'दृश्यम' की कहानी पूरी तरह काल्पनिक नहीं थी! डायरेक्टर जीतू जोसेफ ने खोला राज— बताया साल 2000 की किस खौफनाक असली घटना से मिला था आइडिया और क्या कर गए थे बड़ी चूक

'दृश्यम' की कहानी पूरी तरह काल्पनिक नहीं थी! डायरेक्टर जीतू जोसेफ ने खोला राज— बताया साल 2000 की किस खौफनाक असली घटना से मिला था आइडिया और क्या कर गए थे बड़ी चूक

भारतीय सिनेमा जगत की सबसे बेहतरीन और माइंड-ब्लोइंग सस्पेंस-थ्रिलर फिल्मों में शुमार 'दृश्यम' (Drishyam) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और दिलचस्प खुलासा सामने आया है। फिल्म के ओरिजिनल डायरेक्टर जीतू जोसेफ ने बताया है कि जिस कहानी ने पूरे देश के दर्शकों के होश उड़ा दिए थे, उसका आइडिया पूरी तरह से काल्पनिक नहीं था बल्कि एक सच्ची घटना से प्रेरित था। इसके साथ ही डायरेक्टर ने ईमानदारी से अपनी वो बड़ी गलती भी स्वीकार की है, जो फिल्म के पहले पार्ट के दौरान उनसे अनजाने में हो गई थी।

साउथ के सिनेमाघरों में 'दृश्यम 3' की दस्तक, थ्रिलर लवर्स में भारी बज

मलयालम सिनेमा के साथ-साथ तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषाओं में 'दृश्यम 3' रिलीज हो चुकी है, जिसे लेकर साउथ के दर्शकों के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट देखने को मिल रहा है। हालांकि, हिंदी भाषा के दर्शकों को अजय देवगन वाले वर्जन के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। फिल्म की इस जबरदस्त हाइप के बीच डायरेक्टर जीतू जोसेफ ने एक इंटरव्यू में फिल्म की मूल कहानी के पीछे छिपे असली सच से पर्दा उठाया है।

दो परिवारों की असली दुश्मनी और पुलिस केस से मिला था 'दृश्यम' का आइडिया

जीतू जोसेफ ने एक खास बातचीत में बताया कि यह बात साल 2000 की है, जब वह फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा भी नहीं बने थे। उस दौरान उनके एक जानने वाले ने उन्हें एक असली घटना के बारे में बताया था, जो दो परिवारों के बीच हुए भयंकर विवाद से जुड़ी थी। यह मामला एक लड़के और लड़की के बीच का था, जो बाद में एक गंभीर पुलिस केस में बदल गया। जीतू जोसेफ कहते हैं, 'उस वक्त मुझे किसी ने बताया कि इस केस में दोनों ही परिवार अपनी-अपनी जगह सही भी थे और गलत भी। सबसे बड़ा सवाल यह था कि अगर आप वहां होते, तो किस परिवार का साथ देते? बस यहीं से मेरे दिमाग में इस थ्रिलर फिल्म का पहला स्पार्क आया।'

दर्शकों के दिमाग को घुमा देने वाली सिचुएशन पर टिकी थी फिल्म

डायरेक्टर के मुताबिक, उन्हें लगा कि अगर इस असली सिचुएशन को परदे पर उतारा जाए, तो दर्शकों के लिए फैसला करना बेहद मुश्किल हो जाएगा कि वे किसका सपोर्ट करें। दर्शक दोनों परिवारों की मजबूरियों के बीच झूलते रहेंगे और यही कशमकश फिल्म को एक अल्टीमेट थ्रिलर बनाएगी। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कई सालों बाद 'दृश्यम' की स्क्रिप्ट तैयार की, जिसे पर्दे पर मोहनलाल और हिंदी में अजय देवगन ने अमर बना दिया।

डायरेक्टर ने मानी अपनी बड़ी चूक, बोले— 'फिल्म में नहीं बन पाया सही बैलेंस'

जीतू जोसेफ ने इस बात का भी खुलासा किया कि फिल्म के सुपरहिट होने के बाद जब उन्होंने इसे खुद देखा, तो उन्हें अपनी एक बड़ी गलती का अहसास हुआ। उनका मानना है कि वह फिल्म में दोनों पक्षों के बीच सही बैलेंस (संतुलन) नहीं बना पाए। फिल्म देखने के बाद हर एक दर्शक जॉर्जकुट्टी (हिंदी में विजय सालगॉंवकर यानी अजय देवगन का किरदार) और उसके परिवार के साथ खड़ा हो गया और किसी ने दूसरे पक्ष के दर्द को नहीं समझा।

एक बेबस मां के नजरिये को नहीं समझ पाए दर्शक

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए जीतू जोसेफ ने कहा, 'अगर हम ठंडे दिमाग से सोचें तो क्या हम आईजी गीता प्रभाकर (हिंदी में तबु का किरदार) को सच में दोष दे सकते हैं? उसका इकलौता बेटा गायब हो चुका था और एक मां होने के नाते वह बेचैनी से सिर्फ सच जानना चाहती थी। उसके नजरिये से देखें तो जॉर्जकुट्टी कानून का मजाक उड़ाकर सब कुछ मैनीप्युलेट कर रहा था। चूंकि उसके बेटे ने अपनी करतूतें कभी अपनी मां को नहीं बताई थीं, इसलिए गीता प्रभाकर को अंदाजा ही नहीं था कि उसका बेटा कितना गलत था। एक मां के तौर पर वह सिर्फ अपने बच्चे के लिए तड़प रही थी, लेकिन मेरी चूक की वजह से दर्शकों की पूरी हमदर्दी सिर्फ जॉर्जकुट्टी के परिवार को मिली।

 

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