'वीडियो का मकसद जागरूकता फैलाना था', दीपावली से जुड़े विवाद के बीच दीया मिर्जा ने तोड़ी चुप्पी, दी सफाई

'वीडियो का मकसद जागरूकता फैलाना था', दीपावली से जुड़े विवाद के बीच दीया मिर्जा ने तोड़ी चुप्पी, दी सफाई

बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और अपनी पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली के लिए पहचानी जाने वाली दीया मिर्जा इन दिनों सोशल मीडिया पर छिड़े एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई हैं। दीपावली के पर्व के दौरान उनके द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो और उसमें दिए गए संदेश को लेकर जब सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्हें जमकर ट्रोल किया जाने लगा, तो आखिरकार अभिनेत्री ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। अपनी सफाई पेश करते हुए दीया मिर्जा ने कहा है कि उनके उस वीडियो या संदेश का मकसद किसी की भी धार्मिक भावनाओं को ठेس पहुंचाना या किसी विशेष त्योहार की परंपराओं का अपमान करना बिल्कुल नहीं था, बल्कि उनका एकमात्र उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा और बढ़ती वायु गुणवत्ता को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाना था। इस स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद से यह विवाद एक बार फिर से इंटरनेट और मुख्यधारा की मीडिया की सुर्खियों में छा गया है। आइए जानते हैं कि दीया मिर्जा ने अपने बयान में और क्या-क्या कहा है और आखिर इस पूरे विवाद की शुरुआत कैसे हुई।

क्या था वह वीडियो और क्यों भड़क उठा था सोशल मीडिया का एक बड़ा वर्ग?

इस पूरे विवाद की जड़ वह वीडियो है जिसे दीया मिर्जा ने दीपावली के ठीक पहले अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया था। इस वीडियो में अभिनेत्री ने महानगरों में बढ़ते प्रदूषण, हवा की खराब स्थिति और आतिशबाजी (पटाखों) से होने वाले नुकसान पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कम से कम पटाखे जलाएं और रोशनी का एक ऐसा उत्सव मनाएं जिससे प्रकृति को कम से कम नुकसान पहुंचे। हालांकि, जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, नेटिज़न्स का एक बड़ा वर्ग अभिनेत्री के खिलाफ खड़ा हो गया। लोगों का आरोप था कि बॉलीवुड सेलिब्रिटीज केवल हिंदू त्योहारों, विशेषकर दीपावली के समय ही पर्यावरण संरक्षण का ज्ञान देने के लिए आगे आते हैं, जबकि अन्य धर्मों के त्योहारों या साल भर होने वाले भारी-भरकम आयोजनों के दौरान उनकी यह सक्रियता पूरी तरह गायब रहती है। इसी दोहरे रवैये को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी तीखी आलोचना शुरू हो गई थी।

दीया मिर्जा ने तोड़ी चुप्पी: 'मेरा उद्देश्य किसी की आस्था को आहत करना नहीं था'

बढ़ते विवाद, ट्रोलिंग और मुंबई की मेयर समेत कई राजनीतिक हस्तियों की तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद दीया मिर्जा ने आखिरकार इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सफाई दी है। अभिनेत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके बयानों को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि एक पर्यावरण एक्टिविस्ट के रूप में उनकी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे हमारे पर्यावरण, हवा, पानी और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अपनी बात रखें। दीया ने कहा, "मेरा वह वीडियो किसी भी धर्म या किसी की भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया था। मैं खुद एक भारतीय पर्वों को पूरे उल्लास के साथ मनाने वाली इंसान हूं, लेकिन हमारे प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करना भी हम सबका साझा कर्तव्य है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका संदेश केवल और केवल वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करने के लिए था।

सेलिब्रिटी एक्टिविज़्म और त्योहारों के समय दिए जाने वाले बयानों पर लंबी बहस

दीया मिर्जा के इस स्पष्टीकरण के बाद देश भर में सेलिब्रिटी एक्टिविज़्म और त्योहारों के समय आने वाले बयानों को लेकर एक बार फिर से एक बहुत बड़ी बहस छिड़ गई है। समाज का एक वर्ग जहां यह मानता है कि फिल्मी हस्तियों को जनता के बीच पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का पूरा अधिकार है, वहीं दूसरा वर्ग यह सवाल उठा रहा है कि आखिर क्यों केवल भारतीय पारंपरिक त्योहारों को ही सामाजिक सुधार या पर्यावरण संरक्षण के प्रयोग के रूप में चुना जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि जब कोई सार्वजनिक हस्ती किसी संवेदनशील विषय पर अपनी बात रखती है, तो उसे लोगों की भावनाओं और सांस्कृतिक संदर्भों का भी पूरा सम्मान करना चाहिए, ताकि अनावश्यक ध्रुवीकरण या विवाद की स्थिति पैदा न हो।

पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संतुलन की है जरूरत

आज के इस दौर में जब दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े महानगरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर खतरनाक स्तर तक गिर जाता है, तब पर्यावरण की चिंता करना किसी एक व्यक्ति या वर्ग की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी बन जाती है। लेकिन इसके साथ ही यह भी उतना ही सच है कि हमारी सांस्कृतिक और पारंपरिक आस्थाएं लोगों की भावनाओं से गहराई से जुड़ी होती हैं। यदि जागरूकता के संदेशों को आलोचनात्मक या उपदेशात्मक लहजे के बजाय सकारात्मक और समावेशी तरीके से प्रस्तुत किया जाए, तो इस तरह के विवादों से बचा जा सकता है। दीया मिर्जा के इस स्पष्टीकरण ने भले ही कुछ हद तक स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की है, लेकिन यह वाकया यह जरूर सिखाता है कि आधुनिक समय में जन भावनाओं और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना कितना कठिन और संवेदनशील कार्य है।