NEET छात्रों के लिए बड़ी खबर! पेपर लीक के दोषियों को तुरंत सजा के लिए बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट, जानिए कैसे काम करती हैं ये अदालतें
NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक को लेकर देशभर में चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के हक में एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। पीएम मोदी ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित (तुरंत) सुनवाई और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए विशेष 'फास्ट ट्रैक कोर्ट' (Fast Track Courts) का गठन किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इस बड़े कदम के बाद अब हर किसी के मन में यह सवाल है कि आखिर ये फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होते हैं और यह सामान्य अदालतों से कैसे अलग हैं?
क्या होती हैं फास्ट ट्रैक अदालतें और ये क्यों बनाई जाती हैं?
फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) जैसा कि नाम से ही साफ है—तेजी से काम करने वाली अदालतें होती हैं। भारत की सामान्य अदालतों में लाखों मामले लंबित (Pending) पड़े रहते हैं, जिसके कारण किसी भी केस का फैसला आने में सालों-साल लग जाते हैं। इसी देरी को खत्म करने के लिए किसी विशेष कानून या गंभीर मामलों (जैसे महिलाओं-बच्चों के खिलाफ अपराध या अब पेपर लीक) के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाते हैं।
इन अदालतों का मुख्य उद्देश्य एक निश्चित समय सीमा के भीतर (Time-bound trial) गवाहों की जांच करना, सबूतों को परखना और अंतिम फैसला सुनाना होता है। सामान्य कोर्ट की तरह यहां तारीख पर तारीख मिलने की गुंजाइश बहुत कम होती है, जिससे पीड़ितों को बहुत जल्द न्याय मिल जाता है।
भारत में कुल कितने फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं? (ताजा आंकड़े)
भारत में फास्ट ट्रैक अदालतों का संचालन और फंडिंग मुख्य रूप से राज्य सरकारों द्वारा संबंधित हाई कोर्ट के परामर्श से की जाती है। केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई नवीनतम जानकारी के अनुसार, देश में इन अदालतों की स्थिति इस प्रकार है:
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फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC): भारत के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस समय कुल 879 फास्ट ट्रैक अदालतें पूरी तरह से काम कर रही हैं। 14वें वित्त आयोग ने देश में ऐसे 1800 कोर्ट स्थापित करने की सिफारिश की थी।
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फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC): इसके अलावा, बलात्कार और पॉक्सो (POCSO) एक्ट से जुड़े संवेदनशील मामलों के निपटारे के लिए केंद्र सरकार की सहायता से 'फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट' भी चलाए जा रहे हैं, जिनकी संख्या देश भर में 725 के करीब है।
इन सभी अदालतों ने पिछले 3 वर्षों (2023, 2024 और 2025) में देश भर में 40 लाख से अधिक मामलों का निपटारा करके न्याय प्रणाली को रफ्तार दी है।
NEET और पेपर लीक मामलों में कैसे मिलेगी मदद?
अब तक एंटी-पेपर लीक कानून के तहत सीबीआई (CBI) और पुलिस जांच तो कर रही थी, लेकिन अदालती कार्यवाही लंबी खिंचने का डर बना हुआ था। अब पीएम मोदी के निर्देश के बाद जब शिक्षा और परीक्षा माफियाओं के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट काम करना शुरू करेंगे, तो:
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केस दर्ज होने के चंद महीनों के भीतर ही सुनवाई पूरी कर ली जाएगी।
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पेपर लीक रैकेट के मास्टरमाइंड और सरकारी अधिकारियों (यदि कोई संलिप्त है) को बिना किसी देरी के सीधे जेल भेजा जा सकेगा।
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छात्रों का कीमती समय बर्बाद नहीं होगा और पूरी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बहाल करने में मदद मिलेगी।
सरकार का यह कदम देश के करोड़ों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के मनोबल को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।