2050 तक 84 करोड़ लोग कमर दर्द से होंगे परेशान, लांसेट और WHO की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा!
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, सिटिंग जॉब्स और बिगड़ी हुई जीवनशैली के कारण कमर दर्द (Back Pain) एक बेहद आम समस्या बन चुका है। लेकिन भविष्य में यह समस्या एक बड़े वैश्विक स्वास्थ्य संकट का रूप लेने वाली है। चिकित्सा जगत की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका 'द लांसेट रूमेटोलॉजी' में प्रकाशित एक व्यापक ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) स्टडी और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 2050 तक दुनिया भर में करीब 84.3 करोड़ (843 मिलियन) लोग कमर के निचले हिस्से के दर्द (Low Back Pain) से जूझ रहे होंगे। यह आंकड़ा आज के मुकाबले लगभग 40 फीसदी की भारी बढ़ोतरी को दर्शाता है।
2020 में 62 करोड़ के करीब थे मरीज, अब संकट बड़ा
सिडनी विश्वविद्यालय (University of Sydney) के शोधकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों ने पिछले 30 वर्षों (1990 से 2020) के हेल्थ डेटा का गहराई से विश्लेषण किया है। इस अध्ययन से पता चला है कि साल 2017 में ही दुनिया भर में कमर दर्द से पीड़ित लोगों की संख्या 50 करोड़ को पार कर गई थी। वहीं साल 2020 में यह आंकड़ा 61.9 करोड़ (619 मिलियन) दर्ज किया गया था। अब जिस तेजी से यह ग्राफ आगे बढ़ रहा है, उससे हेल्थ सिस्टम और अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव बढ़ने की आशंका है।
आखिर क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं कमर दर्द के मामले?
रिसर्चर्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कमर दर्द के मामलों में होने वाले इस भारी उछाल के लिए मुख्य रूप से दो बड़े कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:
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बढ़ती जनसंख्या (Population Expansion): वैश्विक स्तर पर आबादी का तेजी से बढ़ना।
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बुजुर्ग आबादी में वृद्धि (Ageing Populations): लोगों की औसत उम्र बढ़ने के कारण वृद्धों की संख्या बढ़ रही है, और यह समस्या बुजुर्गों में सबसे ज्यादा देखी जाती है।
रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि कमर दर्द से जुड़े अक्षमता (Disability) के मामलों में सबसे ज्यादा उछाल एशिया और अफ्रीका के देशों में देखने को मिलेगा।
कामकाज, मोटापा और धूम्रपान हैं 3 बड़े विलेन
अध्ययन में पाया गया है कि कुल मरीजों में से कम से कम एक-तिहाई (One-Third) मामलों के लिए हमारी खराब आदतें और काम करने का तरीका जिम्मेदार होता है। इनमें 3 मुख्य रिस्क फैक्टर्स सामने आए हैं:
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व्यावसायिक कारक (Occupational Factors): दफ्तरों में घंटों एक ही पोजिशन में बैठकर (Sedentary Lifestyle) काम करना या गलत तरीके से भारी वजन उठाना।
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मोटापा (Overweight): शरीर का वजन ज्यादा होने से रीढ़ की हड्डी और कमर की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
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धूम्रपान (Smoking): स्मोकिंग करने से रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क तक खून का बहाव प्रभावित होता है, जिससे डिस्क जल्दी खराब होती हैं।
महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा
भ्रम हुआ दूर: आमतौर पर लोगों के बीच यह गलत धारणा बनी हुई है कि कमर दर्द की समस्या केवल कामकाजी उम्र के युवाओं या वयस्कों को परेशान करती है। लेकिन इस वैश्विक अध्ययन ने पुष्टि की है कि कमर का दर्द बुजुर्गों में अधिक आम है। इसके अलावा, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में कमर दर्द के मामले काफी ज्यादा दर्ज किए जाते हैं।
WHO की चेतावनी: इलाज के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य ग्लोबल एलायंस के विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया भर में वर्तमान में कमर दर्द के इलाज को लेकर कोई एक राष्ट्रीय या ठोस दृष्टिकोण (Consistent Approach) नहीं है। कई बार मरीजों को बिना जरूरत के भारी पेनकिलर (जैसे ओपिओइड्स) या सर्जरी की सलाह दे दी जाती है, जो नुकसानदेह हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कमर दर्द दुनिया में शारीरिक अक्षमता (Disability) का इकलौता सबसे बड़ा कारण है। इससे बचने के लिए सरकारों को फिजियोथेरेपी, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और योग जैसी प्राथमिक चिकित्सा व रोकथाम रणनीतियों पर जोर देना होगा, ताकि 2050 तक आने वाले इस बड़े संकट को समय रहते टाला जा सके।