इस बीमारी ने बढ़ाई चिंता; झारखंड में सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश, अस्पतालों में बढ़ी निगरानी
देश के कई हिस्सों में फ्लू संक्रमण के मामलों में आई तेजी के बाद अब आम नागरिकों की सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। मौसम में बदलाव के साथ ही इन्फ्लूएंजा वायरस का जोखिम गहराने लगा है। इस बदलते परिवेश में झारखंड सरकार ने समय रहते रोकथाम के लिए सुरक्षा चक्र तैयार करना शुरू कर दिया है ताकि संक्रमण को शुरुआती दौर में ही रोका जा सके।
संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासनिक सक्रियता
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने हालिया परिस्थितियों का जायजा लेते हुए सभी जिलों के उपायुक्तों, सिविल सर्जनों और मेडिकल कॉलेज प्रशासनों को कड़ी निगरानी रखने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संदिग्ध मरीजों की जल्द पहचान, त्वरित जांच और तुरंत चिकित्सा उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। गंभीर सांस की तकलीफ वाले व्यक्तियों पर विशेष ध्यान देने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बड़े केंद्रों में भेजने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इन्फ्लूएंजा के लक्षण और प्राथमिक जांच व्यवस्था
विशेषज्ञों के मुताबिक H1N1 और H3एन2 जैसे वायरस साल के शुरुआती महीनों के अलावा बारिश के बाद के मौसम में भी तेजी से फैलते हैं। आम जनता में सर्दी, खांसी, तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सुस्ती और सांस लेने में कठिनाई जैसे संकेत दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाने की सलाह दी गई है। प्राथमिक स्तर पर ओपीडी में जांच के साथ-साथ रांची के रिम्स और जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में प्रयोगशाला परीक्षण की सुविधा मुहैय्या कराई गई है।
अस्पतालों में 10-10 बेड के आइसोलेशन वार्ड तैयार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के निर्देशों के तहत पूर्वी सिंहभूम सहित विभिन्न जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। अस्पतालों में दस-दस बिस्तरों वाले विशेष वार्ड तय किए गए हैं। इसके अलावा ऑक्सीजन आपूर्ति, वेंटिलेटर और जरूरी दवाओं का स्टॉक दुरुस्त रखने के आदेश हैं। डॉक्टरों तथा अन्य चिकित्साकर्मियों को मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। सभी नए मामलों का ब्योरा नियमित रूप से निगरानी कार्यक्रम को भेजा जा रहा है।
स्वास्थ्य परिसरों की जमीनी हकीकत पर सवाल
एक तरफ जहां फ्लू से निपटने की कागजी तैयारियां जोरों पर हैं वहीं दूसरी ओर जमीनी हालात पर भी सवाल उठ रहे हैं। जमशेदपुर के एमजीएम परिसर में वाहन खड़े करने की जगह पर फैली गंदगी और कीचड़ को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने शुक्रवार को जान गंवाने वाले कन्हाई प्रधान के परिजनों से मुलाकात के दौरान इस बदहाली को देखा और सोशल मीडिया के जरिए संवेदनशील अस्पताल परिसर में ऐसी लापरवाही के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।