खाना पचेगा इतनी तेजी से कि भूल जाएंगे एसिडिटी और ब्लोटिंग की समस्या
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खान-पान, समय पर भोजन न करना और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत ने आज के समय में अधिकांश लोगों को पेट से जुड़ी समस्याओं का शिकार बना दिया है। सुबह उठते ही पेट साफ न होना, खाना खाने के तुरंत बाद सीने में जलन होना, पेट में गैस बनना, ब्लोटिंग (Bloating) महसूस होना और भारीपन रहना आम बात बन चुकी है। लोग इन छोटी-छोटी समस्याओं से राहत पाने के लिए तरह-तरह की अंग्रेजी दवाइयों और एंटासिड का सहारा लेते हैं, जो कुछ समय के लिए तो राहत देती हैं लेकिन अंदरूनी रूप से शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं। ऐसे में आयुर्वेद और योग विज्ञान का सहारा लेना सबसे बेहतरीन और स्थायी उपाय माना गया है। योगगुरुओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नियमित रूप से कुछ विशेष योगासन अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिए जाएं, तो पाचन तंत्र (Digestive System) इतना मजबूत हो जाता है कि खाया हुआ अन्न पानी की तरह आसानी से पच जाता है और पेट से जुड़ी तमाम बीमारियां कोसों दूर रहती हैं।
वज्रासन (Vajrasana): भोजन के बाद किया जाने वाला एकमात्र ऐसा योगासन जो पाचन शक्ति को तुरंत करता है दोगुना
पाचन क्रिया को दुरुस्त करने वाले योगासन में सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नाम वज्रासन (Vajrasana) का आता है। यह एक ऐसा आसन है जिसे आप खाना खाने के तुरंत बाद भी कर सकते हैं, बल्कि यह खाना खाने के बाद करने के लिए ही बना है। वज्रासन करने की विधि बेहद सरल है; इसके लिए आप अपने दोनों घुटनों को मोड़कर जमीन पर बैठ जाएं और अपने कूल्हों को एड़ियों पर टिका लें। अपनी रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें और दोनों हथेलियों को अपने घुटनों पर सहजता से रख लें। इस मुद्रा में कम से कम 5 से 10 मिनट तक गहरी सांस लेते हुए बैठें। जब आप वज्रासन में बैठते हैं, तो शरीर के निचले हिस्से यानी पैरों और जांघों की ओर रक्त संचार कम हो जाता है और पेट के अंगों (Digestive Organs) की तरफ ब्लड सर्कुलेशन तेजी से बढ़ जाता है। इससे अग्नाशय, आंतों और पेट की कार्यक्षमता में जबरदस्त सुधार होता है, भोजन जल्दी पचता है, और गैस तथा एसिडिटी की समस्या कभी नहीं होती है।
पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana) और भुजंगासन (Bhujangasana): पेट की गैस बाहर निकालने और मेटाबॉलिज्म सुधारने के अचूक उपाय
वज्रासन के अलावा दो और ऐसे आसन हैं जो पेट की सेहत के लिए रामबाण माने जाते हैं: पवनमुक्तासन और भुजंगासन। पवनमुक्तासन करने के लिए पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं, गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों घुटनों को मोड़कर छाती की तरफ लाएं और हाथों से घुटनों को कसकर पकड़ लें। इसके बाद सिर को उठाकर अपनी नाक को घुटनों से लगाने का प्रयास करें। यह आसन पेट में फंसी हुई जिद्दी गैस (Trapped Gas) को तुरंत बाहर निकालने का काम करता है और कब्ज की पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करता है। वहीं, पेट के बल लेटकर किए जाने वाले भुजंगासन (कोबरा पोज) से पेट की मांसपेशियों पर हल्का खिंचाव पड़ता है, जिससे लीवर, आंतों और किडनी की कार्यप्रणाली उत्तेजित होती है। भुजंगासन करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) तेज होता है, जिससे खाया हुआ भोजन ऊर्जा में तेजी से परिवर्तित होता है और चर्बी भी नियंत्रित रहती है।
पश्चिमोत्तासन (Paschimottanasana) और योग जीवनशैली अपनाकर हमेशा के लिए कहें पेट की बीमारियों को अलविदा
पाचन तंत्र को पूर्ण रूप से स्वस्थ और मजबूत बनाने की इस श्रृंखला में चौथा महत्वपूर्ण आसन पश्चिमोत्तासन है। जमीन पर पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाकर बैठें, गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें और अपने हाथों से पैरों के पंजों को पकड़ने का प्रयास करें। यह आसन पेट के आंतरिक अंगों की गहरी मालिश करता है, आंतों में जमी गंदगी को साफ करता है और भूख न लगने की समस्या को दूर करता है। इन चारों आसनों को अपनी सुबह की दिनचर्या में केवल 15 से 20 मिनट का समय देकर आप अपने पाचन तंत्र को लोहे जैसा मजबूत बना सकते हैं। इसके साथ ही, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं, तली-भुनी और मैदे से बनी चीजों से परहेज करें, और भोजन को हमेशा चबा-चबाकर खाएं। इन छोटी-छोटी जीवनशैली की आदतों और योग को अपनाकर आप बिना किसी दवा के हमेशा के लिए गैस, कब्ज और एसिडिटी से मुक्ति पा सकते हैं।