वेटिंग है' वेब सीरीज रिव्यू: दिव्येंदु की इस नई सीरीज में रेलवे टिकट घोटाला
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के इस आधुनिक और डिजिटल दौर में दर्शकों के लिए मनोरंजन की कोई कमी नहीं है, क्योंकि हर हफ्ते नए-नए शोज और फिल्में रिलीज होती रहती हैं। अपनी बेहतरीन अदाकारी और दमदार डायलॉग डिलीवरी के लिए घर-घर में अपनी खास पहचान बना चुके लोकप्रिय अभिनेता दिव्येंदु एक बार फिर से एक नए प्रोजेक्ट के साथ दर्शकों के बीच लौटे हैं, जिसका शीर्षक 'वेटिंग है' रखा गया है। इस सीरीज को लेकर रिलीज से पहले ही फैंस के बीच काफी उत्साह और उत्सुकता का माहौल बना हुआ था, क्योंकि दिव्येंदु का नाम जुड़ते ही लोगों की उम्मीदें आसमान छूने लगती हैं। इस सीरीज की कहानी मुख्य रूप से देश के एक बहुत बड़े और आम जनता से जुड़े हुए मुद्दे यानी रेलवे टिकट घोटाले के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें भ्रष्टाचार, राजनीति और रोजमर्रा की जद्दोजहद को दिखाया गया है। सीरीज के निर्माताओं ने इसमें कॉमेडी, ड्रामा और सस्पेंस का एक ऐसा मिश्रण तैयार करने की कोशिश की है जो दर्शकों को स्क्रीन से बांधे रखे। हालांकि, तमाम खूबियों और एक बेहतरीन विषय पर आधारित होने के बावजूद क्या यह सीरीज दर्शकों के दिलों पर अपनी गहरी छाप छोड़ने में कामयाब हो पाई है या फिर यह उम्मीदों के पैमाने पर थोड़ी कमजोर साबित हुई है, आइए इस पूरी समीक्षा के जरिए जानते हैं।
'वेटिंग है' की दिलचस्प कहानी और रेलवे टिकट घोटाले की परतों को खोलती पटकथा
किसी भी वेब सीरीज की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी उसकी मजबूत कहानी और कसी हुई पटकथा में छिपी होती है। 'वेटिंग है' की कहानी हमारे देश की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है जहां आम आदमी को कन्फर्म ट्रेन टिकट पाने के लिए किस हद तक संघर्ष करना पड़ता है और कैसे इसके पीछे एक बहुत बड़ा अवैध कारोबार सक्रिय रहता है। सीरीज की शुरुआत काफी तेज गति से होती है और यह दर्शकों को टिकट खिड़की से लेकर दलालों के काले कारनामों तक की दुनिया में ले जाती है। कहानी के मुख्य किरदार जब इस घोटाले की तह तक जाने की कोशिश करते हैं, तो कई चौकाने वाले खुलासे होते हैं जो दर्शकों की उत्सुकता को बढ़ाने का काम करते हैं। हालांकि, जैसे-जैसे एपिसोड आगे बढ़ते हैं, कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी होने लगती है और पटकथा में कुछ ऐसे झोल नजर आने लगते हैं जो दर्शकों का ध्यान भटका सकते हैं। निर्देशक ने सामाजिक मुद्दे को मनोरंजन के साथ परोसने का प्रयास तो अच्छा किया है, लेकिन कई जगहों पर कहानी का ट्रीटमेंट थोड़ा सतही और अनुमानित प्रतीत होता है, जिससे वह गहराई महसूस नहीं होती जिसकी उम्मीद ऐसे गंभीर विषयों से की जाती है।
दिव्येंदु की दमदार एक्टिंग और बाकी कलाकारों का अभिनय इस सीरीज को कहां तक ले जाता है
अभिनय की बात करें तो मिर्ज़ापुर फेम अभिनेता दिव्येंदु ने एक बार फिर से अपने सहज और प्रभावी अभिनय से स्क्रीन पर जान फूंकने की पूरी कोशिश की है। उनके बोलने का अंदाज और हर परिस्थिति में ढल जाने की कला उनके प्रशंसकों को एक बार फिर से अपनी ओर आकर्षित करती है। सीरीज के अन्य सहायक कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ पूरा न्याय किया है और ग्रामीण व शहरी परिवेश के संतुलन को दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। संवाद अदायगी (Dialogue Delivery) में जहां एक ओर स्थानीय पुट और हास्य का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है, वहीं दूसरी ओर गंभीर दृश्यों में कलाकारों की खामोशी भी असरदार साबित होती है। इसके बावजूद, यदि पूरी स्टार कास्ट के प्रदर्शन को देखा जाए तो वह केवल औसत स्तर से थोड़ा ऊपर ही उठ पाता है क्योंकि लेखन के स्तर पर किरदारों को उतना मजबूत स्पेस नहीं मिल पाया जितना उन्हें मिलना चाहिए था। जब कलाकारों को एक कमजोर या खिंचे हुए नैरेशन के साथ काम करना पड़ता है, तो उनकी बेहतरीन अदाकारी भी पूरी तरह से खुलकर सामने नहीं आ पाती है, और यही बात 'वेटिंग है' के कई दृश्यों में साफ तौर पर महसूस की जा सकती है।
कॉमेडी, सस्पेंस और थ्रिल का मिश्रण: क्या दर्शकों को पसंद आएगी दिव्येंदु की यह सीरीज
आज के दौर में जब दर्शक हॉलीवुड और अंतरराष्ट्रीय स्तर के थ्रिलर्स देखने के आदी हो चुके हैं, तब किसी भी भारतीय सीरीज के लिए कॉमेडी के साथ-साथ सस्पेंस को बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। 'वेटिंग है' में कॉमेडी और सस्पेंस का जो तड़का लगाने का प्रयास किया गया है, वह कुछ पलों के लिए तो दर्शकों का मनोरंजन करता है, लेकिन इसे एक दमदार और यादगार थ्रिलर बनाने में असफल रहता है। सीरीज के पहले कुछ एपिसोड काफी मजेदार और रहस्यमयी लगते हैं, लेकिन मध्य भाग तक आते-आते कहानी अपनी मूल दिशा से थोड़ी भटक जाती है और अनावश्यक दृश्यों की भरमार होने लगती है। रेलवे टिकट घोटाले जैसे संवेदनशील और बड़े विषय पर आधारित होने के बावजूद यह सीरीज उस राजनीतिक और सामाजिक गहराई को छूने से चूक जाती है जो इसे एक कल्ट क्लासिक बना सकती थी। कुल मिलाकर, यदि आप वीकेंड पर समय बिताने के लिए कुछ हल्का-फुल्का और एक नए विषय पर आधारित कंटेंट देखना चाहते हैं, तो आप इसे एक बार देख सकते हैं, लेकिन यदि आप एक कसी हुई और मास्टरपीस सस्पेंस थ्रिलर की तलाश में हैं, तो यह सीरीज शायद आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी न उतर पाए।