हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर ये 12 ट्रेनें हुईं प्रभावित, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्गों में से एक हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग से इस समय यात्रियों के लिए एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। झारखंड और ओडिशा के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाले इस रेल खंड पर अचानक जंगली हाथियों के एक बड़े झुंड के पटरियों पर आ जाने के कारण ट्रेनों की रफ्तार पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF), वन विभाग और ट्रेन चालकों की सूझबूझ के चलते किसी भी प्रकार के बड़े हादसे को तो टाल लिया गया है, लेकिन हाथियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पूरे रूट पर ट्रेनों का संचालन कई घंटों के लिए रोकना पड़ा है। जब भी इस प्रकार के वन्यजीव पटरियों के करीब आ जाते हैं, तो रेलवे प्रशासन को यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए ट्रेनों को या तो सुरक्षित स्थानों पर रोकना पड़ता है या फिर उनकी गति को बेहद धीमा करना पड़ता है, जिसके कारण इस रूट पर चलने वाली दर्जनों ट्रेनें अपने निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही हैं।
प्रभावित हुईं 12 से अधिक प्रमुख ट्रेनें, कई गाड़ियों के बदले गए मार्ग और समय
हाथियों के झुंड के पटरियों पर डेरा डालने के कारण हावड़ा और मुंबई के बीच चलने वाली एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और मेल गाड़ियों समेत कुल 12 से अधिक प्रमुख ट्रेनें सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं। इन ट्रेनों में सफर कर रहे हजारों यात्रियों को बीच रास्ते में ही कई-कई घंटे तक स्टेशनों पर या खुले जंगलों के बीच फंसे रहना पड़ा, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुछ ट्रेनों के मार्ग (Route Diversion) में बदलाव किया गया है ताकि उन्हें सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा सके, जबकि कई अन्य गाड़ियों को पीछे के स्टेशनों पर ही रोककर नियंत्रित किया गया है। रेलवे के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं और जैसे ही हाथी पटरियों से दूर सुरक्षित जंगलों की तरफ लौटते हैं, ट्रेनों के परिचालन को धीरे-धीरे सामान्य किया जा रहा है।
रेलवे और वन विभाग की संयुक्त टीम चला रही है मॉनिटरिंग, यात्रियों के लिए जारी किए गए हेल्पलाइंस
इस प्रकार की वन्यजीव बाधाओं से निपटने के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे (South Eastern Railway) और राज्य के वन विभाग ने एक संयुक्त कार्ययोजना के तहत पटरियों के आसपास गश्त बढ़ा दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके। जिन क्षेत्रों में अक्सर हाथियों का झुंड पटरियों को पार करता है, वहां चालकों (Loco Pilots) को विशेष रूप से सतर्क रहने और ट्रेन की गति सीमा (Speed Limit) को बेहद कम रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। रेलवे स्टेशनों पर फंसे हुए यात्रियों के लिए खान-पान, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं, साथ ही रेलवे ने हेल्प डेस्क और हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय कर दिए हैं ताकि यात्री अपनी ट्रेनों की लाइव स्थिति और नए शेड्यूल की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें। अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे इस प्राकृतिक और अप्रत्याशित बाधा के दौरान रेलवे प्रशासन का सहयोग करें, क्योंकि वन्यजीवों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है जितनी कि रेल यात्रियों की सुरक्षित यात्रा।
लगातार बढ़ती वन्यजीव और रेल मार्ग की इस समस्या का क्या है स्थायी समाधान?
हावड़ा-मुंबई जैसे अति व्यस्त रेल मार्ग पर हाथियों की आवाजाही के कारण ट्रेनों के बार-बार बाधित होने की इस घटना ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक बुनियादी ढांचे के बीच तालमेल बिठाने के लिए कोई स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। वन्यजीव विशेषज्ञों का यह मानना है कि जंगलों से गुजरने वाले इन रेल खंडों पर आधुनिक सेंसर आधारित अर्ly वार्निंग सिस्टम (Early Warning System), थर्मल कैमरे और अंडरपास या ओवरपास जैसे वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors) बनाए जाने चाहिए ताकि हाथियों को पटरियों पर आने से रोका जा सके। जब तक इस प्रकार की कोई ठोस तकनीकी व्यवस्था जमीन पर नहीं उतरती, तब तक रेलवे को इस तरह की प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा हाथियों के झुंड को सुरक्षित रूप से घने जंगलों की तरफ खदेड़ने का काम जारी है, जिसके बाद इस मुख्य मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी।