जब कादर खान के लिखे डायलॉग सुन चीख पड़ा था ये डायरेक्टर, गिफ्ट में दे दी घर की टीवी, सोने का ब्रेसलेट

जब कादर खान के लिखे डायलॉग सुन चीख पड़ा था ये डायरेक्टर, गिफ्ट में दे दी घर की टीवी, सोने का ब्रेसलेट

बॉलीवुड के इतिहास में जब भी सबसे बेहतरीन संवादों (Dialogues) और स्क्रीनप्ले की बात होती है, तो कादर खान का नाम सबसे पहली पंक्ति में आता है। कादर खान न सिर्फ एक मंजे हुए अभिनेता थे, बल्कि एक ऐसे कमाल के लेखक भी थे जिनकी कलम से निकले शब्द सिनेमाघरों में तालियों और सीटियों की बारिश करवा देते थे। 70 और 80 के दशक में कादर खान के लिखे डायलॉग्स का ऐसा जलवा था कि बड़े-बड़े फिल्म निर्देशक और निर्माता उनके काम के कायल हो जाते थे। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशक मनमोहन देसाई और कादर खान से जुड़ा हुआ है, जब एक फिल्म के डायलॉग सुनकर मनमोहन देसाई इतने खुश हो गए थे कि उन्होंने अपने घर में लगी नई टीवी और हाथ में पहना सोने का ब्रेसलेट तक कादर खान को गिफ्ट में दे दिया था।

रोटी फिल्म के सेट पर शुरू हुई थी कादर खान की लेखनी का दौर

यह वाकया 1970 के दशक का है जब मशहूर निर्देशक मनमोहन देसाई फिल्म 'रोटी' (1974) पर काम कर रहे थे। इस फिल्म में राजेश खन्ना और मुमताज मुख्य भूमिका में थे। उस समय कादर खान थिएटर और नाटकों में काफी सक्रिय थे और उन्होंने फिल्म 'जवानी दीवानी' के लिए कुछ संवाद लिखे थे, जो मनमोहन देसाई को काफी पसंद आए थे। इसके बाद मनमोहन देसाई ने कादर खान को अपनी बहुचर्चित फिल्म 'रोटी' के संवाद लिखने की जिम्मेदारी सौंपी। हालांकि, मनमोहन देसाई अपने सख्त मिजाज और काम में परफेक्शन के लिए जाने जाते थे, इसलिए वे किसी भी लेखक का काम आसानी से पास नहीं करते थे।

डायलॉग्स सुनते ही खुशी से उछल पड़े मनमोहन देसाई

जब कादर खान फिल्म 'रोटी' का क्लाइमेक्स और उसके दमदार डायलॉग लिखकर मनमोहन देसाई के पास पहुंचे, तो माहौल में थोड़ा तनाव था। मनमोहन देसाई ने कादर खान से कहा कि वे उन्हें खुद पढ़कर डायलॉग्स सुनाएं। कादर खान ने जैसे ही अपनी प्रभावशाली आवाज में फिल्म के मुख्य दृश्यों के संवाद बोलना शुरू किए, मनमोहन देसाई का चेहरा बदल गया। कादर खान के हर एक शब्द में ऐसा दम और भावनात्मक खिंचाव था कि मनमोहन देसाई अपनी जगह से उठ खड़े हुए और खुशी के मारे चीख पड़े। उन्होंने कादर खान को गले लगा लिया और कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इतने जबरदस्त और असरदार डायलॉग्स पहले कभी नहीं सुने थे।

गिफ्ट में दे दिया घर का नया पोर्टेबल टीवी और सोने का ब्रेसलेट

मनमोहन देसाई कादर खान के काम से इतने ज्यादा प्रभावित और भावुक हो गए कि वे तुरंत उन्हें इनाम देना चाहते थे। उस दौर में पोर्टेबल टीवी मिलना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी और मनमोहन देसाई के पास एक नया टीवी आया ही था। उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपने घर में रखा वह पोर्टेबल टीवी उठवाया और कादर खान की गाड़ी में रखवा दिया। इतना ही नहीं, मनमोहन देसाई ने अपने हाथ में पहना हुआ कीमती सोने का ब्रेसलेट भी उतारा और कादर खान की कलाई पर बांध दिया। इसके साथ ही उन्होंने कादर खान की फीस में भी तुरंत भारी बढ़ोतरी कर दी और वादा किया कि आगे से वे अपनी हर फिल्म के डायलॉग्स केवल कादर खान से ही लिखवाएंगे।

मनमोहन देसाई और कादर खान की आइकॉनिक जोड़ी

फिल्म 'रोटी' की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद मनमोहन देसाई और कादर खान की जोड़ी ने बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। 'अमर अकबर एंथनी', 'धर्मवीर', 'कुली', 'सुहाग', 'नसीब' और 'गंगा जमुना सरस्वती' जैसी ऑल-टाइम सुपरहिट फिल्मों के संवाद कादर खान ने ही लिखे थे। कादर खान के लिखे शब्दों ने अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना और विनोद खन्ना जैसे सुपरस्टार्स के किरदारों को अमर बना दिया। मनमोहन देसाई हमेशा कहते थे कि कादर खान की कलम में वो जादू है जो दर्शक के दिल को सीधे छू लेता है।

हिंदी सिनेमा में कादर खान का अद्वितीय योगदान

कादर खान केवल एक कॉमेडी किंग या बेहतरीन विलेन ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय सिनेमा के एक बहुत बड़े स्तंभ थे। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और 250 से ज्यादा फिल्मों के लिए डायलॉग्स और कहानियां लिखीं। अमिताभ बच्चन के 'एंग्री यंग मैन' वाले दौर को गढ़ने में कादर खान के लिखे संवादों का सबसे बड़ा योगदान रहा। मनमोहन देसाई के साथ कादर खान का यह किस्सा आज भी बॉलीवुड की गलियारों में बहुत चाव से सुनाया जाता है, जो यह साबित करता है कि असली प्रतिभा की कद्र करने में उस दौर के फिल्ममेकर्स कभी पीछे नहीं हटते थे।