क्या 2021 के यास तूफान जितना खतरनाक है अर्णब? झारखंड में अलर्ट, किसानों की बढ़ी टेंशन

क्या 2021 के यास तूफान जितना खतरनाक है अर्णब? झारखंड में अलर्ट, किसानों की बढ़ी टेंशन

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की चेतावनियों के बाद से पूर्वी भारत के कई राज्यों में एक बार फिर चक्रवाती तूफानों की खौफनाक यादें ताजा हो गई हैं। बंगाल की खाड़ी से लगातार ताकतवर होता हुआ नया चक्रवात 'अर्नब' (Cyclone Arnab) अब तटीय इलाकों से आगे बढ़कर अंतर्देशीय राज्यों की ओर तेजी से रुख कर रहा है। मौसम विशेषज्ञों के बीच इन दिनों सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यही चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या यह नया चक्रवाती तूफान साल 2021 में आए बेहद विनाशकारी और खूंखार 'यास' (Cyclone Yaas) तूफान की तरह ही झारखंड और पड़ोसी राज्यों में भारी तबाही मचाने वाला है। इस आसन्न प्राकृतिक आपदा के खतरे को भांपते हुए झारखंड के प्रशासनिक अमले ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया है, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ राज्य के अन्नदाता किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच गई हैं।

साल 2021 के सुपर साइक्लोन 'यास' की विनाशलीला और इस बार के चक्रवात 'अर्नब' की ताकत में अंतर

अगर हम साल 2021 के मई महीने में आए 'यास' तूफान के इतिहास पर नजर डालें, तो उसने ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई जिलों में भारी बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ के जरिए जनजीवन को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। उस वक्त झारखंड के कोल्हान और संताल परगना संभाग के जिलों में दर्जनों कच्चे मकान ढह गए थे, बिजली के खंभे उखड़ गए थे और करोड़ों रुपये की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई थीं। अब उठने वाले चक्रवात 'अर्नब' की गति और नमी को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि भले ही इसका केंद्र बिंदु तटीय राज्यों से टकराकर कुछ कमजोर पड़ा हो, लेकिन इसका व्यापक असर झारखंड के आसमान में घने बादलों और मूसलाधार बारिश के रूप में लंबे समय तक टिक सकता है। हवाओं की रफ्तार भले ही थोड़ी कम हो, लेकिन लगातार होने वाली बारिश निचले इलाकों में बाढ़ जैसी विकट स्थिति पैदा करने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त है।

झारखंड के इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरे का साया, मौसम विभाग का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी

चक्रवात 'अर्नब' के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए झारखंड के मौसम केंद्र ने पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, खूंटी और राजधानी रांची समेत कई जिलों में विशेष चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने अगले 48 घंटों के दौरान लोगों को बिना अति आवश्यक कार्य के घरों से बाहर न निकलने की कड़ी हिदायत दी है। नदी और नालों के किनारे रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों या सरकारी राहत शिविरों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला उपायुक्तों (DCs) को यह निर्देश दिया है कि वे किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों के साथ पूरी तरह मुस्तैद रहें, ताकि समय रहते जनता की जान-माल की रक्षा की जा सके।

धान की कटाई और रबी फसलों की तैयारी में जुटे किसानों की बढ़ी टेंशन, खेत में पकी फसल पर मंडराया संकट

इस चक्रवाती तूफान और बेमौसम मूसलाधार बारिश की खबर से झारखंड के किसानों की रातों की नींद उड़ गई है। वर्तमान में राज्य के अधिकांश जिलों में धान की फसलें पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी हैं और कई जगहों पर किसान खेतों में धान की कटाई और मड़ाई का काम कर रहे हैं। यदि ऐसे समय में लगातार दो-तीन दिनों तक भारी बारिश और तेज हवाएं चलती हैं, तो खेतों में खड़ी या कटी हुई धान की फसल पानी में डूब जाएगी, जिससे दाने काले पड़ जाएंगे और किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर जाएगा। इसके अलावा, आलू, मटर, सरसों और अन्य रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसान भी इस बात से बेहद चिंतित हैं कि अधिक नमी और जलभराव के कारण उनके नए बीज सड़ सकते हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

किसानों के लिए कृषि विभाग की सलाह और प्राकृतिक आपदा से निपटने के एहतियाती उपाय

किसानों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए झारखंड सरकार के कृषि विभाग और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों ने एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन किसानों ने पहले ही धान की कटाई कर ली है, वे अपनी फसल के बंडलों को तुरंत सुरक्षित स्थानों, गोदामों या तिरपाल के नीचे सुरक्षित ढंककर रखें ताकि वे बारिश के पानी से भीगने से बच सकें। इसके साथ ही खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए पक्की नालियां बनाने की अपील की गई है ताकि जलभराव की समस्या से फसलों को बचाया जा सके। कुदरत के इस चक्रवाती प्रकोप के आगे इंसान भले ही लाचार नजर आता हो, लेकिन समय पर बरती गई सावधानी और सरकारी उपाय इस आपदा के नुकसान को काफी हद तक कम करने में जरूर मददगार साबित हो सकते हैं।