उत्तराखंड में 452 मदरसों की जांच तेज, सरकार ने साफ कर दिया अपना सख्त रुख

उत्तराखंड में 452 मदरसों की जांच तेज, सरकार ने साफ कर दिया अपना सख्त रुख

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के भीतर संचालित हो रहे मदरसों की शिक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को लेकर अपना रुख पूरी तरह सख्त कर लिया है। प्रदेश में अब केवल वही मदरसे चल सकेंगे जो तय सरकारी मानकों को पूरा करते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से विधिवत मान्यता प्राप्त करेंगे और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से औपचारिक संबद्धता लेंगे। जो संस्थान इन कड़े मानकों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

रुद्रपुर में मौलवी की गिरफ्तारी और अवैध मदरसे पर सीलिंग की कार्रवाई

मदरसों को लेकर प्रशासनिक सख्ती के बीच उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में बड़ा मामला सामने आया था। वहां जश्न-ए-मोहम्मदी जुलूस के दौरान त्रिशूल चौक पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप में पुलिस ने संबंधित मौलवी को गिरफ्तार किया। इसके तुरंत बाद जिला प्रशासन ने त्वरित एक्शन लेते हुए संबंधित मदरसे को सील कर दिया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि वह मदरसा बिना किसी वैध मान्यता और जरूरी नियमों का उल्लंघन कर संचालित हो रहा था।

कट्टरपंथ पर सीएम पुष्कर सिंह धामी का कड़ा रुख, नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में कट्टरता या अलगाव को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के प्रति सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दोहराया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि देवभूमि की पावन धरा पर ऐसी किसी भी शिक्षण व्यवस्था को अनुमति नहीं दी जाएगी जो समाज में कट्टरपंथ को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून का शासन सर्वोच्च है और सरकार द्वारा तय नियम सभी शैक्षणिक संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे, जिनका शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

452 पंजीकृत मदरसों की जांच तेज, 200 संस्थानों ने किया मान्यता के लिए आवेदन

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, पूर्व में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में पंजीकृत कुल 452 मदरसों के लिए अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से नए सिरे से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 200 मदरसों के ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन सभी संस्थानों के भौतिक सत्यापन, स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेजों की गहन जांच की प्रक्रिया चल रही है, जिसके आधार पर ही संचालन की अंतिम अनुमति दी जाएगी।