हेल्दी फूड्स देखते ही मुंह बना लेता है आपका दिमाग, इन 6 साइकोलॉजिकल ट्रिक्स से माइंड को करें क्रेजी
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को फिट और हेल्दी रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। सेहतमंद रहने के लिए सबसे पहला कदम होता है जंक, ऑयली और अनहेल्दी फूड्स को छोड़कर पौष्टिक आहार को अपनी डाइट में शामिल करना। लेकिन समस्या यह है कि जब भी हम हेल्दी डाइट पर जाने की सोचते हैं, हमारा दिमाग हमें मीठा, तला-भुना या चटपटा खाने के लिए उकसाने लगता है। कई बार हम भारी मन से खुद को रोक तो लेते हैं, लेकिन दिमाग में उस अनहेल्दी फूड की क्रेविंग लगातार बनी रहती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रिसर्च के मुताबिक, असल में हेल्दी फूड्स खाने के लिए पेट से ज्यादा हमारे दिमाग को राजी करने की जरूरत होती है। फूड साइकोलॉजी पर हुई कई रिसर्च बताती हैं कि ब्राइट कलर्स और रंग-बिरंगी पैकेजिंग अक्सर हमारा ध्यान खींचती हैं, जिससे अनहेल्दी स्नैक्स ज्यादा लजीज नजर आते हैं। अगर हम इसी विजुअल ट्रिक को थोड़े बदलाव के साथ अपने घर के हेल्दी फूड्स पर लागू कर दें, तो हमारा माइंड खुद-ब-खुद पौष्टिक चीजें खाने के लिए इंस्पायर हो जाएगा। आइए जानते हैं रिपोर्टर अपराजिता की इस खास रिपोर्ट में वो बेहतरीन दिमागी ट्रिक्स, जो बिना किसी नखरे के आपको लो-कैलोरी और न्यूट्रिशियस डाइट खाने पर मजबूर कर देंगी।
पारदर्शी बर्तनों का जादू: हेल्दी स्नैक्स को रखें सामने और अनहेल्दी को छुपाएं
फूड साइकोलॉजी की पहली और सबसे असरदार ट्रिक है 'जो दिखता है, वही बिकता है'। अपने घर में रखे नट्स, मखाने, ड्राई फ्रूट्स, ताजे फल या किसी भी अन्य हेल्दी फूड को हमेशा ट्रांसपैरेंट (पारदर्शी) और खूबसूरत कांच के कंटेनर या डिब्बों में भरकर डाइनिंग टेबल या ऐसी जगह पर रखें जहां आपकी नजर बार-बार जाती हो। इसके ठीक उलट, घर में मौजूद बिस्किट, भुजिया, चिप्स या अन्य अनहेल्दी स्नैक्स को किसी ऐसे ओपेक (अपारदर्शी) या गहरे रंग के डिब्बे में बंद करके किचन के सबसे ऊपरी रैक में छुपा दें, जो बाहर से बिल्कुल दिखाई न दें। जब अनहेल्दी चीजें आंखों के सामने नहीं होंगी, तो उनकी क्रेविंग भी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।
प्लेट को शेफ स्टाइल में सजाएं: आंखों को भाएगा तो पेट को भी सुहाएगा
हम किसी भी भोजन को सबसे पहले अपनी आंखों से देखते हैं और उसके बाद मुंह से चखते हैं। जब खाना दिखने में आकर्षक और सुंदर लगता है, तो उसे खाने के प्रति हमारा इंटरेस्ट और इच्छा कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए अपने रोजमर्रा के सादे और सिंपल हेल्दी फूड को भी प्लेट में बेहद खूबसूरती और क्रिएटिविटी के साथ सर्व करें। प्लेटिंग करते समय रंग-बिरंगी सब्जियों (जैसे लाल-पीली शिमला मिर्च, गाजर, चुकंदर) के बेहतरीन कलर कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करें। जब आपकी सलाद और स्प्राउट्स से भरी प्लेट किसी फाइव स्टार होटल की तरह सजी होगी, तो आपका मन उसे खुशी-खुशी खाने को करेगा और आपको भोजन से पूरी संतुष्टि मिलेगी।
