सालाना 6 लाख से ज्यादा कमाई, फिर भी उठा रहे थे फ्री राशन; 6500 से अधिक रईसों पर सरकार का चाबुक
रांची शहर में सरकारी राशन व्यवस्था को लेकर तफ्तीश के बाद बड़ा मामला उजागर हुआ है। विभागीय सत्यापन में 6556 ऐसे परिवारों की पहचान हुई है जिनके सदस्यों की सालाना आय छह लाख रुपये से ज्यादा दर्ज है। इसके बावजूद ये परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली से मिलने वाले अनाज का फायदा उठा रहे थे।
इन परिवारों के लिए अब सरकारी मदद की रकम वापस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग का कहना है कि पात्रता की सीमा से अधिक आय होने के बाद भी राशन योजना का लाभ लेना नियमों के विरुद्ध है।
आय के आंकड़ों से सामने आई गड़बड़ी
जिला आपूर्ति विभाग ने केंद्र सरकार से मिली जानकारी के आधार पर राशन कार्ड से जुड़े आंकड़ों की जांच की। इस दौरान परफॉर्मेंस इंडिकेटर यानी KPI डाटा और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से जुड़े आय रिकॉर्ड का मिलान किया गया।
जांच में 6556 परिवार ऐसे मिले जिनकी आय छह लाख रुपये सालाना से अधिक थी। इसके बाद इन राशन कार्डधारियों के मामले में कार्रवाई शुरू की गई। विभाग ने इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पात्रता शर्तों का उल्लंघन माना है।
वर्ष 2015 से योजना का लाभ लेने का दावा
महकमे के मुताबिक संबंधित परिवार वर्ष 2015 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मिलने वाले खाद्यान्न का इस्तेमाल कर रहे थे। यानी लंबे समय तक इन परिवारों को सरकारी अनाज मिलता रहा।
अफसरों के अनुसार पात्रता नहीं होने के बावजूद योजना का लाभ लेना या गलत जानकारी के आधार पर राशन प्राप्त करना झारखंड लक्षित जन वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2024 की धारा 7 के प्रावधानों के विपरीत है।
15 दिन में जवाब और राशि जमा करने का निर्देश
जिला आपूर्ति शाखा ने संबंधित परिवारों को नोटिस भेजकर 15 दिनों के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा है। साथ ही नोटिस में सरकारी राशन के बदले निर्धारित जुर्माने की रकम जमा करने का निर्देश दिया गया है।
अगर तय समय के भीतर जवाब नहीं दिया गया या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला तो विभाग प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई कर सकता है।
बाजार भाव से होगी वसूली, ब्याज भी लग सकता है
प्रशासन की कार्रवाई केवल राशन कार्ड की जांच तक सीमित नहीं है। अब तक जितना सरकारी अनाज लिया गया है उसकी कीमत बाजार दर के आधार पर वसूल की जाएगी। इसके अलावा वसूली की रकम पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य अपात्र लोगों से सरकारी राशन की राशि वापस लेना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाना है।