GK Quiz: भारत का सबसे पुराना Co-Ed बोर्डिंग स्कूल, 1847 में हुई थी शुरुआत और आज भी कायम है इसकी अनूठी विरासत
यदि आपसे पूछा जाए कि भारत का सबसे पुराना को-एड (सह-शिक्षा) बोर्डिंग स्कूल कौन सा है, तो शायद आप कुछ पल के लिए सोच में पड़ जाएं। भारत में शिक्षा और प्रतिष्ठित स्कूलों का इतिहास सदियों पुराना है, लेकिन हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत पहाड़ियों में बसा 'द लॉरेंस स्कूल, सनावर' (The Lawrence School, Sanawar) एक ऐसा नाम है जो भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया का सबसे पुराना को-एड बोर्डिंग स्कूल होने का गौरव रखता है। साल 1847 में स्थापित हुए इस स्कूल का इतिहास लगभग 179 साल पुराना है और इसकी विरासत आज भी उतनी ही मजबूत है।
सर हेनरी लॉरेंस ने रखी थी इस ऐतिहासिक संस्थान की नींव
लॉरेंस स्कूल, सनावर की स्थापना 15 अप्रैल 1847 को सर हेनरी लॉरेंस और उनकी पत्नी होनोरिया ने की थी। शुरुआत में इस स्कूल को ब्रिटिश सैनिकों के अनाथ और अन्य बच्चों को शिक्षा और आश्रय देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, ताकि उन्हें मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से दूर एक सुरक्षित और अनुशासित माहौल दिया जा सके। सबसे खास बात यह है कि यह स्कूल अपने जन्मकाल (1847) से ही एक को-एड (Mixed-Gender) स्कूल रहा है, जहां लड़के और लड़कियां एक साथ पढ़ते आए हैं। 139 एकड़ के विशाल और हरे-भरे देवदार व पाइन के जंगलों के बीच फैला यह स्कूल समुद्र तल से करीब 1,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
सैन्य इतिहास और 'किंग्स कलर' का अनोखा सम्मान
सनावर स्कूल का सैन्य जुड़ाव बेहद गहरा और ऐतिहासिक रहा है। शुरुआती दौर में इसे 'लॉरेंस मिलिट्री असायलम' (Lawrence Military Asylum) और बाद में 'लॉरेंस रॉयल मिलिट्री स्कूल' के नाम से जाना जाता था। साल 1853 में ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा इस स्कूल को 'किंग्स कलर' (King's Colour) के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया था। ब्रिटिश साम्राज्य में यह सम्मान केवल चुनिंदा मिलिट्री रेजिमेंट्स और बेहद गिने-चुने संस्थानों को ही मिलता था। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी इस स्कूल के कई छात्रों ने सीधे सेना में शामिल होकर अपनी सेवाएं दी थीं।
'नेवर गिव इन' का मूलमंत्र और माउंट एवरेस्ट पर फतह का कीर्तिमान
इस स्कूल का आधिकारिक मूलमंत्र (Motto) है— 'नेवर गिव इन' (Never Give In) यानी कभी हार मत मानो। यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि यहां के छात्रों की जीवनशैली का हिस्सा है। इसी जज्बे के साथ मई 2013 में लॉरेंस स्कूल, सनावर के सात छात्रों की एक टीम ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल कर इतिहास रच दिया था। ऐसा करने वाला यह दुनिया का सबसे कम उम्र का स्कूली दल बना था।
राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक, ओल्ड सनावेरियन (Alumni) का जलवा
इस स्कूल से पास आउट होने वाले छात्रों को गर्व से 'ओल्ड सनावेरियन' (Old Sanawarians) कहा जाता है। सनावर की विरासत को आगे बढ़ाने वाले दिग्गजों की सूची बेहद लंबी है। इसके प्रमुख पूर्व छात्रों (Alumni) में बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान, अनुभवी अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ मेनका गांधी और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल जैसी नामचीन हस्तियां शामिल हैं। आज भी यह स्कूल भारत के टॉप विंटेज को-एड बोर्डिंग स्कूलों की सूची में पहले पायदान पर शुमार है।