JPSC चेयरमैन के इस्तीफे पर झारखंड में भारी सियासी बवाल, बीजेपी का तीखा हमला- युवाओं और छात्रों को गुमराह करने की साजिश!
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के अध्यक्ष (चेयरमैन) द्वारा अपने पद से अचानक इस्तीफा दिए जाने के बाद राज्य का सियासी पारा पूरी तरह से गरमा गया है। झारखंड की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले प्रशासनिक व्यवस्था में आए इस बड़े भूचाल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हेमंत सोरेन सरकार और जेपीएससी प्रबंधन पर सीधा मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह इस्तीफा सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के आक्रोश से बचने और उन्हें गुमराह करने का एक सुनियोजित प्रयास है।
जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर उठते रहे हैं सवाल, अचानक इस्तीफे से बढ़ा सस्पेंस
झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं के आयोजन और उनके परिणामों को लेकर जेपीएससी हमेशा से ही विवादों और छात्र आंदोलनों के केंद्र में रहा है। हाल के दिनों में कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने, कट-ऑफ में विसंगतियों और नियुक्तियों में देरी को लेकर छात्र लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे नाजुक समय में चेयरमैन का पद छोड़ना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आयोग के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान और सरकार द्वारा परीक्षा कैलेंडर को लेकर बनाए जा रहे राजनीतिक दबाव के कारण ही चेयरमैन को यह कदम उठाना पड़ा है।
विपक्ष का सोरेन सरकार पर करारा प्रहार: 'विफलताओं को छिपाने का प्रयास'
भाजपा प्रदेश नेतृत्व का बड़ा हमला: बीजेपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा, 'हेमंत सरकार ने युवाओं से वादा किया था कि वे पारदर्शी तरीके से नौकरियां देंगे, लेकिन साढ़े चार साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जेपीएससी केवल भ्रष्टाचार और लेटलतीफी का अड्डा बनकर रह गया है। अब जब चुनाव नजदीक हैं और युवा हिसाब मांग रहे हैं, तो अपनी नाकामी का ठीकरा फोड़ने और छात्रों का ध्यान भटकाने के लिए चेयरमैन से जबरन इस्तीफा दिलवाया गया है।'
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करे सरकार - बीजेपी
भाजपा ने आरोप लगाया कि जेपीएससी चेयरमैन का इस्तीफा वास्तव में इस बात का प्रमाण है कि आयोग पूरी तरह से सरकारी हस्तक्षेप के तहत काम कर रहा था और वहां स्वायत्तता नाम की कोई चीज नहीं बची थी। बीजेपी नेताओं ने मांग की है कि वर्तमान में चल रही सभी नियुक्ति प्रक्रियाओं को बिना किसी व्यवधान के समय पर पूरा किया जाए, क्योंकि चेयरमैन के न होने से फाइलों के अटकने और परीक्षाओं के टलने का सीधा खतरा मंडराने लगा है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि युवाओं के भविष्य के साथ कोई भी नया खिलवाड़ किया गया, तो पूरी राज्य इकाई छात्रों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेगी।
सत्ता पक्ष का पलटवार, कहा- 'संस्थाओं का राजनीतिकरण न करे विपक्ष'
दूसरी तरफ, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि इस्तीफा देना चेयरमैन का व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है और सरकार का इससे कोई लेना-देवा नहीं है। उन्होंने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष हर प्रशासनिक फेरबदल में राजनीति ढूंढने की कोशिश करता है और युवाओं को भड़काने का काम कर रहा है। बहरहाल, रांची से लेकर पूरे झारखंड के छात्र संगठनों में इस इस्तीफे के बाद असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि आने वाली परीक्षाओं का भविष्य अब क्या होगा।