'हम नए लोगों का ऑडिशन नहीं लेते', आयुष्मान खुराना को जब करण जौहर ने किया नजरअंदाज, फोन पर मिला था ऐसा जवाब
हिन्दी सिनेमा में अपनी दमदार एक्टिंग और अलग हटकर फिल्में चुनने के लिए पहचाने जाने वाले आयुष्मान खुराना आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर बॉलीवुड में एक खास मुकाम हासिल किया है। आज भले ही बड़े-बड़े निर्माता-निर्देशक उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक रहते हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें इंडस्ट्री में अपने पैर जमाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। उनकी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा काफी चर्चा में रहता है, जब बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर करण जौहर ने उन्हें कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया था और उनके फोन पर एक ऐसा बेरुखा जवाब मिला था, जिसने शुरुआत में उन्हें निराश कर दिया था। यह कहानी सिर्फ एक रिजेक्शन की नहीं है, बल्कि उस जज्बे की है जिसने हार मानने से इंकार कर दिया और आज सफलता की एक नई इबारत लिख दी है।
रेडियो जॉकी से लेकर रोडीज विनर बनने तक का सफर
आयुष्मान खुराना का सफर फिल्मी पर्दे पर अचानक शुरू नहीं हुआ था। दिल्ली से ताल्लुक रखने वाले आयुष्मान को शुरू से ही कला, अभिनय और संगीत का शौक था। पढ़ाई के दौरान उन्होंने थियेटर में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और अपनी कला को निखारा। इसके बाद उन्होंने रेडियो जॉकी (RJ) के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, जहां अपनी बेहतरीन आवाज और बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग के चलते उन्होंने कम समय में ही युवाओं के बीच बड़ी फैन फॉलोइंग बना ली। इसके बाद साल 2004 में उन्होंने एमटीवी के पॉपुलर रियलिटी शो 'रोडीज सीजन 2' में हिस्सा लिया और अपनी स्मार्टनेस और टास्क जीतने की क्षमता के बल पर इस सीजन के विजेता बन गए। इस शो ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई, लेकिन इसके बावजूद बॉलीवुड में एंट्री पाना उनके लिए किसी लोहे के चने चबाने जैसा ही था। टीवी और रेडियो की दुनिया में नाम कमाने के बाद उनका सपना बड़े पर्दे पर छा जाने का था, जिसके लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया और ऑडिशन के कठिन दौर से गुजरना शुरू किया।
जब करण जौहर के ऑफिस से मिला निराशाजनक जवाब
बॉलीवुड में हर उभरते कलाकार का सपना होता है कि वह यशराज फिल्म्स या धर्मा प्रोडक्शंस जैसे बड़े बैनर के साथ काम करे। आयुष्मान खुराना भी इसका अपवाद नहीं थे। अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में उन्होंने इंडस्ट्री के कई बड़े प्रोडक्शन हाउस के चक्कर काटे। इसी कड़ी में उन्होंने करण जौहर की प्रतिष्ठित कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस में काम पाने की कोशिश की। कई रिपोर्ट्स और खुद आयुष्मान द्वारा साझा किए गए संस्मरणों के अनुसार, उन्होंने करण जौहर का नंबर हासिल किया और उनसे मिलने या ऑडिशन देने के लिए संपर्क साधने की कोशिश की। जब उन्होंने करण जौहर से संपर्क किया, तो उन्हें जो जवाब मिला वह बेहद ठंडा और दिल तोड़ने वाला था। कथित तौर पर उन्हें फोन पर यह साफ शब्दों में कह दिया गया था, "हम नए लोगों का ऑडिशन नहीं लेते, हम सिर्फ स्थापित और बड़े स्टार्स के साथ ही काम करते हैं।" इस दो टूक जवाब ने उस समय संघर्ष कर रहे युवा आयुष्मान को भीतर तक हिला दिया था, क्योंकि वे अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए बस एक मौके की तलाश में थे।