कैलोरी नहीं वॉल्यूम बढ़ाएं: पेट भी भरेगा और वजन भी रहेगा कंट्रोल
अक्सर लोग वजन घटाने या हेल्दी रहने के चक्कर में बहुत कम मात्रा में खाना शुरू कर देते हैं, जिससे थोड़ी देर बाद दोबारा भूख लग जाती है। इस समस्या से बचने के लिए अपनी खाने की प्लेट में कैलोरी बढ़ाने की बजाय भोजन का वॉल्यूम (मात्रा) बढ़ाएं। वॉल्यूम बढ़ाने का मतलब है कि ऐसी चीजें खाएं जिससे आपकी प्लेट पूरी भरी हुई नजर आए और आपका पेट भी पूरी तरह भर जाए, लेकिन आपके शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरी न जाए। इसके लिए अपनी थाली में हरी सब्जियां, खीरा, टमाटर का सलाद, सूप और मौसमी फलों की मात्रा बढ़ा दें। इससे आप बिना भूखे रहे ओवरईटिंग से बच जाएंगे।
भारी बर्तनों का कमाल: हैवी बाउल और प्लेट्स रोकेंगी ओवरईटिंग की आदत
क्या आप जानते हैं कि आप जिस बर्तन में खाना खा रहे हैं, उसका वजन भी आपकी भूख और संतुष्टि को प्रभावित करता है? विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों और रिसर्च के मुताबिक, हमारे प्लेट और बाउल (कटोरे) का वजन सीधे तौर पर खाने के बाद मिलने वाली मानसिक संतुष्टि को बढ़ाता है। जब हम किसी भारी वजन वाले बाउल या प्लेट में खाना खाते हैं, तो हमारे मस्तिष्क को यह संकेत मिलता है कि हम काफी अच्छी मात्रा में भोजन कर रहे हैं। इससे खाने के बाद पेट भरे होने का अहसास ज्यादा होता है, जिससे आप जरूरत से ज्यादा खाने (ओवरईटिंग) से बच जाते हैं और आपका पोर्शन कंट्रोल बेहद आसानी से हो जाता है।
स्लो म्यूजिक के साथ हर बाइट का लें मजा: धीरे-धीरे चबाकर खाने से घटती है कैलोरी
डिनर या लंच करते समय माहौल को शांत और खुशनुमा बनाना बेहद जरूरी है। स्टडीज से यह साबित हो चुका है कि जब आप बैकग्राउंड में हल्का और धीमा (स्लो) म्यूजिक चलाकर खाना खाते हैं, तो आपकी खाने की रफ्तार अपने आप धीमी हो जाती है। खाना धीरे-धीरे चबाकर खाने का सीधा संबंध कम कैलोरी का उपभोग करने से है। जब आप शांत मन से बिना टीवी या फोन स्क्रीन देखे हर बाइट को अच्छी तरह से चबाकर और एंज्वॉय करके खाते हैं, तो आपका पाचन तंत्र भी मजबूत होता है और आपका दिमाग सही समय पर पेट भरने का सिग्नल दे देता है।
स्मार्ट शॉपिंग का फॉर्मूला: सुपरमार्केट में आई-लेवल (Eye-Level) के जाल से बचें
जब भी आप किसी ग्रोसरी स्टोर या सुपरमार्केट में शॉपिंग के लिए जाते हैं, तो अनजाने में आप उन चीजों को ज्यादा उठाते हैं जो रैक्स में ठीक आपकी आंखों के सामने (आई-लेवल पर) रखी होती हैं। मार्केटिंग कंपनियां जानबूझकर अपने महंगे और अनहेल्दी स्नैक्स, चॉकलेट या प्रोसेस्ड फूड्स को इसी आई-लेवल पर सजाती हैं। इस जाल से बचने के लिए शॉपिंग करते समय केवल सामने न देखें, बल्कि रैक्स के सबसे ऊपर और सबसे नीचे वाले हिस्सों को भी अच्छी तरह चेक करें। नीचे और ऊपर के रैक्स में न केवल आपको बेहतरीन और ऑर्गेनिक हेल्दी ऑप्शंस मिलेंगे, बल्कि कई बार वहां बजट-फ्रेंडली यानी सस्ते फूड आइटम्स भी मिल जाते हैं।