दीपावली पर रांची में पैर रखने की जगह नहीं! 10 रुपये की इस चीज के लिए उमड़ी पागलों जैसी भीड़

दीपावली पर रांची में पैर रखने की जगह नहीं! 10 रुपये की इस चीज के लिए उमड़ी पागलों जैसी भीड़

दीपावली के पावन पर्व पर राजधानी रांची के प्रमुख बाजारों में सुबह की पहली किरण के साथ ही जबर्दस्त रौनक देखने को मिल रही है। धन-धान्य की देवी मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए शहरवासी पूजन सामग्री से लेकर सजावटी सामानों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। कोकर, लालपुर, डोरंडा, बूटी मोड़, अपर बाजार और कचहरी मंडी में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। इस बार मां लक्ष्मी को अर्पित की जाने वाली नई धान की बाली, ताजे कमल और गेंदे के फूलों की मांग सबसे तेज बनी हुई है।

धार्मिक मान्यता है कि नई फसल की बाली घर में समृद्धि और खुशहाली लाती है, जिसे देखते हुए मंडियों में धान की छोटी गड्डियां 10 से 25 रुपये में खूब बिकीं। वहीं लक्ष्मी पूजन के लिए खास माना जाने वाला कमल का फूल 10 से 20 रुपये प्रति पीस बिका। पूजा पंडालों और मुख्य द्वार पर लगने वाले केले के थंब की जोड़ियां आकार के आधार पर 150 से 300 रुपये और बड़े थंब 400 से 500 रुपये तक के भाव में बिकीं। सजावट के लिए गेंदा फूल 80 से 170 रुपये प्रति किलो, मालाएं 20 से 40 रुपये और बड़ी लड़ियां 600 से 800 रुपये तक में बिक रही हैं।

रोशनी के इस उत्सव में फैंसी लाइटों और झालरों का भी भारी क्रेज दिख रहा है। डेली मार्केट के व्यापारियों के अनुसार बजट-फ्रेंडली होने की वजह से ग्राहकों का झुकाव चाइनीज और डिजाइनर लाइटों की ओर ज्यादा है, जो 50 रुपये से लेकर 4500 रुपये तक की रेंज में मौजूद हैं। घरों और दुकानों को जगमगाने के लिए लोग सुबह से ही डिजाइनर झूमर और एलईडी झालरें खरीद रहे हैं।

आधुनिक सजावट के बीच पारंपरिक मिट्टी के दीयों का आकर्षण भी बरकरार है। हरमू, लालपुर, बरियातू, डोरंडा और अरगोड़ा समेत शहर के हर प्रमुख चौराहे पर कुम्हारों की दुकानें सजी हैं। सामान्य मिट्टी के दीये जहां 1.50 से 2 रुपये प्रति पीस बिक रहे हैं, वहीं फ्लोटिंग, मोम और डिजाइनर दीयों की नई किस्में भी लोगों को खूब भा रही हैं। इसके अलावा झारखंड की पुरानी परंपरा के तहत स्थानीय लोग दीपोत्सव के लिए करंज का तेल भी खूब खरीद रहे हैं, जो बाजार में करीब 200 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।