रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में भव्य रावण दहन: राज्यपाल ने रावण

रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में भव्य रावण दहन: राज्यपाल ने रावण

बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाने वाला महापर्व विजय दशमी यानी दशहरा पूरे देश में बेहद धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। झारखंड की राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान (Morabadi Ground) में हर साल की तरह इस बार भी रावण दहन का एक अत्यंत भव्य और आकर्षक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसे देखने के लिए शहर और आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में आम लोग, बच्चे और बुजुर्ग पहुंचे थे। इस बार के इस पारंपरिक और सांस्कृतिक उत्सव में एक तरफ जहाँ बुराई के प्रतीकों का दहन देख लोगों का उत्साह चरम पर था, वहीं दूसरी तरफ राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की इस बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम से अनुपस्थिति हर किसी के लिए चर्चा का विषय बनी रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी माता के निधन के कारण दुखी होने और मातृशोक के चलते इस वर्ष रावण दहन के इस मुख्य सार्वजनिक समारोह से अपनी दूरी बनाए रखी। राज्य के राज्यपाल ने इस गरिमामयी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए पारंपरिक तरीके से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतलों का दहन किया। आइए विस्तार से जानते हैं कि मोरहाबादी मैदान के इस मुख्य आयोजन में क्या-क्या खास रहा और किस प्रकार सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं के बीच यह पर्व संपन्न हुआ।

राज्यपाल ने की पारंपरिक पूजा-अर्चना और आतिशबाजी के बीच धधक उठे बुराई के प्रतीक पुतले

राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित होने वाला रावण दहन समारोह झारखंड का सबसे बड़ा और चर्चित दशहरा उत्सव माना जाता है। इस वर्ष भी यहाँ रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के आसमान को छूते हुए ऊंचे-ऊंचे पुतले बनाए गए थे, जिन पर बेहद आकर्षक रंग-रोगन और आतिशबाजी की सामग्री फिट की गई थी। कार्यक्रम के निर्धारित समय पर झारखंड के माननीय राज्यपाल ने पारंपरिक रूप से भगवान श्री राम की पूजा-अर्चना करने के बाद रिमोट या अग्निबाण के माध्यम से इन विशालकाय पुतलों में आग लगाई। जैसे ही पुतलों में आग लगी, उनमें से एक के बाद एक लगातार धमाकों के साथ आतिशबाजी छूटने लगी, जिसे देखकर मैदान में मौजूद हजारों दर्शकों ने 'जय श्री राम' के जयकारे लगाए और तालियां बजाईं। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और दमकल विभाग की गाड़ियां तथा पुलिस बल किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद नजर आए।

मातृशोक के कारण सीएम हेमंत सोरेन का अनुपस्थित रहना, राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में रही चर्चा

इस वर्ष मोरहाबादी के रावण दहन समारोह में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शामिल न हो पाने की खबर ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा। कुछ समय पहले ही मुख्यमंत्री परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा था और उनकी माता का निधन हो गया था, जिसके चलते मुख्यमंत्री वर्तमान में पारंपरिक और शोक के नियमों का पालन कर रहे हैं। इस व्यक्तिगत और गहरे मातृशोक (Mourning due to mother's demise) के कारण उन्होंने किसी भी प्रकार के उत्सव या आनंद वाले सार्वजनिक आयोजनों से दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया। हालांकि वे प्रत्यक्ष रूप से इस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन राज्य की जनता को विजय दशमी की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने यह संदेश जरूर दिया कि असत्य पर सत्य की जीत का यह पर्व सभी के जीवन में सकारात्मकता और खुशियां लेकर आए। राजनीतिक जानकारों और स्थानीय नागरिकों ने भी मुख्यमंत्री के इस व्यक्तिगत दुख के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके इस फैसले को पूरी तरह से उचित ठहराया।

राजधानी में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ महापर्व

त्योहारों के इस सीजन में राजधानी रांची के भीतर कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और किसी भी असामाजिक तत्व द्वारा खलल डालने की कोशिश को नाकाम करने के लिए जिला प्रशासन और रांची पुलिस ने व्यापक स्तर पर बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया था। मोरहाबादी मैदान के चारों तरफ भारी संख्या में पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी ताकि आने वाले दर्शकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। शांति और सौहार्द के माहौल के बीच संपन्न हुए इस रावण दहन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि झारखंड की सांस्कृतिक और सामाजिक आबोहवा में मेल-मिलाप और पर्वों के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है। बुराई के अंत का संदेश देने वाला यह पर्व इस साल भी रांची के इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।