भारत-वेस्टइंडीज मैच से पहले टिकटों की अवैध कालाबाजारी का काला खेल बेनकाब

भारत-वेस्टइंडीज मैच से पहले टिकटों की अवैध कालाबाजारी का काला खेल बेनकाब

खेल जगत, क्रिकेट प्रेमियों और सुरक्षा एजेंसियों के गलियारों से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली, शर्मनाक और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले आगामी हाई-वोल्टेज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले को लेकर देश भर के फैंस में गजब का उत्साह देखा जा रहा है, लेकिन इसी उत्साह और दीवानगी का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्वों और खेल संघों के भ्रष्ट लोगों ने टिकटों की कालाबाजारी का एक बहुत बड़ा अवैध कारोबार शुरू कर दिया है। मैच के आधिकारिक टिकट कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन बिक जाने के कारण स्टेडियम में बैठकर मुकाबला देखने की चाह रखने वाले आम और मासूम क्रिकेट प्रेमियों की मजबूरी का फायदा उठाकर इन मुनाफाखोरों ने महंगे दामों पर टिकट बेचने का जाल फैला रखा था। स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब पुलिस और विशेष कार्य बल की संयुक्त कार्रवाई में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि क्रिकेट एसोसिएशन के भीतर बैठे जिम्मेदार लोग ही इस अवैध रैकेट के मुख्य सूत्रधार निकले हैं, जिससे पूरे खेल प्रशासन की साख पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

# मुफ्त मिलने वाले वीआईपी पास और कॉम्प्लिमेंट्री टिकटों का कैसे किया जा रहा था अवैध सौदा?

जांच एजेंसियों द्वारा किए गए खुलासे के अनुसार, इस पूरी कालाबाजारी का सबसे बड़ा खेल कॉम्प्लिमेंट्री पास और वीआईपी टिकटों के जरिए खेला जा रहा था। मैच के आयोजन से जुड़े विभिन्न संगठनों, प्रायोजकों और क्रिकेट संघों के पदाधिकारियों को मुफ्त में मिलने वाले इन पासों का इस्तेमाल खेल को बढ़ावा देने और गणमान्य अतिथियों के लिए किया जाना चाहिए था, लेकिन लालच में अंधे हो चुके कुछ लोगों ने इन्हें अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना लिया। आधिकारिक तौर पर जिनकी कोई कीमत नहीं होती थी, उन फ्री पासों को दलालों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जरूरतमंद और बेबस क्रिकेट प्रशंसकों को 4,000 से लेकर 6,000 रुपये तक की भारी-भरकम कीमतों पर बेचा जा रहा था। जब साधारण दर्शक घंटों तक ऑनलाइन लाइनों में खड़े रहने के बावजूद टिकट पाने से वंचित रह जाते थे, तब यही काले बाजार के सौदागर उन्हीं पासों को कई गुना अधिक दामों पर बेचकर आम जनता की जेब पर जमकर डाका डाल रहे थे। इस गैरकानूनी धंधे से न केवल खेल भावना को ठेस पहुंच रही थी, बल्कि टैक्स चोरी करते हुए काला धन कमाने का एक बड़ा साम्राज्य भी खड़ा किया जा रहा था।

# पुलिस और टास्क फोर्स की रेड: हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन के सदस्य की संलिप्तता से खेल महकमे में भूचाल

इस पूरे मामले की गुप्त सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और एंटी-ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सेल ने एक बेहद गोपनीय और छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस ने शहर के अलग-अलग इलाकों में औचक निरीक्षण और स्टिंग ऑपरेशन चलाकर इस संगठित रैकेट का पूरी तरह से पर्दाफाश कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि इस अवैध टिकट बिक्री के इस गोरखधंधे में सीधे तौर पर हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन (HCA) के एक सक्रिय सदस्य की संलिप्तता पाई गई, जिसे पुलिस ने अन्य तीन शातिर सहयोगियों के साथ धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों के पास से भारी मात्रा में मैच के वीआईपी पास, अवैध नकदी, कई आधुनिक मोबाइल फोन और डिजिटल ट्रांजैक्शन के पुख्ता सबूत बरामद किए गए हैं। जब पुलिस ने इन आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की, तो कई बड़े और रसूखदार लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जो इस काले कारोबार के पीछे पर्दे के पीछे रहकर संरक्षण दे रहे थे। एचसीए के किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की घिनौनी हरकत किए जाने के बाद से खेल प्रेमियों और प्रशासनिक हलकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

# क्रिकेट प्रेमियों में भारी गुस्सा और खेल बोर्ड की साख पर लगा बड़ा दाग, सख्त कार्रवाई की मांग तेज

इस सनसनीखेज गिरफ्तारी के बाद से देश भर के खेल प्रेमियों में जबरदस्त गुस्सा है और सोशल मीडिया पर लोग इन भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों के खिलाफ सबसे कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। क्रिकेट को देश में धर्म की तरह माना जाता है और जब मैदान पर देश के लिए खिलाड़ी अपना सब कुछ झोंककर पसीना बहा रहे होते हैं, तब कुछ अवसरवादी लोग इस पवित्र खेल के नाम पर अपनी तिजोरी भरने में लगे रहते हैं। खेल प्रशंसकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल होती है और सच्चे प्रशंसकों का खेल से धीरे-धीरे भरोसा उठने लगता है। विशेषज्ञों और खेल जानकारों का मानना है कि इस तरह के अवैध सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए खेल बोर्डों और राज्य संघों को अपनी टिकट वितरण प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल बनाना होगा, ताकि कोई भी बिचौलिया या पदाधिकारी इस प्रकार की धोखाधड़ी को अंजाम न दे सके। पुलिस अब इस मामले के तार दूर-दूर तक जुड़े होने की आशंका के चलते अपनी जांच का दायरा और अधिक बढ़ा रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े हर एक दोषी को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।