करण जौहर के उस रिजेक्शन ने कैसे बदली आयुष्मान की तकदीर
जिंदगी में कई बार असफलताएं और रिजेक्शन ही आपकी असली ताकत बनते हैं। करण जौहर की इस दो टूक ना ने आयुष्मान को टूटने के बजाय अंदर से और मजबूत बना दिया। उन्होंने यह समझ लिया कि जब तक वे खुद को साबित नहीं करेंगे, तब तक बड़े बैनर के दरवाजे उनके लिए नहीं खुलेंगे। इस घटना के बाद उन्होंने शॉर्टकट ढूंढने के बजाय अपनी काबिलियत पर भरोसा करने का फैसला किया। उन्होंने छोटे पर्दे पर बतौर होस्ट कई बड़े शोज़ किए, जहां उनकी एंकरिंग स्किल ने दर्शकों के साथ-साथ इंडस्ट्री के लोगों का भी ध्यान खींचा। आखिरकार, उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें शूजित सरकार की फिल्म 'विक्की डोनर' (2012) में मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला। यह फिल्म एक ऐसे विषय पर आधारित थी जिस पर अमूमन मुख्यधारा की फिल्मों में बात करने से बचा जाता था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और आयुष्मान के अभिनय की हर तरफ सराहना हुई। इस एक फिल्म ने रातों-रात उनकी किस्मत बदल दी और उन्हें इंडस्ट्री का एक नया स्टार बना दिया।
आज के दौर में समीकरण बदले, करण जौहर के साथ भी बने अच्छे रिश्ते
वक्त का पहिया घूमा और आयुष्मान खुराना की सफलता ने पूरी इंडस्ट्री का रुख बदल दिया। 'विक्की डोनर' के बाद उन्होंने 'दम लगा के हइशा', 'अंधाधुन', 'बधाई हो', 'आर्टिकल 15' और 'ड्रीम गर्ल' जैसी एक के बाद एक कई सुपरहिट और कॉन्टेंट-ड्रिवन फिल्में दीं। उनकी फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की, बल्कि क्रिटिक्स की कसौटी पर भी खरी उतरीं। इस बीच, फिल्म इंडस्ट्री में उनका कद इतना ऊंचा हो गया कि जिन करण जौहर ने कभी उन्हें नए होने के नाते ऑडिशन देने से मना कर दिया था, वही करण जौहर आज उनके काम के मुरीद हैं। समय के साथ दोनों के बीच पेशेवर और व्यक्तिगत संबंध बेहद मधुर हो गए हैं। कई मौकों पर करण जौहर को आयुष्मान खुराना की फिल्मों और उनकी चॉइस की तारीफ करते हुए देखा गया है। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि बॉलीवुड में पैतृक पृष्ठभूमि या शुरुआती रिजेक्शन से ज्यादा मायने आपकी प्रतिभा और निरंतरता रखती है।
स्ट्रगल करने वाले युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है आयुष्मान की यह कहानी
आयुष्मान खुराना का यह सफर आज के उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी सीख और प्रेरणा है जो ग्लैमर की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने आते हैं। अक्सर शुरुआती दौर में मिलने वाले झटके और ना सुनने की आदत इंसान को अंदर से तोड़ देती है, लेकिन आयुष्मान ने साबित कर दिया कि अगर आपके अंदर टैलेंट है और आप अपनी मेहनत पर अडिग हैं, तो सफलता देर से ही सही, लेकिन आपके कदम जरूर चूमेगी। आज आयुष्मान सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा में कंटेंट सिनेमा के पर्याय बन चुके हैं। करण जौहर द्वारा नजरअंदाज किए जाने से लेकर आज इंडस्ट्री के ए-लिस्ट सितारों में शुमार होने तक की उनकी यह दास्तान यह सिखाती है कि रिजेक्शन को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी सफलता की सीढ़ी कैसे बनाया जाता है।