झारखंड की 2 राज्यसभा सीटों पर 'INDIA' या 'NDA' कौन मारेगा बाजी? समझें विधानसभा का पूरा वोट गणित
झारखंड की सियासत में इन दिनों संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां बेहद तेज हो गई हैं। देश की 24 राज्यसभा सीटों के लिए आगामी 18 जून को होने वाली वोटिंग में झारखंड की दो बेहद महत्वपूर्ण सीटें भी शामिल हैं। सूबे की इन दोनों सीटों पर कब्जा जमाने के लिए विपक्षी 'INDIA' गठबंधन और सत्ता की रेस में शामिल 'NDA' दोनों ही अपनी-अपनी जीत के बड़े दावे कर रहे हैं। गौरतलब है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कद्दावर नेता शिबू सोरेन के निधन और भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के कारण ये सीटें खाली हुई हैं। पहली नजर में भले ही दोनों खेमों में कांटे की टक्कर दिख रही हो, लेकिन जमीनी आंकड़ों और विधानसभा के मौजूदा समीकरणों को खंगालें तो यहाँ 'INDIA' गठबंधन का पलड़ा काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। आइए बारीकी से समझते हैं कि आखिर झारखंड की इन दो सीटों पर जीत और हार का पूरा गणित क्या है।
जीत के लिए चाहिए जादुई आंकड़ा, जानिए एक सीट के लिए कितने वोट जरूरी
झारखंड विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो यहाँ कुल विधायकों की संख्या 81 है। राज्यसभा चुनाव के नियमों के मुताबिक, झारखंड की एक राज्यसभा सीट पर सीधे तौर पर फतह हासिल करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में दोनों सीटों को अपने पाले में करने के लिए किसी भी गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का मजबूत समर्थन होना अनिवार्य है। इसी जादुई आंकड़े के इर्द-गिर्द दोनों ही गठबंधनों की पूरी चुनावी बिसात बिछी हुई है और जोड़-तोड़ की रणनीतियों पर काम चल रहा है।
INDIA गठबंधन की ताकत: जेएमएम और कांग्रेस के पास हैं पर्याप्त नंबर
अगर 'INDIA' गठबंधन के कुनबे की बात करें तो इस समय उनके खेमे में विधायकों की फौज सबसे बड़ी है। गठबंधन के पास कुल मिलाकर 56 विधायकों का अचूक आंकड़ा मौजूद है, जो दोनों सीटें जीतने के लिए बिल्कुल सटीक बैठता है। इस गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास 34 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं। इनके अलावा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 4 और भाकपा माले (CPI-ML) के 2 विधायक भी इस गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं।
चूंकि आपसी समझौते के तहत माना जा रहा है कि इस बार एक सीट जेएमएम और दूसरी सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी। ऐसे में जेएमएम उम्मीदवार को अपने 34 विधायकों में से जीत के लिए जरूरी 28 वोट आसानी से मिल जाएंगे। इसके बाद जेएमएम के पास 6 अतिरिक्त वोट बचेंगे। दूसरी सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार को जिताने के लिए पार्टी के अपने 16 विधायकों के साथ जेएमएम के बचे हुए 6 वोट, आरजेडी के 4 वोट और भाकपा माले के 2 वोटों की जरूरत होगी। इन सबको जोड़ने पर कांग्रेस प्रत्याशी को भी पूरे 28 वोट मिल जाते हैं। अगर यह एकजुटता कायम रहती है, तो 'INDIA' गठबंधन की राह बेहद आसान है।
एनडीए का गणित कमजोर, क्या क्रॉस वोटिंग के भरोसे है भाजपा?
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन के लिए डगर काफी मुश्किल नजर आ रही है। 81 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए के पास कुल मिलाकर केवल 24 विधायक ही हैं, जो एक सीट के लिए जरूरी 28 के आंकड़े से भी 4 कम हैं। एनडीए के इस कुनबे में भाजपा के पास 21, आजसू (AJSU) के पास 2, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के पास 1 और जेडीयू (JDU) के पास 1 विधायक हैं।
इनके अलावा झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के एकमात्र विधायक टाइगर जयराम महतो हैं, जिनका रुख अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एनडीए गठबंधन को अपनी साख बचाने या एक सीट पर भी जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 4 अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक विपक्षी खेमे में कोई बड़ी बगावत या क्रॉस वोटिंग नहीं होती, तब तक एनडीए के लिए इस फासले को पाट पाना मुमकिन नहीं होगा। हालांकि, राजनीति में अंतिम समय तक उलटफेर की गुंजाइश बनी रहती है, यही वजह है कि एनडीए भी अभी मैदान छोड़ने को तैयार नहीं है।