनके खेल के स्वभाव में एक बदलाव देखने को मिला, जिसे देखकर कई दिग्गज खिलाड़ियों और जानकारों ने अपनी चिंता जाहिर की। एक युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी के विकास के लिए यह बेहद जरूरी होता है होता है कि उसे उसकी पसंदीदा और सबसे प्रभावी पोजीशन पर ही खेलने का मौका मिले, ताकि उसका आत्मविश्वास लगातार बना रहे।
आर अश्विन का फूटा गुस्सा: टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर उठाए तीखे सवाल
वैभव सूर्यवंशी को उनके स्वाभाविक क्रम से छेड़छाड़ करने के फैसले पर अपनी कड़ी आपत्ति जताते हुए आर अश्विन ने बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल या खेल विश्लेषण के दौरान खेल की बारीकियों को समझाते हुए कहा कि हर बल्लेबाज का अपना एक मानसिक दायरा और खेलने का एक निश्चित तरीका होता है, खासकर उन खिलाड़ियों का जो अपनी पूरी जिंदगी या शुरुआती दौर से पारी की शुरुआत करते आए हैं। ओपनर के रूप में खिलाड़ी के पास क्रीज पर सेट होने और अपनी रणनीति बनाने का एक अलग मानसिक स्पेस होता है, लेकिन जब आप उसे अचानक से किसी दूसरे नंबर पर भेज देते हैं, तो उसकी पूरी लय बिगड़ जाती है। अश्विन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी युवा खिलाड़ी को उसकी स्ट्रेंथ के विपरीत गलत रोल देना न सिर्फ टीम की रणनीति को कमजोर करता है, बल्कि उस खिलाड़ी के भविष्य और उसके मानसिक संतुलन के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। उनका मानना था कि प्रबंधन को खिलाड़ियों की काबिलियत का सही आकलन करना चाहिए और उनसे प्रयोग करने के बजाय उन्हें वहां मौका देना चाहिए जहां वे सबसे ज्यादा सहज और घातक साबित होते हैं।
बल्लेबाजी क्रम में बार-बार बदलाव से युवा खिलाड़ियों के मानसिक संतुलन पर पड़ता है बुरा असर
आधुनिक क्रिकेट में टीम प्रबंधन अक्सर विभिन्न रणनीतियों और समीकरणों के तहत खिलाड़ियों को अलग-अलग नंबरों पर आजमाने का प्रयास करता है, जिसे आधुनिक क्रिकेट की भाषा में 'फ्लेक्सिबिलिटी' कहा जाता है। लेकिन कई बार यह प्रयोग खिलाड़ियों के लिए जी का जंजाल बन जाता है। वैभव सूर्यवंशी के मामले में भी यही बात पूरी तरह से लागू होती है। जब एक बल्लेबाज अपने शुरुआती करियर के चरण में होता है, तो उसे स्थिरता की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। अगर हर दूसरे मैच में उसकी बैटिंग पोजीशन बदल दी जाएगी, तो वह कभी भी अपनी मानसिक स्थिति को स्थिर नहीं रख पाएगा। उसे हमेशा यही डर सताता रहेगा कि अगले मैच में उसे किस नंबर पर बल्लेबाजी करनी होगी और टीम की उससे क्या उम्मीदें हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों और आर अश्विन जैसे दिग्गजों का यह मानना है कि युवा प्रतिभाओं के साथ इस तरह के लगातार प्रयोग करने से बचना चाहिए। उन्हें एक तय भूमिका सौंपनी चाहिए ताकि वे उस पोजीशन की बारीकियों को अच्छी तरह समझ सकें और अपनी पूरी क्षमता का सौ प्रतिशत मैदान पर प्रदर्शन कर सकें।
क्या टीम मैनेजमेंट को अपनी इस रणनीति पर करने की जरूरत है पुनर्विचार?
आर अश्विन के इस तीखे बयान के सामने आने के बाद से ही भारतीय क्रिकेट हलकों में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या भविष्य के मुकाबलों में वैभव सूर्यवंशी को वापस उनके पुराने स्थान यानी ओपनिंग स्लॉट पर भेजा जाएगा या नहीं। टीम के कोच और कप्तान के सामने यह एक बड़ी चुनौती है कि वे अपने युवा खिलाड़ियों का इस्तेमाल किस प्रकार करें ताकि उनकी व्यक्तिगत फॉर्म और टीम की सफलता दोनों प्रभावित न हों। प्रशंसकों का भी यही मानना है कि वैभव जैसे विस्फोटक बल्लेबाज को अगर पावरप्ले में खुलकर खेलने की छूट दी जाए, तो वे टीम के लिए मैच विनर साबित हो सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या चयनकर्ता और टीम मैनेजमेंट अश्विन जैसी दिग्गजों की इस सलाह को गंभीरता से लेते हैं या नहीं। लेकिन एक बात पूरी तरह से साफ हो चुकी है कि वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी पोजीशन को लेकर उठा यह विवाद फिलहाल इतनी आसानी से थमने वाला नहीं है, और हर कोई यही चाहता है कि इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी के साथ कोई भी ऐसा निर्णय न लिया जाए जिससे उसकी अद्भुत क्षमता पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव पड़े।