सरकारी स्कूल की बदहाली पर सीएम रेवंत रेड्डी का कड़ा एक्शन: अब ₹25 लाख की लागत से बदलेंगी स्कूल की सूरत, एक शिक्षक की मुहिम लाई रंग
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने राज्य के सरकारी शिक्षा ढांचे को सुधारने की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। एक सरकारी स्कूल की जर्जर स्थिति और बदहाली का मामला जब मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया, तो उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए स्कूल के कायाकल्प के निर्देश दिए। इस पूरे मामले में सबसे खास बात यह रही कि एक शिक्षक की निष्ठा और पहल ने सरकार का ध्यान इस ओर खींचा, जिसके बाद अब सरकार ने उस स्कूल में आधुनिक क्लासरूम बनाने के लिए ₹25 लाख की राशि मंजूर कर दी है।
क्या है पूरा मामला और कैसे बदली स्कूल की किस्मत?
यह मामला राज्य के एक सुदूर इलाके के सरकारी स्कूल का है, जहां बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव था। स्कूल की इमारत जर्जर हो चुकी थी और छात्रों को बैठने के लिए सुरक्षित जगह तक उपलब्ध नहीं थी। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में स्कूल के एक जागरूक और समर्पित शिक्षक ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने स्तर पर स्कूल की बदहाल स्थिति को उजागर करने के लिए लगातार प्रयास किए और सोशल मीडिया व प्रशासन के जरिए अपनी बात ऊपर तक पहुंचाई। शिक्षक की इस निस्वार्थ कोशिश का ही नतीजा था कि उनकी आवाज सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची।
सीएम रेवंत रेड्डी का निर्देश: 'शिक्षा से समझौता नहीं'
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल स्थल निरीक्षण के निर्देश दिए। सीएम ने स्पष्ट किया कि बच्चों के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और राज्य के हर स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण होना चाहिए। सरकार ने तुरंत ₹25 लाख का फंड स्वीकृत किया है, जिससे अब न केवल नए और आधुनिक क्लासरूम का निर्माण होगा, बल्कि स्कूल में बुनियादी सुविधाएं जैसे पेयजल, शौचालय और फर्नीचर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस शिक्षक की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे ही समर्पित शिक्षकों की बदौलत सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाया जा सकता है।
'बदलाव की बयार': सरकारी स्कूलों के कायाकल्प का विजन
रेवंत रेड्डी सरकार का यह कदम सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के उनके व्यापक विजन का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि राज्य भर में जितने भी जर्जर स्कूल हैं, उनकी सूची तैयार की जाए और चरणबद्ध तरीके से उनका आधुनिकीकरण सुनिश्चित किया जाए। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि यदि सही नीयत और इच्छाशक्ति के साथ काम किया जाए, तो सरकारी तंत्र के भीतर भी बड़े बदलाव संभव हैं। स्थानीय लोगों ने सीएम के इस त्वरित एक्शन पर खुशी जाहिर की है और अब उन्हें उम्मीद है कि उनके बच्चों को जल्द ही एक बेहतर और सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा।