JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का अनोखा विरोध: शिबू सोरेन के कटआउट के साथ मुंह पर पट्टी और हाथ में तख्तियां लेकर निकाला मौन जुलूस
झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में धरनास्थल पर हुई पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक सख्ती के बाद अब अभ्यर्थियों ने विरोध जताने का एक बेहद अनोखा और शांतिपूर्ण तरीका अपनाया है। राजधानी रांची की सड़कों पर बुधवार को सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर और हाथों में तख्तियां लेकर एक विशाल मौन जुलूस निकाला। इस जुलूस के दौरान छात्रों ने झारखंड के संस्थापक और 'दिशोम गुरु' कहे जाने वाले शिबू सोरेन के बड़े-बड़े कटआउट भी अपने साथ रखे, जिसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
क्यों निकाला गया यह अनोखा मौन जुलूस?
छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठाई, तो सरकार और प्रशासन ने उनकी सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया। पुलिसिया कार्रवाई और दमन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए छात्रों ने हिंसा या नारेबाजी का रास्ता न चुनकर 'गांधीवादी तरीका' अपनाया।
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मुंह पर पट्टी और हाथों में तख्तियां: छात्रों के मुंह पर बंधी पट्टियां इस बात का प्रतीक थीं कि कैसे सरकार युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं, तख्तियों पर रोजगार, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और जेपीएससी-जेएसएससी की विसंगतियों को दूर करने से जुड़े नारे लिखे हुए थे।
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दिशोम गुरु शिबू सोरेन के कटआउट का संदेश: जुलूस में शिबू सोरेन का कटआउट लेकर चलना इस बात का संकेत था कि छात्र झारखंड आंदोलन के मूल आदर्शों और न्याय की उम्मीद के तहत राज्य के संस्थापकों को अपनी पीड़ा याद दिला रहे हैं। छात्रों का संदेश था कि जिस झारखंड की कल्पना गरीबों, पिछड़ों और युवाओं के अधिकारों के लिए की गई थी, आज उसी राज्य के युवा दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
प्रशासन और सियासी गलियारों में मची हलचल
रांची की सड़कों पर छात्रों द्वारा निकाले गए इस अनुशासित और मौन प्रदर्शन ने प्रशासनिक अमले और राजनीतिक दलों के कान खड़े कर दिए हैं। बिना किसी शोर-शराबे और उग्र प्रदर्शन के इतने बड़े पैमाने पर छात्रों का यह शांतिपूर्ण विरोध सरकार के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक संदेश माना जा रहा है। विपक्षी दलों ने भी इस अनोखे प्रदर्शन की तस्वीरें साझा करते हुए सरकार पर तंज कसा है और कहा है कि जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी अब पूरी तरह से न्याय की आस में गांधीवादी रास्ते पर उतर आए हैं, लेकिन सरकार अब भी संवेदनहीन बनी हुई है।
छात्रों की दो टूक: जब तक न्याय नहीं, संघर्ष जारी
छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे डरने वाले नहीं हैं। जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं और परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों पर रोक लगाकर पारदर्शी कैलेंडर जारी नहीं किया जाता, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक संघर्ष अलग-अलग रूपों में जारी रहेगा। रांची में निकाले गए इस मौन जुलूस ने एक बार फिर झारखंड की सियासत और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।